अजित पवार के निधन के बाद एनसीपी में सियासी घमासान, छह वरिष्ठ नेताओं ने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से की मुलाकात
मुंबई: महाराष्ट्र की प्रमुख पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के भीतर अजित पवार के असामयिक निधन के बाद राजनीतिक उथल-पुथल का दौर एक बार फिर तेज हो गया है। पार्टी के भीतर वरिष्ठ नेताओं की बढ़ती नाराजगी, सुनेत्रा पवार के नेतृत्व, उनके दोनों बेटों पार्थ और जय पवार की संगठन में बढ़ती सक्रियता तथा शरद पवार के गुट के साथ संभावित विलय की चर्चाओं को लेकर नए सियासी सवाल खड़े हो गए हैं। इसी राजनीतिक सरगर्मी के बीच पार्टी के छह प्रमुख वरिष्ठ नेताओं ने राजधानी दिल्ली पहुंचकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से एक अहम मुलाकात की है।
दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठक से नदारद रहीं सुनेत्रा पवार और उनके बेटे पार्थ, पार्टी ने अंदरूनी कलह की खबरों को सिरे से किया खारिज
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, दिलीप वलसे पाटिल, हसन मुश्रीफ, छगन भुजबल और धनंजय मुंडे शामिल हुए। हालांकि, इस प्रतिनिधिमंडल में पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनेत्रा पवार और उनके बेटे पार्थ पवार की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। दूसरी ओर, पार्टी नेतृत्व ने किसी भी प्रकार की अंदरूनी कलह या नाराजगी की खबरों का खंडन करते हुए कहा है कि पार्टी सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में पूरी तरह एकजुट है और शरद पवार गुट के साथ किसी भी तरह के विलय की बात से भी साफ इंकार किया गया है। साथ ही, स्थिति को संभालने के लिए सुनेत्रा पवार ने अपने सभी विधायकों की एक बैठक भी बुलाई है।
अजित पवार के निधन के बाद पार्टी के सामने खड़ी हुई नेतृत्व की बड़ी चुनौती, सुनेत्रा पवार को सौंपी गई थी कमान
गौरतलब है कि इसी वर्ष 28 जनवरी 2026 को बारामती में एक विमान हादसे में अजित पवार का दुखद निधन हो गया था, जिसके बाद से महाराष्ट्र की राजनीति में एनसीपी का भविष्य एक बड़ा सवाल बन गया। उनके जाने के बाद पार्टी संगठन और सरकार को संभालने की जिम्मेदारी उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को सौंपी गई। इसके बाद 26 फरवरी को हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में उन्हें सर्वसम्मति से पार्टी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया गया, जबकि उन्हें महाराष्ट्र का उपमुख्यमंत्री भी बनाया गया। इसके अलावा पार्थ पवार को राज्यसभा भेजने का निर्णय लिया गया, प्रफुल्ल पटेल को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और सुनील तटकरे को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई।
संगठन में शक्ति संतुलन और बेटों की बढ़ती भूमिका को लेकर वरिष्ठ नेताओं में बढ़ी असहजता
अजित पवार के निधन के बाद पार्टी के भीतर शक्ति संतुलन को लेकर समीकरण बदलने लगे। सुनेत्रा पवार के साथ-साथ उनके बेटों पार्थ और जय पवार की सांगठनिक गतिविधियों में बढ़ती दखलअंदाजी से पार्टी के पुराने और अनुभवी वरिष्ठ नेता असहज महसूस करने लगे। बीते मई महीने में जब पदाधिकारियों की एक नई सूची जारी की गई, जिसमें पार्थ और जय पवार को अहम जिम्मेदारियां दी गईं, तब प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, छगन भुजबल और दिलीप वलसे पाटिल जैसे दिग्गजों के नाम प्रमुख पदों की सूची से गायब मिले। इस घटनाक्रम ने पार्टी के भीतर नेतृत्व के अधिकारों और वरिष्ठों की अनदेखी को लेकर अटकलों को और हवा दे दी।
शरद पवार गुट के साथ विलय की चर्चाओं और दोनों धड़ों की राजनीतिक ताकत का सियासी गणित
इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में दोनों एनसीपी गुटों के आपसी विलय की चर्चा भी एक बड़ा कारण रही है। वर्ष 2023 में जब अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार से अलग होकर महायुति सरकार का दामन थामा था, तब पार्टी दो हिस्सों में बंट गई थी। हालांकि, अजित पवार के निधन से पहले दोनों गुटों के बीच आपसी दूरियां मिटाने और विलय को लेकर सुगबुगाहट शुरू हुई थी, जो उनके जाने के बाद ठंडे बस्ते में चली गई थी। आंकड़ों की बात करें तो अजित पवार गुट के पास कुल 56 सदस्य (लोकसभा में 1, राज्यसभा में 4, विधानसभा में 41 और विधान परिषद में 10) हैं, जबकि शरद पवार गुट के पास कुल 21 सदस्य (लोकसभा में 8, राज्यसभा में 1, विधानसभा में 10 और विधान परिषद में 2) हैं। लोकसभा में जहां शरद पवार गुट मजबूत है, वहीं विधानसभा और विधान परिषद में अजित पवार गुट का पलड़ा भारी है।