War Impact 2026: युद्ध के कारण गैस और ईंधन का संकट, इंडक्शन कुकर की रिकॉर्ड बिक्री; ठप पड़ी फैक्ट्रियां, आम जनता पर दोहरी मार
करीब 10 दिनों से जारी अमेरिका-ईरान तनाव का असर अब भारत में भी दिखने लगा है. हाल ही में तेल कंपनियों ने रसोई गैस सिलेंडर के दाम बढ़ा दिए हैं. घरेलू सिलेंडर 60 रुपये महंगा हो गया है, जबकि कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में 115 रुपये की बढ़ोतरी हुई है. चिंता की बात यह है कि इस संकट का असर सिर्फ गैस सिलेंडर की कीमतों तक सीमित नहीं है. इसका प्रभाव उद्योगों से लेकर श्मशान घाटों तक दिखाई देने लगा है.
आइए समझते हैं कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का भारत पर क्या असर पड़ रहा है और अगर स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो संकट कितना गहरा हो सकता है.
युद्ध से गैस आयात पर असर
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने भारत में फ्यूल गैस की आपूर्ति और इस्तेमाल पर दबाव बढ़ा दिया है. इसकी एक बड़ी वजह यह है कि भारत अपनी जरूरत की करीब 60% गैस विदेशों से आयात करता है. इनका बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है. गैस को बड़े-बड़े टैंकर जहाजों के जरिए समुद्री रास्ते से भारत लाया जाता है. लेकिन 1 मार्च से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव बढ़ने के कारण गैस सप्लाई प्रभावित हुई है. यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है.
फ्यूल गैस और उनका इस्तेमाल
फ्यूल गैस यानी ऐसी गैसें जिन्हें ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. इनकी कई किस्में होती हैं, जैसे LPG, LNG, CNG और PNG. इन गैसों का उपयोग घरेलू रसोई, उद्योगों, वाहनों, बिजली उत्पादन और शहरों में पाइप गैस सप्लाई के लिए किया जाता है. इनमें से कुछ गैसें कच्चे तेल की रिफाइनिंग के दौरान उप-उत्पाद (बाय-प्रोडक्ट) के रूप में मिलती हैं, जबकि कुछ गैसें प्राकृतिक गैस के रूप में जमीन से निकाली जाती हैं. भारत में इन गैसों का उत्पादन होता है, लेकिन जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर है.
भारत में दिखने लगा असर
1. गुजरात में 100 फैक्ट्रियां बंद
गैस सप्लाई प्रभावित होने का असर अब उद्योगों पर भी दिखने लगा है. गुजरात के मोरबी में फ्यूल सप्लाई में रुकावट के कारण करीब 100 फैक्ट्रियों को अपना उत्पादन बंद करना पड़ा है. ये सभी यूनिट्स सिरेमिक उद्योग से जुड़ी हैं. मोरबी को टाइल और घड़ी निर्माण के बड़े केंद्र के रूप में जाना जाता है और यह दुनिया के सबसे बड़े सिरेमिक मैन्युफैक्चरिंग हब में से एक है. उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि अगर गैस सप्लाई जल्द सामान्य नहीं हुई तो आने वाले दिनों में करीब 400 और यूनिट्स के बंद होने का खतरा है.
2. पुणे में गैस आधारित श्मशान प्रभावित
महाराष्ट्र के पुणे में गैस की कमी के कारण नगर निगम ने 18 गैस आधारित शवदाह गृहों को अस्थायी रूप से बंद करने का फैसला किया है. नगर निगम का कहना है कि जैसे ही गैस सप्लाई सामान्य होगी, इन श्मशान घाटों को फिर से शुरू कर दिया जाएगा. फिलहाल प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है.
3. तीन गुना बढ़ी इंडक्शन कुकर की मांग
कोलकाता में रसोई गैस की कीमत बढ़ने और भविष्य में सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता का असर बाजार में दिखाई देने लगा है. शहर के रिटेल बाजारों, खासकर चांदनी मार्केट और एज्रा स्ट्रीट में इलेक्ट्रिक किचन उपकरणों, जैसे इंडक्शन कुकर की बिक्री तीन गुना तक बढ़ गई है. दुकानदारों के मुताबिक बिक्री में यह उछाल उस समय से शुरू हुआ, जब केंद्र सरकार ने कुकिंग गैस की कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा की.
4. रसोई गैस महंगी
तेल कंपनियों ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी की है. इसके बाद दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत लगभग 913 रुपये हो गई है. वहीं 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में 115 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. हालांकि, सरकार ने तेल कंपनियों को आदेश किया है कि रसोई गैस की आपूर्ति को प्रभावित नहीं होने दिया जाए.
