कोरबा (छत्तीसगढ़): जैव विविधता से समृद्ध कटघोरा वन मंडल से वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरणविदों के लिए एक अत्यंत सुखद और उत्साहवर्धक खबर सामने आई है।
वन मंडल के अंतर्गत आने वाले एतमानगर रेंज में विचरण कर रहे 38 हाथियों के विशाल झुंड में एक नन्हे हाथी (बेबी एलिफेंट) का जन्म हुआ है। एक स्वस्थ हथिनी ने सुरक्षित रूप से बच्चे को जन्म दिया है, जिससे इस क्षेत्र में हाथियों की संख्या में और वृद्धि हुई है। वन्यजीव विशेषज्ञ इसे प्राकृतिक रहवास और संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक संकेत मान रहे हैं। वर्तमान में हाथियों का पूरा दल शांत है और स्थानीय ग्रामीणों का भी वन अमले को भरपूर सहयोग मिल रहा है।
🛡️ नवजात शावक और मां की सुरक्षा के लिए विशेष टीम तैनात: जंगल में कड़ी निगरानी
प्रशासनिक सतर्कता और निगरानी तंत्र:
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ट्रैकिंग टीम सक्रिय: नन्हे शावक के जन्म की आधिकारिक पुष्टि होते ही वन विभाग ने इलाके में अतिरिक्त कर्मचारियों की ड्यूटी लगा दी है।
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संवेदनशील व्यवहार: वन अधिकारियों के अनुसार प्रसव के शुरुआती हफ्तों में हथिनी अपने नवजात बच्चे की सुरक्षा को लेकर अत्यधिक संवेदनशील और सुरक्षात्मक हो जाती है, जिससे उसके आक्रामक होने का जोखिम रहता है।
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निरंतर मॉनिटरिंग: हाथियों की लोकेशन और उनके रूट पर वन विभाग की स्पेशल ट्रैकिंग टीम चौबीसों घंटे नजर बनाए हुए है ताकि किसी भी प्रकार का मानवीय टकराव न हो।
📢 ग्रामीणों के लिए एडवाइजरी जारी: जंगल की ओर जाने पर रोक
सीमावर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा उपाय:
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गांवों में मुनादी: एतमानगर रेंज और उससे सटे रिहायशी इलाकों में मुनादी कराकर ग्रामीणों को जंगल की ओर न जाने की स्पष्ट हिदायत दी गई है।
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मवेशी चराने वालों को चेतावनी: मवेशी चराने वाले चरवाहों और वनोपज संग्राहकों को संवेदनशील कॉरिडोर्स से पूरी तरह दूर रहने को कहा गया है।
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दूरी बनाए रखने की अपील: ग्रामीणों से आग्रह किया गया है कि वे कौतूहलवश नवजात बच्चे या हाथियों के झुंड के करीब जाने या फोटो/वीडियो बनाने का प्रयास बिल्कुल न करें।
🌿 लेमरू हाथी रिजर्व का हिस्सा: हाथियों के अनुकूल है यहां का पारिस्थितिकी तंत्र
कटघोरा के जंगलों का प्राकृतिक महत्व:
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प्राकृतिक रहवास: कटघोरा वन मंडल लेमरू एलीफेंट रिजर्व के विस्तृत क्षेत्र से जुड़ा हुआ है, जहां साल और मिश्रित वनों का घना आच्छादन मौजूद है।
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अनुकूल वातावरण: यहां हाथियों के लिए भोजन (फल-फूल, पत्तियां) और पानी के बारहमासी स्रोत प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, जो इनके सुरक्षित प्रजनन और संवर्धन के लिए आदर्श माने जाते हैं।
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अंतरराज्यीय कॉरिडोर: यह क्षेत्र पड़ोसी राज्य झारखंड और मध्य प्रदेश के मंडला से आने वाले हाथियों के लिए एक मुख्य प्राकृतिक गलियारा (माइग्रेशन कॉरिडोर) भी है।
💬 ‘कटघोरा में 52 हाथी कर रहे हैं विचरण’: डीएफओ जितेंद्र उपाध्याय का बयान
वन मंडल अधिकारी की आधिकारिक प्रतिक्रिया:
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डीएफओ का वक्तव्य: कटघोरा वन मंडल के डीएफओ जितेंद्र उपाध्याय ने बताया कि एतमानगर रेंज में 38 हाथियों के दल की एक हथिनी ने स्वस्थ शावक को जन्म दिया है।
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जनसहयोग की सराहना: उन्होंने कहा कि स्थानीय ग्रामीण स्थिति की गंभीरता को समझ रहे हैं और कोई भी जंगल के भीतर जाकर हाथियों को परेशान नहीं कर रहा है।
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कुल संख्या पर नजर: डीएफओ के मुताबिक वर्तमान में कटघोरा वन मंडल क्षेत्र में कुल 52 हाथी विचरण कर रहे हैं, जिनकी गतिविधियों पर विभाग आधुनिक ट्रैकिंग और मैदानी अमले के जरिए लगातार निगरानी रख रहा है।