UAE Stance on Iran Conflict: ईरान के साथ तनाव खत्म करने के लिए सैन्य कार्रवाई नहीं, कूटनीति और बातचीत जरूरी— बोले यूएई के सलाहकार अनवर गरगाश
मनामा: संयुक्त अरब अमीरात ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि ईरान के साथ चल रहे तनाव को समाप्त करने के लिए सैन्य विकल्पों की जगह आपसी बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों को अपनाया जाना चाहिए। यूएई को पूरी उम्मीद है कि कतर की मध्यस्थता के जरिए चल रही वार्ताओं से कोई सकारात्मक परिणाम निकल सकता है, जिससे अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी संभावित युद्ध के खतरे को टाला जा सके। बहरीन की राजधानी मनामा में आयोजित एक उच्चस्तरीय सुरक्षा कॉन्फ्रेंस (सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस) को संबोधित करते हुए यूएई के राष्ट्रपति के मुख्य सलाहकार अनवर गरगाश ने इन महत्वपूर्ण बातों को सबके सामने रखा।
क्षेत्र में एक और युद्ध नहीं चाहता यूएई, गरगाश बोले— सैन्य कार्रवाई से हालात सुधरने के बजाय और अधिक बिगड़ेंगे
अनवर गरगाश ने अपने संबोधन में कहा कि ईरान से जुड़े संघर्षों और हालिया हालातों ने इस पूरे क्षेत्र और दुनिया भर के समीकरणों को पूरी तरह बदलकर रख दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यूएई किसी भी कीमत पर इस भू-भाग में एक और नए युद्ध की विभीषिका नहीं देखना चाहता। मौजूदा संकट का समाधान केवल राजनीतिक और संवाद के रास्ते से ही निकाला जाना चाहिए, क्योंकि सैन्य बल के इस्तेमाल से स्थितियां सुलझने के बजाय और अधिक जटिल हो जाएंगी और कोई स्थायी समाधान नहीं मिल सकेगा। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अमेरिका और ईरान के बुनियादी मतभेद बहुत गहरे हैं, और यदि दोनों पक्षों के रुख में नरमी नहीं आई, तो हालात और भी गंभीर हो सकते हैं। इसी आशंका को ध्यान में रखते हुए यूएई और अन्य खाड़ी देश किसी भी संभावित नए खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क और तैयार हैं।
कतर में चल रही है प्रस्ताव पर बातचीत, ईरानी विदेश मंत्री बोले— अमेरिका के रुख पर निर्भर करेगा समझौते का भविष्य
दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने जानकारी दी है कि उनके देश के प्रतिनिधि कतर में एक विशेष प्रस्ताव को लेकर लगातार बातचीत कर रहे हैं, जिसके माध्यम से रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट (होर्मुज जलडमरूमध्य) को जल्द ही दोबारा खोला जा सकता है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ उनकी कोई सीधी वार्ता नहीं हो रही है, और किसी भी समझौते का अंतिम निर्णय पूरी तरह से अमेरिका की प्रतिक्रिया पर ही निर्भर करेगा। ईरान की मंशा है कि अमेरिका बातचीत के मार्ग को चुने, लेकिन तेहरान अपनी राष्ट्रीय रक्षा और कूटनीति दोनों मोर्चों पर पूरी तरह तैयार है।
हजारों ड्रोन और मिसाइल हमलों का सामना कर चुके हैं यूएई और बहरीन, खाड़ी देशों ने बढ़ाई अपनी सुरक्षा व्यवस्था
अंतरराष्ट्रीय थिंक टैंक ‘इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक Studies’ (IISS) की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले संघर्षों और अप्रैल के सीजफायर से पहले ईरान की ओर से यूएई पर 3,000 से अधिक ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गई थीं, जिनका मुख्य निशाना एयरपोर्ट, सैन्य ठिकाने और तेल से जुड़ी बुनियादी संरचनाएं थीं। हालांकि, अधिकांश हमलों को रक्षा प्रणालियों द्वारा विफल कर दिया गया था, जिसके बाद खाड़ी देशों ने अपनी आंतरिक सुरक्षा को और अधिक चाक-चौबंद करने के लिए भारी निवेश किया है। सलाहकार गरगाश ने यह भी रेखांकित किया कि इस संकट के दौर से गुजरने के बाद अमेरिका और यूएई के द्विपक्षीय संबंध पहले से कहीं अधिक मजबूत हुए हैं।
बहरीन के विदेश मंत्री ने भी किया तनाव कम करने के प्रयासों का समर्थन, सऊदी अरब के ठونों पर भी बढ़े हमले
बहरीन के विदेश मंत्री अब्दुल्लतीफ बिन राशिद अल जायानी ने भी क्षेत्रीय तनाव को कम करने के सभी diplomatic प्रयासों का पुरजोर समर्थन किया है। IISS के आंकड़ों के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम के दौरान ईरान ने बहरीन पर लगभग 500 ड्रोन और करीब 200 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं। बहरीन में अमेरिकी नौसेना का पांचवां बेड़ा तैनात है, और हमलों के दौरान नेवी बेस, रिहायशी इलाकों तथा जल शोधन संयंत्रों (वाटर ट्रीटमेंट प्लांट) को निशाना बनाने की कोशिश की गई थी। इसके अलावा, इस वर्ष हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों और हवाई अड्डों पर भी हमलों की गतिविधियों में वृद्धि दर्ज की गई है।