UP Assembly Election Prep: टिकट के लिए अब दिल्ली-लखनऊ में लॉबिंग नहीं चलेगी, जिलों से तैयार होगी उम्मीदवारों की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश में आगामी राजनीतिक रणनीतियों को धार देते हुए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने टिकट बंटवारे को लेकर एक बिल्कुल नया और अनूठा फॉर्मूला तैयार किया है. पार्टी अब हर जिले में करीब 70 लोगों की एक विशेष टीम का गठन करेगी, जिसका मुख्य काम संभावित दावेदारों के नामों का पैनल तैयार करना और जमीनी हकीकत से पार्टी हाईकमान को अवगत कराना होगा. इस व्यवस्था के जरिए टिकट की दावेदारी, संगठन की जमीनी स्थिति और स्थानीय स्तर पर जनता की नाराजगी का सटीक आकलन किया जाएगा, जिससे ऊपर से लेकर नीचे तक मजबूत रिपोर्ट तैयार हो सके.
👥 2. मंडल अध्यक्षों से लेकर पूर्व सांसदों और विधायकों को किया जाएगा शामिल, जमीनी फीडबैक से तय होगी दावेदारों की किस्मत
इस 70 सदस्यीय कमेटी में तीन कार्यकाल (भूतपूर्व, पूर्व और वर्तमान) के मंडल अध्यक्ष, मंडल पदाधिकारी, जिला अध्यक्ष, जिला पदाधिकारी के साथ-साथ पूर्व सांसद और पूर्व विधायक भी शामिल किए जाएंगे. सभी नेताओं के बीच बेहतर तालमेल बिठाने के लिए एक संयोजक की नियुक्ति की जाएगी. यह टीम हर विधानसभा सीट के लिए संभावित उम्मीदवारों का पैनल बनाकर राज्य और फिर केंद्रीय कमेटी को भेजेगी. पार्टी का मानना है कि इस प्रक्रिया के लागू होने से केवल बड़े नेताओं की पैरवी या दिल्ली-लखनऊ में लॉबिंग के बजाय जमीनी स्तर पर सक्रिय और लोकप्रिय चेहरों को प्राथमिकता मिल सकेगी.
🤝 3. राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के दौरे के बाद बड़ा फैसला, पुरानी गुटबाजी भुलाकर संवाद का रास्ता खुला रखने का निर्देश
हाल ही में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के मेरठ और सहारनपुर समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दौरों के बाद इस फीडबैक मैकेनिज्म को और मजबूत किया गया है. पार्टी ने यह भी साफ संदेश दिया है कि किसी भी विधायक या सांसद को केवल इस आधार पर किसी नेता को बैठक से बाहर नहीं रखना चाहिए कि उसने कभी उसका विरोध किया था. पुरानी राजनीतिक अदावत या स्थानीय गुटबाजी को दरकिनार कर संगठन के भीतर संवाद के दरवाजे हमेशा खुले रखने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि चुनावों में पार्टी एकजुट होकर मैदान में उतर सके.