SIR Process in Karnataka: कर्नाटक में एसआईआर प्रक्रिया पर कांग्रेस के अंदर अंतर्कलह, मंत्रियों के अलग-अलग बयानों से घिरी पार्टी
बेंगलुरु: कर्नाटक राज्य के भीतर वोटर लिस्ट के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) की पूरी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक गलियारों में घमासान मचा हुआ है। इस अभियान के तहत राज्यभर में लगभग एक करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं, जिसके बाद से विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इस बीच, राज्य के लोक निर्माण मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सतीश जारकीहोली ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि कांग्रेस पार्टी द्वारा दी गई उचित ट्रेनिंग के बाद ही कर्नाटक में एसआईआर की प्रक्रिया को पूरी तरह सही ढंग से संपन्न कराया गया है। उनके इस अप्रत्याशित बयान के बाद राजनीतिक हलकों में खलबली मच गई है, जहाँ एक तरफ विपक्षी पार्टी बीजेपी इस मुद्दे पर कांग्रेस को घेर रही है, वहीं दूसरी तरफ जारकीहोली की अपनी ही पार्टी के कई कद्दावर नेता उनके इस आकलन के विरोध में खुलकर सामने आ गए हैं।
दिल्ली में होने वाली महारैली से ठीक पहले आया बयान, मृत या स्थानांतरित लोगों के नाम हटने की कही बात
मंत्री सतीश जारकीहोली का यह विवादास्पद बयान आगामी एक नवंबर को देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व में आयोजित होने वाली राष्ट्रव्यापी महारैली से ठीक पहले सामने आया है। इस प्रस्तावित रैली का मुख्य उद्देश्य चुनाव आयोग द्वारा संचालित एसआईआर प्रक्रिया के माध्यम से कथित रूप से किए जा रहे ‘वोट चोरी’ के कृत्यों के खिलाफ जोरदार आवाज उठाना है। हालांकि, जारकीहोली का यह तर्क रहा है कि कांग्रेस ने कर्नाटक में इस प्रक्रिया का कभी कोई विरोध नहीं किया, बल्कि पार्टी ने अन्य राज्यों में इसके क्रियान्वयन के तरीकों को लेकर चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि मृत व्यक्तियों, अन्य स्थानों पर जा चुके नागरिकों या दो बार पंजीकृत हो चुके डुप्लीकेट नामों को सूची से हटाया गया है, जो कि एक जरूरी प्रशासनिक कदम था।
प्रियांक खरगे और संतोष लाड ने जताई कड़ी आपत्ति, ‘फॉर्म 7’ में अनियमितता और साजिश का लगाया गंभीर आरोप
सतीश जारकीहोली के इस रुख के बाद कर्नाटक कांग्रेस के अन्य मंत्रियों और नेताओं को तुरंत डैमेज कंट्रोल करना पड़ा। राज्य सरकार में मंत्री प्रियांक खरगे ने जारकीहोली के आकलन पर खुलकर असहमति जताई और वोटर लिस्ट से नाम हटाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले ‘फॉर्म 7’ के आवेदनों में हुई भारी गड़बड़ियों की ओर ध्यान आकर्षित किया। खरगे ने चित्तापुर और विजयपुरा का उदाहरण देते हुए दावा किया कि वहां एक ही बूथ पर विशेष समुदायों को निशाना बनाकर फर्जी तरीके से लोगों को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि वे जीवित थे। उन्होंने इसे एक गहरी और सेंट्रलाइज्ड साजिश करार दिया। इसके अलावा, एक अन्य मंत्री संतोष लाड ने भी एसआईआर को एक “धोखाधड़ी” बताते हुए कहा कि इससे केवल बीजेपी को फायदा पहुँचा है।
बीजेपी और विपक्ष का पलटवार, राहुल गांधी और सीएम डीके शिवकुमार को दी खुली चुनौती
दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी और अन्य विपक्षी दलों ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस पार्टी पर करारा हमला बोला है। पूर्व केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कांग्रेस के इस दोहरे रुख की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि जब निर्वाचन आयोग की यही वैध प्रक्रिया कांग्रेस शासित कर्नाटक में लागू हुई और 1 करोड़ नाम कम हुए, तो पार्टी के नेता इस पर चुप्पी साध लेते हैं या अंतर्विरोध में फंस जाते हैं। वहीं, बीजेपी सांसद जगदीश शेट्टार ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर तीखा प्रहार करते हुए राहुल गांधी और मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को खुली चुनौती दी कि वे हटाए गए 99 लाख नामों में से कम से कम 10 ऐसे वास्तविक और गलत तरीके से हटाए गए मामलों को सार्वजनिक करके दिखाएं, क्योंकि यह केवल राजनीतिक प्रोपगैंडा है।