Delhi High Court Observation: ‘आप लोग जेन-जी नहीं हैं…’ कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ताओं पर कोर्ट की तल्ख टिप्पणी
दिल्ली हाई कोर्ट ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका पर बेहद तल्ख टिप्पणी की है. अदालत ने उनकी न्यायिक हिरासत के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए दोटूक कहा कि “आप लोग जेन-जी नहीं हैं.” सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दोनों की उम्र के बारे में भी पूछा, जिस पर उनके वकील ने जानकारी दी कि आशुतोष की उम्र 31 साल है और सौरव 27 वर्ष के हैं. ‘बार एंड बेंच’ के मुताबिक, सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट के जज सुब्रमण्यम प्रसाद ने उनके वकील से सवाल किया कि आपने दो-दो बार बॉन्ड तोड़ा है, और पुलिस के लिए कानून-व्यवस्था व शांति बनाए रखना बेहद जरूरी है, ऐसे में आप यह उम्मीद क्यों कर रहे हैं कि पुलिस आपके साथ नरमी बरतेगी?
❓ ‘सवाल तो आप पर भी उठेंगे और आपके संगठन के मकसद पर भी’— दिल्ली हाई कोर्ट
सुनवाई के दौरान जब याचिकाकर्ताओं के वकील अभिक चिमनी ने अपनी बात रखनी चाही, तो कोर्ट ने कड़े शब्दों में पूछा कि सवाल तो यह भी उठेगा कि आखिर आपका संगठन क्या है और उसका मुख्य उद्देश्य क्या है? कोर्ट ने आगे कहा कि आप लोग जुलाई के महीने में छात्रों के मुद्दों पर प्रदर्शन कर रहे थे, और अब किसी अन्य मुद्दे पर प्रदर्शन कर रहे हैं, कल किसी और बात को लेकर सड़क पर उतरेंगे, तो ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है. कोर्ट ने यह भी तंज कसा कि आप लोग जेन-जी नहीं हैं, और जब कोर्ट ने पूछा कि आखिर जेन-जी (Gen-Z) क्या होता है, तो उन्हें बताया गया कि यह उस पीढ़ी को कहा जाता है जिसका जन्म 1997 के बाद हुआ हो.
🔓 बॉन्ड तोड़ा जाना ही काफी, मजिस्ट्रेट के फैसले का इंतजार किए बिना हाई कोर्ट पहुँचने पर भी हुई चर्चा
सुनवाई के दौरान वकीलों ने दलील दी कि मजिस्ट्रेट ने यह स्पष्ट नहीं किया कि दोनों से समाज या व्यवस्था को क्या खतरा है, जिस पर जज प्रसाद ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि क्या आपका एक बार बॉन्ड तोड़ देना ही अपने आप में पर्याप्त नहीं है? कोर्ट ने माना कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता और आजादी बहुत पवित्र है, लेकिन उसके साथ कुछ कानूनी प्रावधान और सीमाएं भी जुड़ी हुई हैं. कोर्ट ने कहा कि आज ही मजिस्ट्रेट दोनों की न्यायिक हिरासत पर सुनवाई करने वाले हैं, इसलिए आपको उनके फैसले का इंतजार करना चाहिए था, न कि सीधे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाना चाहिए था. इस पर वकीलों ने तर्क दिया कि वे और दो दिन जेल में क्यों रहें?
🛑 याचिका वापस ली, हाई कोर्ट से नहीं मिली राहत— क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ताओं के वकील अभिक चिमनी का पक्ष था कि मजिस्ट्रेट के सामने दो जमानतदार मौजूद होने के बावजूद उन्हें स्वीकार नहीं किया गया और मजिस्ट्रेट ने उनसे बात तक नहीं की, जो कि कानूनन सही नहीं है. आपको बता दें कि आशुतोष रांका और सौरव दास को 11 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था, जिसके बाद उन्हें पहले 5 दिन और फिर 2 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था. आज (21 अक्टूबर को) चूंकि मजिस्ट्रेट कोर्ट में इस पर सुनवाई होनी थी, इसलिए हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि वहां राहत न मिले तो अन्य कानूनी विकल्प खुले हैं. इसके बाद वकीलों ने अपनी याचिका वापस ले ली.