दक्षिण ब्लॉक होगा पूरी तरह खाली, थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ और डीजीएमओ का कार्यालय नए शौर्य भवन में होगा शिफ्ट
दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली में भारतीय सेना के शीर्ष सैन्य अधिकारियों के कार्यालयों को ऐतिहासिक साउथ ब्लॉक से नए और अत्याधुनिक भवनों में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस महीने के अंत तक साउथ ब्लॉक को पूरी तरह से खाली कर दिया जाएगा। इस बड़े बदलाव के तहत थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ दिल्ली कैंट स्थित नवनिर्मित ‘शौर्य भवन’ में अपना नया कार्यालय संभालेंगे, जबकि नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ‘सेना भवन’ में अपना कार्यभार ग्रहण करेंगे। इसके साथ ही सेना का सामरिक वॉर रूम और सैन्य संचालन से जुड़े अत्यंत महत्वपूर्ण पद डीजीएमओ (डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस) का कार्यालय भी अब साउथ ब्लॉक से नए ठिकाने पर शिफ्ट किया जा रहा है। सैन्य प्रशासनिक व्यवस्था और सामरिक कामकाज के आधुनिकीकरण की दिशा में इसे एक बहुत बड़ा कदम माना जा रहा है।
नौसेना के वॉर रूम की शिफ्टिंग पर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं, डीआरडीओ मुख्यालय के पास बनना था नया नेवी हेडक्वार्टर
हालाँकि, अभी तक यह आधिकारिक रूप से स्पष्ट नहीं हो सका है कि नौसेना (नेवी) का वॉर रूम आखिरकार किस स्थान पर पूरी तरह शिफ्ट किया जाएगा, क्योंकि इस संवेदनशील और तकनीकी रूप से उन्नत सिस्टम को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए बेहद मजबूत बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) और हाई-एंड टेक्नोलॉजिकल सपोर्ट की आवश्यकता होती है। दूसरी ओर, नौसेना के पास पहले से ही दिल्ली छावनी में ‘नौसेना भवन’ मौजूद है जिसका उद्घाटन वर्ष 2024 में हुआ था, लेकिन मूल योजना के अनुसार नौसेना का नया मुख्यालय डीआरडीओ (DRDO) हेडक्वार्टर के ठीक बगल में बनाया जाना तय किया गया था। हालांकि, केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी सेंट्रल विस्टा और रीडेवलपमेंट प्लान के तहत नौसेना को वर्तमान में यह जगह खाली करने के निर्देश दिए गए हैं।
कर्तव्य भवन 2 में शिफ्ट हुआ रक्षा मंत्रालय, स्थाई इमारत तैयार होने तक यहीं से होगा संचालन
सुरक्षा मामलों से जुड़े प्रशासनिक ढांचे में बदलाव के तहत केंद्रीय रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) को फिलहाल अस्थायी रूप से ‘कर्तव्य भवन 2’ में शिफ्ट कर दिया गया है। संबंधित भवनों का निर्माण कार्य पूरी तरह पूरा होने के बाद रक्षा मंत्रालय हमेशा के लिए ‘कर्तव्य भवन 6 और 7’ में स्थानांतरित हो जाएगा। वर्तमान में कर्तव्य भवन 2 परिसर में केवल चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) का कार्यालय कार्यरत है। इसका व्यावहारिक अर्थ यह है कि जब तक नई और स्थाई इमारतें पूरी तरह बनकर तैयार नहीं हो जातीं, तब तक थलसेना प्रमुख को रणनीतिक बैठकों के लिए दिल्ली कैंट से आकर रक्षा मंत्री और अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के साथ कर्तव्य भवन 2 में ही मुलाकात करनी होगी।
जैसलमेर में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई कंसल्टेटिव कमेटी की बैठक, सेना के आधुनिकीकरण पर हुई व्यापक चर्चा
इस बीच, देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को राजस्थान के ऐतिहासिक शहर जैसलमेर में ‘भारतीय रक्षा बलों के आधुनिकीकरण’ (Indian Defence Forces Modernisation) विषय पर रक्षा मंत्रालय की महत्वपूर्ण कंसल्टेटिव कमेटी की बैठक की अध्यक्षता की। इस उच्चस्तरीय बैठक के दौरान देश के सामने आ रही उभरती हुई सुरक्षा चुनौतियों, आधुनिक युद्ध की बदलती रणनीतियों, तकनीक के क्षेत्र में हो रही तीव्र प्रगति और भविष्य के युद्धों के लिए पूरी तरह तैयार, तकनीकी रूप से मजबूत तथा ऑपरेशनल मामलों में अत्यधिक फुर्तीली सेना तैयार करने की आवश्यकता पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
वर्ष 2029 तक 3 लाख करोड़ का डिफेंस प्रोडक्शन और 50 हजार करोड़ के एक्सपोर्ट का लक्ष्य
बैठक को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दृढ़ शब्दों में कहा कि देश की मौजूदा और भविष्य की हर प्रकार की सुरक्षा चुनौती का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए सरकार एक अत्याधुनिक तकनीक से लैस सशक्त मिलिट्री का निर्माण करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत का मुख्य लक्ष्य वर्ष 2029 तक देश के भीतर 3 लाख करोड़ रुपये का रक्षा उत्पादन (Defence Production) हासिल करना और साथ ही 50,000 करोड़ रुपये के रक्षा उपकरणों का निर्यात (Defence Export) करने के ऐतिहासिक आंकड़े को छूना है।