बक्सर (बिहार): बिहार के बक्सर जिले अंतर्गत डुमरांव अनुमंडल के कृष्णाब्रह्म थाना क्षेत्र से शिक्षा जगत को कलंकित करने वाला घिनौना मामला सामने आया है।
अरियांव पंचायत स्थित नथुनी अहीर डेरा राजकीय मध्य विद्यालय में पदस्थापित दो शिक्षकों पर करीब 12 नाबालिग छात्राओं के साथ दुष्कर्म करने, उनके आपत्तिजनक वीडियो बनाने और उन्हें सोशल मीडिया पर वायरल करने का गंभीर आरोप लगा है। आरोपी शिक्षकों की पहचान बीरेन्द्र कुमार और अरविंद कुमार के रूप में हुई है, जिनकी नियुक्ति वर्ष 2024 में BPSC TRE-2 परीक्षा के माध्यम से हुई थी। इस शर्मनाक घटना के उजागर होते ही पूरे इलाके में भारी जनआक्रोश फैल गया है।
📱 मोबाइल, पैसे और गिफ्ट का लालच: ‘तुम आओ और अपनी सहेली को भी साथ लाओ’
आरोपियों की कार्यप्रणाली और छात्राओं के शोषण का तरीका:
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सहेलियों को फंसाने का दबाव: शुरुआती जांच व आरोपों के अनुसार, आरोपी शिक्षकों ने पहले एक छात्रा को अपने प्रभाव में लेकर शिकार बनाया। इसके बाद उस पर दबाव बनाकर अन्य सहेलियों को बुलाने के लिए कहा गया, जिससे धीरे-धीरे कई मासूम छात्राएं इनके चंगुल में फंसती चली गईं।
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होटल और निजी कमरों में शोषण: छात्राओं को बहला-फुसलाकर सुनसान स्थानों, होटलों और निजी कमरों में ले जाकर यौन उत्पीड़न किया जाता था।
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गिफ्ट और ब्लैकमेलिंग: छात्राओं को मोबाइल फोन, नकद रुपये और विभिन्न उपहार दिए जाते थे। बात न मानने या विरोध करने पर आपत्तिजनक वीडियो वायरल करने की धमकी देकर ब्लैकमेल किया जाता था। कथित तौर पर इस पूरे कुकृत्य में शराब का भी इस्तेमाल किया जाता था।
💥 आपत्तिजनक वीडियो वायरल होने से खुला राज: ग्रामीणों ने स्कूल में की धुनाई
घटना का भंडाफोड़ और ग्रामीणों का आक्रोश:
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आपसी विवाद में वीडियो लीक: मामला तब सार्वजनिक हुआ जब शिक्षक अरविंद कुमार और एक छात्रा का आपत्तिजनक वीडियो इंटरनेट पर सामने आया। चर्चा है कि यह वीडियो दूसरे शिक्षक बीरेन्द्र कुमार द्वारा वायरल किया गया था।
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ग्रामीणों का धावा: 29 अगस्त को उग्र ग्रामीणों ने स्कूल परिसर को घेर लिया और आरोपी शिक्षक अरविंद कुमार को पकड़कर पूछताछ शुरू की।
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मोबाइल से मिले साक्ष्य: बीच-बचाव करने पहुंचे शिक्षक बीरेन्द्र कुमार का मोबाइल जब ग्रामीणों ने चेक किया, तो उसमें भी कई आपत्तिजनक वीडियो और फोटो बरामद हुए। इसके बाद गुस्साए ग्रामीणों ने दोनों शिक्षकों की जमकर पिटाई कर दी।
📋 दोनों आरोपी शिक्षक तत्काल प्रभाव से निलंबित: विभागीय जांच शुरू
शिक्षा विभाग की कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई:
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अधिकारियों की जांच: स्कूल के प्रधानाध्यापक की सूचना पर प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) सुधांशु कुमार ने मौके पर पहुंचकर प्राथमिक जांच की और रिपोर्ट जिला शिक्षा पदाधिकारी को सौंपी।
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निलंबन आदेश जारी: जिला शिक्षा पदाधिकारी इंद्र कुमार कर्ण के निर्देश पर डीपीओ (स्थापना) ने दोनों शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया है। निलंबन अवधि में दोनों का मुख्यालय प्रखंड संसाधन केंद्र (BRC) निर्धारित किया गया है।
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विभागीय आरोप पत्र: शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि दोनों के खिलाफ विभागीय आरोप पत्र (प्रपत्र-क) गठित कर सेवामुक्ति की दिशा में विधिक प्रक्रिया अपनाई जा रही है। वहीं, मामले में एक कथित ऑडियो भी सामने आया है जिसमें शराब पार्टी के दौरान ग्रामीणों से बातचीत का दावा किया जा रहा है।
🏅 एक तरफ प्रिंसिपल को राजकीय पुरस्कार, दूसरी तरफ शिक्षकों की करतूत से सिस्टम शर्मसार
प्रशासनिक व्यवस्था का सबसे विरोधाभासी पहलू:
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राज्यपाल से सम्मान की घोषणा: इस पूरे प्रकरण का सबसे विडंबनापूर्ण पहलू यह है कि जिस नथुनी अहीर डेरा स्कूल में यह काला खेल चल रहा था, उसी स्कूल के प्रधानाचार्य (HM) मोहम्मद इमाम अली अंसारी का चयन बिहार के ‘बेस्ट प्रधानाचार्य’ के रूप में राज्यपाल के हाथों मिलने वाले राजकीय शिक्षक पुरस्कार के लिए हुआ है।
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व्यवस्था पर सवालिया निशान: एक ओर विद्यालय प्रमुख को शैक्षणिक उत्कृष्टता का राज्य स्तरीय पुरस्कार मिलने जा रहा है, वहीं दूसरी ओर संस्थान के शिक्षकों द्वारा मासूम बच्चियों के साथ किए गए इस जघन्य कृत्य ने पूरे शिक्षा विभाग और निगरानी तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
⚖️ पुलिस ने दर्ज की FIR: POCSO Act के तहत आरोपियों की तलाश में छापेमारी तेज
पुलिस का रुख और कानूनी प्रक्रिया:
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पॉक्सो एक्ट में केस: कृष्णाब्रह्म थाना पुलिस ने पीड़ित परिजनों की तहरीर, वायरल वीडियो और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) और बीएनएस की सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली है।
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एसपी शुभम आर्या का निर्देश: बक्सर एसपी शुभम आर्या और प्रभारी डीएसपी समीर कुमार सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष टीम गठित की है। पुलिस टीम आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी के लिए विभिन्न संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही है।
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डिजिटल फोरेंसिक जांच: पुलिस मोबाइल रिकॉर्ड, ऑडियो क्लिप और वायरल वीडियो की फोरेंसिक जांच करा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इस पूरे सिंडिकेट में गांव के कौन-से अन्य असामाजिक तत्व शामिल थे।