Ratlam Soybean Price News: रतलाम में पीला सोना हुआ मालामाल, सोयाबीन के दाम 7000 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंचे; किसानों के खिले चेहरे
रतलाम : कई सालों के बाद पीला सोना यानी सोयाबीन अब किसानों की उम्मीदों पर खरा उतर रहा है. इस बार सोयाबीन के दामों में लगातार तेजी आई है. अच्छी गुणवत्ता वाला सोयाबीन ₹7000 प्रति क्विंटल तक के उच्च स्तर पर पहुंच चुका है. ये रेट केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित समर्थन मूल्य 5708 रुपए से अधिक है. इसके बाद अब मध्य प्रदेश सरकार की भावांतर योजना की आवश्यकता किसानों को नहीं पड़ेगी.
📋 भावांतर योजना से किसानों ने बनाई दूरी, जिले में सिर्फ 192 पंजीयन
सोयाबीन के बाजार में हाई रेट का असर है कि इस बार भावांतर भुगतान योजना के पंजीयन में शुरुआत से ही किसानों की रुचि नहीं दिखाई. सोयाबीन के दाम एमएसपी से अधिक मिलने पर गिने-चुने किसानों ने ही इस योजना के अंतर्गत पंजीयन करवाया है. रतलाम जिले के डेढ़ लाख से अधिक किसानों में से केवल 192 किसानों ने पंजीयन कराया है.
इस वर्ष प्रतिकूल मौसम होने के बावजूद सोयाबीन की फसल पिछले वर्ष की अपेक्षा बेहतर हुई है और दाम भी एमएसपी से अधिक मिलने लगे हैं. कृषि अधिकारी हीरालाल बरफा ने बताया कि कृषि मंडी में किसानों को एमएसपी से अधिक दाम मिल रहे हैं, इस वजह से किसानों की रुचि भावांतर भुगतान योजना के पंजीयन में नहीं है. रतलाम जिले में कुल 64 पंजीयन केंद्र बनाए गए थे, जिनमें से केवल 29 केंद्रों पर मात्र 192 किसानों ने ही पंजीयन करवाया है.
🏛️ किसान और सरकार दोनों को फायदा, भावांतर योजना के पैसों की बड़ी बचत
किसान नेता राजेश पुरोहित ने बताया कि यही बात हर किसान केंद्र और राज्य की सरकार को समझाना चाह रहा है कि यदि हमारी फसल एमएसपी से अधिक मूल्य पर बिकने लग जाए तो हमें भावांतर जैसी किसी योजना की आवश्यकता नहीं है. नामली क्षेत्र के किसान बालकृष्ण साबरिया ने कहा कि इस वर्ष सोयाबीन के दाम अच्छे मिल रहे हैं, जिससे उन्हें दस्तावेजों और पंजीयन के लिए चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे हैं.
इस बार सोयाबीन के दाम समर्थन मूल्य से अधिक होने की वजह से केवल किसानों को ही नहीं बल्कि मध्य प्रदेश सरकार को भी करोड़ों रुपए की बचत होने जा रही है. क्योंकि बीते वर्ष भावांतर भुगतान योजना के अंतर्गत मध्य प्रदेश के 6 लाख 25 हजार सोयाबीन उत्पादक किसानों के खाते में सरकार को करीब 1300 करोड़ रुपए का भुगतान करना पड़ा था. लेकिन इस वर्ष सोयाबीन के दाम एमएसपी 5708 से ऊपर रहने के कारण सरकार को यह राशि नहीं देनी पड़ेगी.