बिहार में नदियों की गाद से बनेंगे नेशनल हाईवे, NHAI और राज्य सरकार के बीच हुआ बड़ा समझौता

नई दिल्ली: भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने बिहार के विकास और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बेहद अहम कदम उठाया है। अब राज्य की विभिन्न नदियों और जलाशयों से निकाली जाने वाली गाद (Silt) का इस्तेमाल बिहार में राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के विस्तार के लिए मुख्य निर्माण सामग्री के रूप में किया जाएगा। इस क्रांतिकारी पहल को अमलीजामा पहनाने के लिए मंगलवार को NHAI और बिहार सरकार के बीच एक आधिकारिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि इस अनूठी पहल से पर्यावरण की सुरक्षा करने, परिवहन लागत को कम करने और परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में बहुत बड़ी मदद मिलेगी।

हर साल बाढ़ से बिहार को होता है 10,000 करोड़ का नुकसान, नदियों से गाद निकालकर राज्य को बाढ़ मुक्त बनाने का है लक्ष्य

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अपने संबोधन में बताया कि हर साल आने वाली भीषण बाढ़ के कारण बिहार राज्य को लगभग 10,000 करोड़ रुपये का भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इसी गंभीर समस्या को ध्यान में रखते हुए हमारा मुख्य लक्ष्य इस पहल के माध्यम से धीरे-धीरे पूरे बिहार को बाढ़ मुक्त बनाना है। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि यह योजना पूरी तरह सफल होती है, तो एक दिन ऐसा आएगा जब बिहार के लोगों को बाढ़ की इस विभीषिका का सामना नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नदियों में लगातार गाद जमा होने के कारण उनकी जल-वहन क्षमता बहुत अधिक प्रभावित हुई है, जिसके परिणामस्वरूप बाढ़ की स्थिति बनती है, उपजाऊ कृषि भूमि नष्ट होती है और निजी व सार्वजनिक संपत्ति को भारी क्षति पहुंचती है।

वैज्ञानिक तरीके से गाद निकालने से सुधरेगा पानी का प्राकृतिक बहाव, कृषि भूमि बचाने और लागत घटाने में मिलेगी मदद

बिहार को अक्सर बाढ़ और जल संकट जैसी दोहरी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिसका एक प्रमुख कारण नेपाल से बहकर आने वाली नदियां हैं जो अपने साथ भारी मात्रा में पानी और सिल्ट लेकर आती हैं। नितिन गडकरी ने इस बात पर जोर दिया कि यदि वैज्ञानिक पद्धति से गाद निकाली जाए, तो इससे पानी के बहाव और निकासी में उल्लेखनीय सुधार होगा, जल स्रोतों का पुनरुद्धार होगा और साथ ही सड़क निर्माण के लिए आवश्यक गुणवत्तापूर्ण सामग्री भी आसानी से मिल जाएगी। उन्होंने कहा कि यह मॉडल दोनों पक्षों के लिए अत्यधिक फायदेमंद साबित होगा, क्योंकि इससे एक तरफ नदियों की सेहत सुधरेगी और दूसरी तरफ नई मिट्टी या कृषि योग्य मिट्टी पर निर्भरता कम होगी, जिससे किसानों की उपजाऊ जमीन सुरक्षित बचेगी।

बिहार में चल रही हैं 39 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं, हाईवे निर्माण के लिए कुल 243 लाख क्यूबिक मीटर गाद की होगी आवश्यकता

NHAI की ओर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, बिहार में वर्तमान में संचालित और प्रस्तावित राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के लिए लगभग 243 लाख क्यूबिक मीटर गाद की भारी आवश्यकता होगी। राज्य में इस समय लगभग 39 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं तेजी से चल रही हैं, जो करीब 1,561 किलोमीटर के दायरे में फैली हैं और इनकी अनुमानित लागत 58,340 करोड़ रुपये है। इसके अलावा, लगभग 1,982 किलोमीटर लंबी 11 अन्य प्रस्तावित परियोजनाएं भी पाइपलाइन में हैं, जिन पर 1,85,200 करोड़ रुपये के भारी-भरकम निवेश का अनुमान है। इस पूरी व्यवस्था का उद्देश्य जल निकायों की क्षमता को बहाल करना और हाईवे निर्माण के लिए उपयुक्त भराव सामग्री जुटाना है।

‘बिहार जल स्रोत पुनरुद्धार और गाद प्रबंधन नीति 2026’ के तहत होगा काम, सड़क निर्माण विभाग करेगा नोडल एजेंसी के रूप में कार्य

बिहार सरकार और NHAI के बीच हुआ यह समझौता ‘बिहार जल स्रोत पुनरुद्धार और गाद प्रबंधन नीति 2026’ तथा अन्य तमाम पर्यावरण व कानूनी नियमों के पूर्ण पालन के तहत लागू किया जाएगा। गाद निकालने की पूरी प्रक्रिया पूरी तरह वैज्ञानिक तरीकों से संपन्न की जाएगी, जिसके लिए पहले चयनित जल निकायों का विस्तृत तकनीकी आकलन किया जाएगा। इस पूरी परियोजना में बिहार सरकार का सड़क निर्माण विभाग (RCD) मुख्य नोडल एजेंसी की भूमिका निभाएगा। इसके अलावा, एक राज्य स्तरीय समन्वय समिति का गठन किया जाएगा जो सभी प्रस्तावों, मंजूरियों, काम की प्रगति और सुरक्षा मानकों के पालन की नियमित समीक्षा करेगी।

पर्यावरण और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के कड़े इंतजाम, नियमों के दायरे में ही तय होगी गाद निकालने की प्रक्रिया

समझौते में सुरक्षा के पुख्ता उपाय सुनिश्चित किए गए हैं ताकि यह पूरी तरह तय किया जा सके कि गाद निकालने के इस कार्य से पर्यावरण का पारिस्थितिक संतुलन (Ecological Balance), नदी के प्राकृतिक किनारे, तटबंध, पुल या अन्य महत्वपूर्ण ढांचे किसी भी प्रकार से प्रभावित न हों। गाद निकालने की अनुमति केवल उन्हीं स्थानों पर दी जाएगी जिन्हें तकनीकी रूप से उपयुक्त और स्वीकृत घोषित किया गया हो। राजमार्गों के निर्माण में उपयोग होने वाली गाद की गुणवत्ता की जांच सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के तय मानकों और इंडियन रोड्स कांग्रेस (IRC) के नियमों के अनुसार की जाएगी।

वर्ष 2014 से अब तक बिहार में बढ़कर लगभग 6,500 किलोमीटर हुआ नेशनल हाईवे नेटवर्क, क्षेत्र में हुए कई बड़े सुधार

बिहार में बुनियादी ढांचे के विकास की बात करें तो राज्य में राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क का दायरा वर्ष 2014 में मात्र 4,615 किलोमीटर था, जो अब बढ़कर लगभग 6,500 किलोमीटर तक पहुंच चुका है। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2014 के बाद से बिहार की प्रमुख और बड़ी नदियों पर लगभग 29 नए आधुनिक पुलों का निर्माण सफलतापूर्वक किया जा चुका है। इन तमाम विकास कार्यों और नई परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य राज्य के भीतर क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करना तथा आम नागरिकों और मालवाहक वाहनों की आवाजाही को पूरी तरह सुगम बनाना है।

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Pradesh Samna
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