आपराधिक कार्यवाही रद्द करने की शक्ति का इस्तेमाल सावधानी से किया जाना चाहिए: न्यायालय देश By Nayan Datt On Feb 19, 2022 उच्चतम न्यायालय ने कहा कि आपराधिक कार्यवाही रद्द करने की शक्ति का इस्तेमाल बहुत समझदारी और सावधानी के साथ किया जाना चाहिए तथा वह भी दुर्लभ मामलों में। न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट की पीठ ने एक संपत्ति विवाद में तीन लोगों के खिलाफ जालसाजी और धोखाधड़ी का मामला रद्द करते हुए ये टिप्पणियां कीं। पीठ ने कहा, ‘‘अदालत आगाह करती है कि आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने की शक्ति का इस्तेमाल बहुत समझदारी से और सावधानी के साथ किया जाना चाहिए तथा वह भी दुर्लभ से दुर्लभतम मामलों में। इसने (शीर्ष अदालत ने) मामलों की कुछ श्रेणियों को स्पष्ट किया है, जहां कार्यवाही रद्द करने की ऐसी शक्ति का इस्तेमाल किया जा सकता है।” यह भी पढ़ें Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल चुनाव के बीच ED का बड़ा… Apr 14, 2026 Bengal Politics: दुर्गापुर में अमित शाह के रोड शो के बाद… Apr 14, 2026 उच्चतम न्यायालय ने कहा कि ऐसी एक श्रेणी जहां इस शक्ति का इस्तेमाल किया जा सकता है, वह ऐसी आपराधिक कार्यवाही से है, जो आरोपी से प्रतिशोध लेने और निजी तथा व्यक्तिगत द्वेष के मकसद से दुर्भावनापूर्ण रूप से शुरू की गयी हो। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि मजिस्ट्रेट आपराधिक दंड संहिता की धारा 156 (3) के तहत शीर्ष न्यायालय द्वारा तय कानून पर विचार करने में पूरी तरह नाकाम रहा है। Share