Barmer Panchayat Election Controversy: नामांकन खारिज होने के बावजूद शख्स ने लड़ा चुनाव और बन गया सरपंच, राजस्थान के बाड़मेर में हैरान करने वाला मामला

बाड़मेर: राजस्थान के बाड़मेर जिले से पंचायती राज व्यवस्था और स्थानीय चुनाव संचालन की प्रक्रिया में एक बेहद चौंकाने वाली और गंभीर लापरवाही का मामला प्रकाश में आया है। जिले की गडरा रोड ग्राम पंचायत में सरपंच पद के एक उम्मीदवार पूराराम का नामांकन पत्र जांच प्रक्रिया के दौरान ही आधिकारिक रूप से खारिज कर दिया गया था। इसके बावजूद, निर्वाचन विभाग के नोटिस बोर्ड पर उम्मीदवारी रद्द होने की सूचना चस्पा होने के बाद भी पूराराम ने न केवल चुनाव लड़ा, बल्कि शानदार जीत हासिल कर सरपंच की कुर्सी भी अपने नाम कर ली। इस अजीबोगरीब वाकये ने संपूर्ण चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और मैदानी स्तर पर तैनात जिम्मेदार सरकारी अधिकारियों की कार्यशैली पर कई बड़े और गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

छंटनी के दौरान खारिज हुआ था पर्चा, फिर भी मैदान में डटे रहकर 187 वोटों के अंतर से दर्ज की जीत

प्राप्त विस्तृत विवरण के मुताबिक, गत 23 अक्टूबर को शिव विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली गडरा रोड ग्राम पंचायत के सरपंच पद के लिए नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। इस पंचायत से कुल 21 प्रत्याशियों ने अपने-अपने नामांकन पत्र प्रस्तुत किए थे। दस्तावेजों की जांच-पड़ताल के दौरान कुल दो उम्मीदवारों के नामांकन पत्र कानूनी रूप से निरस्त किए गए, जबकि नौ प्रत्याशियों ने स्वेच्छा से अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली थी। शेष बचे उम्मीदवारों में दयाराम के पुत्र पूराराम का नामांकन भी प्रशासनिक स्तर पर खारिज कर दिया गया था, जिसकी बाकायदा आधिकारिक सूचना सार्वजनिक बोर्ड पर चस्पा की गई थी। इसके बावजूद, पूराराम लगातार चुनाव मैदान में सक्रिय बने रहे। जब मतदान के बाद परिणाम आए, तो पूराराम को कुल 1,786 वोट मिले, जबकि उनके सबसे निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 1,599 मत प्राप्त हुए। इस प्रकार पूराराम ने अपने प्रतिद्वंद्वी को 187 मतों के अंतर से शिकस्त देकर सरपंच पद पर जीत दर्ज कर ली। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि उनका नामांकन पहले ही निरस्त किया जा चुका था, तो मतदान सूची में उनका नाम कैसे बना रहा, उन्हें चुनाव लड़ने की अनुमति किसने दी और उनका पर्चा वैध कैसे मान लिया गया?

जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल, निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गहराया संदेह

इस पूरे सनसनीखेज घटनाक्रम ने स्थानीय निर्वाचन प्रणाली की निगरानी व्यवस्था और संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली को कटघरे में ला खड़ा किया है। यदि प्रशासनिक स्तर पर नामांकन निरस्त होने का आदेश पहले ही जारी हो चुका था, तो उसकी धरातल पर अनुपालना सुनिश्चित करने की प्राथमिक जिम्मेदारी आखिर किसकी थी? क्या ड्यूटी पर तैनात संबंधित रिटर्निंग अधिकारियों और मतदान दलों को इस बात की कोई जानकारी नहीं थी? यदि उन्हें जानकारी थी, तो उस प्रत्याशी को चुनाव लड़ने से समय रहते क्यों नहीं रोका गया?

दस्तावेजों की जांच और आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार, तय होगी जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही

इस पूरे प्रकरण के सामने आने के बाद अब यह मांग जोर पकड़ने लगी है कि संबंधित रिटर्निंग अधिकारी से जुड़े सभी नामांकन निरस्तीकरण के आदेशों, प्रत्याशियों की अंतिम वैध सूची तथा संपूर्ण चुनाव प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए ताकि पूरी स्थिति स्पष्ट हो सके। अब यह देखना बेहद दिलचस्प और महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासनिक जांच में कौन-से नए तथ्य सामने आते हैं और इस तरह की भारी चूक के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही किस प्रकार तय की जाती है। फिलहाल, इस पूरे मामले पर जिला प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण और जांच के अंतिम निष्कर्ष आने बाकी हैं।

क्या धारावी की जमीन के मालिक बन जाएंगे अडानी, जानिए असल कहानी?     |     EVM के इस्तेमाल की जिद क्यों? एलन मस्क की टिप्पणी के बाद अखिलेश यादव का सवाल     |     इंस्टा पर दोस्ती, होटल ले जाकर दोस्तों ने किया गंदा काम… सुसाइड से पहले युवक बता गया दर्द भरी दास्तां     |     तांत्रिक ने बीमारी ठीक करने का झांसा देकर महिला से किया दुष्कर्म     |     T20 World Cup: पाकिस्तान के बाहर होने पर सिद्धू ने खोली ICC की पोल, गावस्कर ने भी की खिंचाई     |     संसद में अब 2014 और 2019 वाली स्थिति नहीं…कभी भी गिर सकती है सरकार, स्पीकर पद को लेकर संजय राउत का बड़ा बयान     |     आयकर में दान पर टैक्स छूट के लिए फार्म 10बीई जरूर लें करदाता     |     राहुल गांधी ने छोड़ी वायनाड सीट तो प्रियंका गांधी होंगी उम्मीदवार! अगले तीन दिन में होगा फैसला     |     कोटा कोचिंग सेंटर में IIT की तैयारी करने वाले छात्र ने किया सुसाइड     |     उज्जैन से पीएमश्री धार्मिक पर्यटन हेली सेवा शुरू, CM मोहन यादव ने दिखाई हरी झंडी     |     SIR Process in Karnataka: कर्नाटक में एसआईआर प्रक्रिया पर कांग्रेस के अंदर अंतर्कलह, मंत्रियों के अलग-अलग बयानों से घिरी पार्टी     |     NEET UG Paper Leak Case: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में नीट पेपर लीक मामले पर सुनवाई, 18 नवंबर को तय होंगे 14 आरोपियों पर आरोप     |     Cyclone Arnab Rapid Intensification: बंगाल की खाड़ी में खतरनाक रूप ले रहा चक्रवात ‘अर्णब’, वैज्ञानिकों को क्यों हैरान कर रहा है इसका तेजी से बदलना?     |     Rajesh Khanna Case Supreme Court Verdict: अनीता आडवाणी को सुप्रीम कोर्ट से झटका, राजेश खन्ना के साथ रिश्ते को ‘शादी’ मानने की मांग खारिज     |     Barmer Panchayat Election Controversy: नामांकन खारिज होने के बावजूद शख्स ने लड़ा चुनाव और बन गया सरपंच, राजस्थान के बाड़मेर में हैरान करने वाला मामला     |     Purnia News: अवैध संबंधों का विरोध करने पर पति की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, पूर्णिया में पत्नी और साढ़ू समेत चार पर हत्या का केस दर्ज     |     Gorakhpur Encounter News: महिला को बाइक से धक्का देकर मारने वाला बदमाश पुलिस मुठभेड़ में ढेर, गिरफ्तारी के बाद हाथ जोड़कर मांगने लगा माफी     |     Karwa Chauth 2026: अपनों से दूर भरतपुर के ‘अपना घर आश्रम’ में 212 मानसिक रूप से स्वस्थ महिलाएं रखेंगी व्रत, पतियों के नहीं लौटने का गम भी शामिल     |     Samastipur Viral Video: बिहार के समस्तीपुर में विवाहिता की मांग में जबरन सिंदूर भरने का वीडियो वायरल, मची सनसनी     |     Ghaziabad Crime News: गाजियाबाद में पत्नी ने जिम ट्रेनर प्रेमी के साथ मिलकर रची पति की हत्या की साजिश, सो रहे शशांक पर किया चाकू से हमला     |    

Pradesh Samna
पत्रकार बंधु भारत के किसी भी क्षेत्र से जुड़ने के लिए सम्पर्क करें