देश की राजधानी दिल्ली में सड़क हादसे लगातार जानलेवा साबित हो रहे हैं। साल 2026 के शुरुआती नौ महीनों (जनवरी से सितंबर) में दिल्ली की सड़कों पर कुल 4,679 हादसे दर्ज किए गए, जिनमें 1,309 लोगों की दर्दनाक मौत हुई और 4,662 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। आंकड़ों के अनुसार, राजधानी में हर दिन औसतन 17 सड़क हादसे हो रहे हैं, जिनमें औसतन 5 लोग अपनी जान गंवा रहे हैं और 17 लोग घायल हो रहे हैं। चिंताजनक बात यह है कि कुल मृतकों में से करीब 81 प्रतिशत हिस्सेदारी दोपहिया वाहन चालकों और पैदल यात्रियों की है।
🚶♂️ पैदल चलना हुआ खतरनाक: हर पांच में से दो मृतक पैदल यात्री, ट्रकों और ई-रिक्शा के हादसों में बढ़ोतरी
दिल्ली में पैदल यात्रियों के लिए सड़कें सबसे ज्यादा असुरक्षित साबित हो रही हैं। 2026 में सितंबर तक ही 492 पैदल यात्रियों की जान जा चुकी है, यानी हादसों में जान गंवाने वाला हर पांच में से दूसरा व्यक्ति पैदल यात्री था। इसके अलावा हादसों में शामिल वाहनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो कारों की हिस्सेदारी 15%, ट्रकों की 13%, बसों की 6% और ई-रिक्शा की 2.5% रही है। बीते कुछ वर्षों में ई-रिक्शा और भारी ट्रकों से जुड़े हादसों की संख्या में तेजी से इजाफा दर्ज किया गया है।
📊 पिछले छह साल का सबसे भयावह रिकॉर्ड: ट्रैफिक पुलिस के सामने पैदल चालकों और बाइक सवारों की सुरक्षा बड़ी चुनौती
दिल्ली में हादसों का यह रोजाना औसत पिछले छह सालों में सबसे अधिक है। साल 2021 में जहाँ रोजाना औसतन 13 हादसे होते थे, वहीं 2026 में यह संख्या बढ़कर 17 तक पहुँच गई है। दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ये आंकड़े राजधानी की यातायात व्यवस्था और सड़क सुरक्षा सुधारने की तत्काल आवश्यकता को दर्शाते हैं। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस अब दुर्घटना संभावित क्षेत्रों (ब्लैक स्पॉट्स) की पहचान कर पैदल यात्रियों और दोपहिया चालकों के लिए सुरक्षित इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने पर काम कर रही है।