NEET UG Paper Leak Case: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में नीट पेपर लीक मामले पर सुनवाई, 18 नवंबर को तय होंगे 14 आरोपियों पर आरोप
नई दिल्ली: देश की चर्चित मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट यूजी’ (NEET UG) के दौरान हुए कथित पेपर लीक और धांधली के बहुचर्चित मामले में कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है। इस सिलसिले में राजधानी दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में एक अत्यंत महत्वपूर्ण सुनवाई पूरी हुई है। अदालत ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में संलिप्त कुल 14 आरोपियों के विरुद्ध औपचारिक रूप से आरोप (Charges) तय किए जाने के संबंध में अपनी विधिवत सुनवाई के बाद आदेश को पूरी तरह सुरक्षित रख लिया है। हालांकि, अदालत ने आज इस बात पर अपना अंतिम निर्णय नहीं सुनाया है कि आरोपियों पर मुकदमा चलाने के लिए तुरंत आरोप तय किए जाएं या नहीं। इस पूरे प्रकरण पर अदालत अब आगामी 18 नवंबर को अपना बहुप्रतीक्षित फैसला सुनाएगी।
सीबीआई द्वारा की जा रही है गहन जांच, पूरक आरोपपत्र दाखिल कर 14वें आरोपी को भी बनाया गया है नामजद
इस पूरे सनसनीखेज मामले की निष्पक्ष और तकनीकी जांच देश की प्रमुख जांच एजेंसी केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा की जा रही है, जिसकी जांच प्रक्रिया के तहत कानूनी कदम उठाए जा रहे हैं। जांच एजेंसी ने अपनी शुरुआती कार्रवाई के दौरान सबसे पहले 13 आरोपियों के खिलाफ अदालत में मुख्य आरोपपत्र दाखिल किया था। इसके पश्चात, जांच का दायरा बढ़ाते हुए शेषराव बजरंग सूर्यवंशी को इस मामले में 14वें आरोपी के रूप में चिन्हित किया गया और उनके खिलाफ एक पूरक आरोपपत्र (Supplementary Chargesheet) भी अदालत में पेश किया गया। अब वर्तमान कानूनी स्थिति के तहत राउज एवेन्यू कोर्ट को यह तय करना है कि क्या इन सभी आरोपियों के विरुद्ध आगे की कानूनी कार्यवाही और ट्रायल शुरू करने के लिए पर्याप्त और पुख्ता सबूत मौजूद हैं या नहीं। अदालत का आगामी आदेश इस पूरे आपराधिक मुकदमे की दशा और दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।
जुलाई में दाखिल हुआ था पहला चार्जशीट, अगस्त में कोर्ट ने लिया था संज्ञान; 18 नवंबर को खुलेगा कानूनी पत्ता
इस प्रकरण के घटनाक्रम के अनुसार, सीबीआई ने अपनी विस्तृत जांच पूरी करने के बाद पिछले दिनों 13 अभियुक्तों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी, जिस पर राउज एवेन्यू कोर्ट ने विधिवत रूप से संज्ञान लिया था। इसके बाद, चौदहवें आरोपी शेषराव बजरंग सूर्यवंशी के खिलाफ भी सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। चूंकि अदालत ने फिलहाल अपना फैसला सुरक्षित रखा है, इसका स्पष्ट अर्थ यह है कि अभी सजा या दोषसिद्धि पर कोई फैसला नहीं आया है। अदालत सबसे पहले यह परीक्षण कर रही है कि क्या उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों पर मुकदमा चलाने का पर्याप्त आधार बनता है। यदि अदालत इन आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करती है, तो नियमित ट्रायल की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से आगे बढ़ेगी, हालांकि कानूनन इसका यह कतई अर्थ नहीं है कि आरोपी दोषी साबित हो चुके हैं।