INDIA Alliance Meeting: दिल्ली में विपक्ष की महाबैठक; बीजेपी को घेरने की रणनीति पर मंथन, कई बड़े दल रहे नदारद
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद उत्पन्न राजनीतिक परिस्थितियों के बीच सोमवार को दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में ‘INDIA’ गठबंधन की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य बीजेपी से मुकाबला करने के लिए विपक्षी दलों को एकजुट करना और आगामी चुनावी चुनौतियों के लिए साझा रणनीति बनाना है। बैठक में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, अखिलेश यादव, उद्धव ठाकरे और तेजस्वी यादव जैसे 23 दलों के शीर्ष नेता शामिल हुए।
🗣️ खरगे का हमला: ‘संविधान पर प्रहार और बढ़ती महंगाई’
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बैठक के दौरान मोदी सरकार पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि देश इस समय राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक स्तर पर गहरी चुनौतियों का सामना कर रहा है। खरगे ने आरोप लगाया कि गैर-बीजेपी शासित राज्यों के साथ भेदभाव किया जा रहा है, युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है और संवैधानिक संस्थाओं का राजनीतिक इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को ‘कुशासन’ के खिलाफ एकजुट होकर लड़ना होगा।
🚩 अखिलेश का आह्वान: ‘बंधु-राज’ की स्थापना
बैठक में शामिल होने से पहले समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने देश में ‘बंधु-राज’ (भाईचारे का शासन) की वकालत की। उन्होंने उत्तर प्रदेश की मौजूदा स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि लोकतंत्र और उसके मूल्यों की रक्षा करना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। वहीं, एनसीपी-एसपी नेता शरद पवार की अनुपस्थिति में उनकी बेटी सुप्रिया सुले ने बैठक में प्रतिनिधित्व किया।
📉 गठबंधन में दरार के संकेत: AAP और DMK की अनुपस्थिति
इस अहम बैठक से आम आदमी पार्टी (AAP) और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) की दूरी चर्चा का विषय बनी रही। शरद पवार ने DMK के न आने को चिंताजनक बताया। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि तमिलनाडु में कांग्रेस और DMK के बीच बढ़ती दूरियां और AAP का गठबंधन से सार्वजनिक दूरी बनाना ‘INDIA’ गठबंधन की एकता पर सवाल खड़े कर रहा है।
🖼️ पोस्टर वार और भविष्य की राह
बैठक से ठीक पहले दिल्ली की सड़कों पर राहुल गांधी और कांग्रेस के खिलाफ लगाए गए पोस्टरों ने सियासी सरगर्मी और बढ़ा दी है। इन पोस्टरों में विपक्ष के ही नेताओं के पुराने बयानों का इस्तेमाल कर राहुल गांधी को निशाना बनाया गया है। जून 2024 के बाद हुई यह पहली बड़ी बैठक अब यह तय करेगी कि क्या विपक्ष अपने मतभेदों को भुलाकर 2029 के लोकसभा चुनाव तक एक मजबूत मोर्चे के रूप में टिक पाएगा।