पलामू की ग्रामीण महिलाओं ने तैयार किए हर्बल गिफ्ट हैंपर, दीपावली के बाजार में छाई सखी दीदियों की कला— लाखों का कारोबार
पलामू: झारखंड के पलामू जिले के ग्रामीण अंचलों में रहने वाली महिलाओं ने अपनी मेहनत और हुनर के दम पर एक नया मुकाम हासिल किया है। यहाँ की ग्रामीण महिलाओं ने हर्बल उत्पादों और प्राकृतिक सामग्रियों की मदद से बेहद आकर्षक और मनमोहक गिफ्ट हैंपर तैयार किए हैं। दीपावली के इस पावन पर्व पर महिलाओं द्वारा तैयार किए गए इन विशेष गिफ्ट हैंपर की मांग बाजार में बड़े पैमाने पर देखने को मिली है। जैसा कि हम सब जानते हैं कि दीपावली के दौरान अपने करीबी मित्रों, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों को उपहार (गिफ्ट) देने की हमारी एक पुरानी परंपरा रही है। इसी सांस्कृतिक परंपरा और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) की प्रेरणा से स्वयं सहायता समूह की ‘सखी दीदियों’ ने मिलकर इन शानदार गिफ्ट हैंपर को तैयार किया है।
कास के डाला में सजाए गए रागी के बिस्किट, लड्डू, अरहर दाल और हर्बल दीये— कृषि और हस्तकला का बेहतरीन संगम
महिलाओं द्वारा तैयार किए गए इन विशेष गिफ्ट हैंपर के भीतर पारंपरिक कास के बने सुंदर डाला में पौष्टिक रागी (मडुआ) के बिस्किट, स्वादिष्ट लड्डू, शुद्ध अरहर की दाल, मिट्टी से बने कलात्मक हर्बल दीये और रागी के नमकीन को बड़े ही करीने से सजाया गया है। उल्लेखनीय है कि पलामू का संपूर्ण भौगोलिक क्षेत्र पारंपरिक रूप से अरहर की बंपर पैदावार के लिए पूरे राज्य में प्रसिद्ध है, और यहाँ की सखी दीदियां भी बड़े पैमाने पर अरहर का उत्पादन करती हैं। इसके अलावा, इन महिलाओं ने पारंपरिक मिट्टी के दीयों को बेहद खूबसूरत और कलात्मक स्वरूप दिया है। साथ ही, इन दिनों पलामू क्षेत्र में रागी की खेती की शुरुआत भी बड़े पैमाने पर की जा रही है, जिसका लाभ इन उत्पादों को मिल रहा है।
स्वरोजगार का बड़ा जरिया बन रहे हैं ये गिफ्ट हैंपर, 2.10 लाख महिलाएं जुड़ी हैं स्वयं सहायता समूह से
दीपावली के इस त्योहारी सीजन में ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने के लिए इन हर्बल गिफ्ट हैंपर का निर्माण कराया गया है। वर्तमान में पलामू जिले के भीतर झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी के माध्यम से करीब 2.10 लाख महिलाएं स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ी हुई हैं, जबकि जिले में लगभग 21 हजार स्वयं सहायता समूहों का कुल गठन किया जा चुका है। वर्ष 2026 में यह पहला ऐसा मौका है जब ग्रामीण क्षेत्र की इन महिलाओं ने व्यावसायिक स्तर पर इस तरह के आधुनिक और आकर्षक गिफ्ट हैंपर तैयार करने की शानदार शुरुआत की है।
भगवान की मूर्तियां, मिठाइयां और सजावटी झाड़ू भी कर रही हैं सखी दीदियां तैयार, डीपीएम अनिता केरकेट्टा ने साझा की जानकारी
समूह की दीदियों द्वारा विभिन्न स्थानों पर अपने विशेष स्टॉल लगाए गए हैं और मनमोहक गिफ्ट हैंपर प्रदर्शित किए गए हैं। इस बारे में जानकारी देते हुए जेएसएलपीएस की जिला प्रोग्राम मैनेजर (DPM) अनिता केरकेट्टा ने बताया कि, “सखी दीदियों ने खुद से भगवान गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियां, शुद्ध मिठाइयां, पारंपरिक झाड़ू और अन्य कई प्रकार के स्वदेशी उत्पाद पूरी मेहनत से तैयार किए हैं। महिलाओं ने काफी सुंदर और आकर्षक गिफ्ट हैंपर बनाए हैं, जिन्हें लोग बहुत पसंद कर रहे हैं।” विभाग की योजना है कि वर्ष 2027 में इन गिफ्ट हैंपर को और भी बड़े पैमाने पर व्यावसायिक रूप से तैयार कराया जाए। शुरुआत के दौर में इन उत्पादों को केवल कुछ सरकारी कार्यालयों तक ही सीमित रखा गया था, लेकिन इनकी बेहतरीन गुणवत्ता और शुद्धता को देखते हुए अब खुले बाजार में भी इनकी मांग तेजी से बढ़ रही है।
चैनपुर की सुनीता देवी ने बताया अपने अनुभव, हर्बल स्टॉल पर बिक रही सामग्री से हो रहा बंपर मुनाफा
पलामू के चैनपुर क्षेत्र से जुड़ी सुनीता देवी ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने अन्य महिलाओं के साथ मिलकर हर्बल उत्पादों से सजे इन गिफ्ट हैंपर को तैयार किया है और इसके लिए बाकायदा स्टॉल भी सजाए हैं। इन स्टॉल पर महिलाओं द्वारा निर्मित वस्तुओं की अच्छी खासी मांग बनी हुई है, और दुकानों में इन्हें प्रदर्शित कर बिक्री करने से समूह की महिलाओं को सीधा वित्तीय लाभ मिल रहा है। पलामू के विभिन्न प्रखंडों में स्वयं सहायता समूह की इन महिलाओं ने दीपावली के इस अवसर पर अपने स्टॉल सजाए हैं, जहाँ गिफ्ट हैंपर के अलावा अन्य हर्बल प्रोडक्ट्स और सखी दीदियों के हाथों से बने मिट्टी के दीयों की जमकर बिक्री हो रही है।
चैनपुर के कई गांवों में बड़े पैमाने पर चल रहा उत्पादन, शहरी इलाकों से भी खरीदारी के लिए पहुंच रहे हैं लोग
पलामू के चैनपुर इलाके के अंतर्गत आने वाले बंदुआ, चेडाबार, पूर्वडीहा, पथरा और सेमरा जैसे विभिन्न गांवों में महिलाओं द्वारा बड़े पैमाने पर आकर्षक सजावटी सामान, कासी की घास से बनी झाड़ू, मिट्टी की कलात्मक मूर्तियां, दीये और पारंपरिक गुड़िया आदि का निर्माण किया जा रहा है। चूंकि चैनपुर का यह पूरा क्षेत्र नगर निगम सीमा के काफी नजदीक स्थित है, इसलिए शहरी इलाकों के नागरिक भी इन हर्बल गिफ्ट हैंपर और अन्य स्वदेशी सामग्रियों की खरीदारी करने के लिए सीधे स्टॉल तक पहुंच रहे हैं। एक महत्वपूर्ण आंकड़े के अनुसार, इस पूरे हर्बल गिफ्ट हैंपर निर्माण और स्टॉल संचालन के कार्य से 300 से भी अधिक ग्रामीण महिलाएं प्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हुई हैं, जिससे उनकी आजीविका के साधन मजबूत हुए हैं।