Gorakhpur-Faizabad MLC Election: मतगणना के दौरान मऊ में बूथ नंबर 115 पर 52 वोट अधिक मिलने का दावा, देवरिया से आई पेटी बिना सील मिली
गोरखपुर: गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के विधान परिषद (MLC) चुनाव की मतगणना के दौरान वोटों के आंकड़ों और मतपेटियों की सील को लेकर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, मऊ जनपद के अंतर्गत आने वाले बूथ संख्या 115 की एक मतपेटी में आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक कुल 623 वोट दर्ज किए गए थे, लेकिन जब मतगणना के दौरान उस पेटी को खोला गया तो उसमें 675 वोट मिलने का दावा किया गया। इस प्रकार निर्धारित रिकॉर्ड से 52 वोट अधिक पाए जाने की बात सामने आने के बाद हड़कंप मच गया। इस गंभीर अनियमितता को लेकर निर्दलीय प्रत्याशी अजय सिंह एडवोकेट ने मौके पर ही अपनी लिखित आपत्ति दर्ज कराई है। इसके साथ ही, देवरिया जिले से लाई गई एक अन्य मतपेटी के बिना सील के मिलने की सनसनीखेज शिकायत भी सामने आई है।
मऊ के बूथ नंबर 115 पर रिकॉर्ड से 52 वोट ज्यादा मिलने का किया गया दावा
स्थानीय प्रशासन की देखरेख में गोरखपुर में चल रही मतगणना के दौरान जब मऊ जिले के बूथ संख्या 115 की मतपेटी को खोला गया, तो वहां आंकड़ों का बड़ा हेरफेर देखने को मिला। कागजी रिकॉर्ड और फॉर्म-16 के अनुसार इस विशिष्ट बूथ पर कुल 623 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। हालांकि, जब मतपेटी की सिलाई और सील खोलकर मतों की छंटनी शुरू हुई, तो उसमें से 675 मत निकलने का दावा किया गया। आधिकारिक रिकॉर्ड और मतपेटी के भीतर निकले वोटों की संख्या में 52 वोटों का भारी अंतर आने के बाद मतगणना स्थल पर असमंजस की स्थिति बन गई। इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए निर्दलीय प्रत्याशी अजय सिंह एडवोकेट ने तत्काल प्रभाव से लिखित आपत्ति दर्ज कराई और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की।
देवरिया से आई मतपेटी के बिना सील मिलने पर प्रत्याशियों ने जताया भारी रोष
वोटों की गिनती के बीच एक और बड़ी लापरवाही तब सामने आई जब देवरिया जनपद के बनकटा क्षेत्र से लाई गई एक अन्य मतपेटी पूरी तरह बिना सील के पाई गई। निर्दलीय प्रत्याशी अजय सिंह के अनुसार, जब इस मतपेटी को स्ट्रांग रूम से बाहर लाकर मतगणना टेबल पर रखा गया, तो उसकी सील टूटी या गायब होने की बात प्रकाश में आई। मतपेटी के सीलबंद न होने की इस घटना के सामने आते ही वहां मौजूद विभिन्न प्रत्याशियों और उनके अभिकर्ताओं ने जोरदार आपत्ति जताई और कड़ा हंगामा किया। मतपेटियों की सुरक्षा और उनकी सील को लेकर उठे इन तमाम गंभीर सवालों ने पूरी चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर ही बड़े प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
अधिकारियों की जांच और आधिकारिक स्पष्टीकरण का बेसब्री से किया जा रहा इंतजार
एक तरफ जहां बूथ संख्या 115 पर दर्ज संख्या से 52 वोट अधिक निकलने का गंभीर दावा किया गया है, वहीं दूसरी तरफ देवरिया से बिना सील वाली मतपेटी पहुंचने की शिकायत ने निर्वाचन प्रशासन की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। अब इस पूरे मामले में जिम्मेदार चुनावी अधिकारियों की जांच और उनके आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार किया जा रहा है। मतगणना से जुड़े फॉर्म-16, पोलिंग डायरी, मतपेटियों की सील और अन्य जरूरी दस्तावेजों का जब तक भौतिक और तकनीकी मिलान नहीं हो जाता, तब तक यह साफ होना मुश्किल है कि मतों की संख्या में यह भारी अंतर आखिरकार कैसे आया और बिना सील वाली पेटी की वास्तविक स्थिति क्या थी। फिलहाल, इन दोनों गंभीर घटनाओं को लेकर सभी प्रत्याशियों में भारी नाराजगी है, हालांकि निर्वाचन अधिकारियों की तरफ से इस पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।