Allahabad High Court News: अदालत में हंगामा और तोड़फोड़ करने वाले वकीलों पर हाईकोर्ट सख्त, सीसीटीवी फुटेज से पहचान कर अवमानना कार्रवाई के आदेश
प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अदालत परिसर के भीतर कथित तौर पर नारेबाजी करने और न्यायिक कामकाज में गंभीर बाधा उत्पन्न करने वाले वकीलों के खिलाफ बेहद कड़ा रुख अपनाया है। माननीय न्यायालय ने सीसीटीवी फुटेज की मदद से ऐसे उपद्रवी तत्वों की पहचान करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं, साथ ही यह भी आदेश दिया है कि पहचान सुनिश्चित होने के बाद उन सभी संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ अवमानना (Contempt) तथा अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जाए।
जस्टिस अजय भनोट की अदालत के बाहर वकीलों का विरोध प्रदर्शन, बहिष्कार और तोड़फोड़ के लगे आरोप
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन की तरफ से मुख्य न्यायाधीश को एक पत्र प्रेषित किया गया था, जिसमें आरोप लगाया गया कि न्यायमूर्ति अजय भनोट द्वारा एक मामले की सुनवाई के दौरान एक वकील को पुलिस अधीक्षक (SP) से माफी मांगने को कहा गया तथा कथित रूप से जेल भेजने की चेतावनी दी गई। इस कथित घटना से नाराज होकर वकीलों के एक धड़े ने बुधवार को जस्टिस भनोट की अदालत का पूर्ण बहिष्कार कर दिया और अदालत कक्ष के बाहर जमकर हंगामा किया। इस दौरान कुछ वकीलों पर अदालत के भीतर फर्नीचर फेंकने और तोड़फोड़ जैसी अप्रिय हरकतें करने के गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं।
जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की बेंच ने माना ‘पूरी तरह से अदालत की अवमानना’, रजिस्ट्रार को दिए निर्देश
इस हंगामे और कोलाहल का असर बगल वाले कोर्ट रूम यानी न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की खंडपीठ की न्यायिक कार्यवाही पर भी स्पष्ट रूप से देखने को मिला। जस्टिस देशवाल ने इस प्रकार के गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार को बेहद गंभीरता से लेते हुए इसे ‘पूरी तरह से अदालत की अवमानना’ करार दिया। अदालत ने संबंधित रजिस्ट्रार को यह सख्त निर्देश जारी किए हैं कि वे तुरंत सीसीटीवी फुटेज खंगालें और नारेबाजी तथा तोड़फोड़ में संलिप्त पाए जाने वाले वकीलों की सटीक पहचान करें, ताकि उनके विरुद्ध नियमानुसार अवमानना और अनुशासनात्मक कार्रवाई का रास्ता साफ हो सके।
उत्तर प्रदेश बार काउंसिल को भेजा जाएगा मामला, आगामी 19 नवंबर 2026 को होगी अगली सुनवाई
अदालत की ओर से यह बिल्कुल स्पष्ट कर दिया गया है कि जैसे ही दोषी वकीलों की पहचान पूरी हो जाएगी, उनसे जुड़ा पूरा मामला अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के पास भेज दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, न्यायालय की मर्यादा को खंडित करने के लिए उनके खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्यवाही भी चलाई जाएगी। इस पूरे संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई के लिए अदालत ने 19 नवंबर, 2026 की तिथि निर्धारित की है।
कौन हैं न्यायमूर्ति अजय भनोट? जानें उनका अब तक का न्यायिक और कानूनी सफर
इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में रहे न्यायमूर्ति अजय भनोट इलाहाबाद उच्च वर्तमान में गौतम बुद्ध नगर जिले के प्रशासनिक न्यायाधीश के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनका जन्म 4 अगस्त 1969 को हुआ था। उन्होंने वर्ष 1994 में लखनऊ विश्वविद्यालय से अपनी विधि (लॉ) की डिग्री पूरी की और 15 जनवरी 1995 को एक अधिवक्ता (एडवोकेट) के तौर पर अपना औपचारिक पंजीकरण कराया था।
विभिन्न पदों पर कार्य करने के बाद 2017 में बने थे अतिरिक्त न्यायाधीश, 3 अगस्त 2031 को होंगे सेवानिवृत्त
इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अपने वकालत के लंबे करियर के दौरान उन्होंने दीवानी (सिविल), संवैधानिक, कर (टैक्स), सेवा, कंपनी और आपराधिक कानून से जुड़े तमाम जटिल मामलों के साथ-साथ पर्यावरण और औद्योगिक विवादों के मामलों की भी सशक्त पैरवी की। अपने शानदार कानूनी अनुभव के बल पर 23 मई 2015 को उन्हें ‘वरिष्ठ अधिवक्ता’ (Senior Advocate) के रूप में नामित किया गया था। इसके पश्चात, 22 सितंबर 2017 को उन्हें इलाहाबाद उच्च न्यायालय का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया और 6 सितंबर 2019 को उन्होंने स्थायी न्यायाधीश के रूप में शपथ ग्रहण की। निर्धारित कार्यकाल के अनुसार, वे आगामी 3 अगस्त 2031 को सेवानिवृत्त होंगे।