दिल्ली विधानसभा में पेश 2024-25 की CAG रिपोर्ट: सब्सिडी में 172% की बढ़ोतरी, घटकर 3,695 करोड़ हुआ कैपिटल खर्च
नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को केजरीवाल सरकार के कार्यकाल से जुड़ी वित्तीय वर्ष 2024-25 की नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की वार्षिक रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी।
कैग की इस रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि अत्यधिक सब्सिडी और प्रतिबद्ध खर्चों के चलते दिल्ली सरकार (GNCTD) के पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) में निरंतर वृद्धि के बजाय भारी “गिरावट का रुझान” दर्ज किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली सरकार के कुल बजट का 88.38 प्रतिशत हिस्सा केवल राजस्व खर्च में ही चला गया, जिसके कारण दीर्घकालिक इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास परियोजनाओं में निवेश हेतु सरकार के पास सीमित वित्तीय गुंजाइश शेष बची।
📊 2015 से 2025 तक सब्सिडी में 172% का उछाल, बिजली सब्सिडी पर खर्च हुए अतिरिक्त ₹2,033 करोड़
CAG रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2015 से 2025 की दस वर्षीय अवधि के दौरान दिल्ली सरकार द्वारा दी जाने वाली कुल सब्सिडी में 3,222 करोड़ रुपये (172.48 प्रतिशत) की अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।
इस भारी-भरकम बढ़ोतरी का मुख्य कारण बिजली सब्सिडी में 2,033 करोड़ रुपये (128.83 प्रतिशत) की वृद्धि होना रहा। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि 2015-25 के दौरान पूंजीगत खर्च कुल बजट का मात्र 7% से 15% के बीच ही सिमट कर रह गया, जो राष्ट्रीय राजधानी के इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण और बुनियादी विकास कार्यक्रमों में आई गंभीर बाधाओं को दर्शाता है।
📉 ₹8,311 करोड़ से घटकर ₹3,695 करोड़ पर आया कैपिटल खर्च, दीर्घकालिक विकास प्रभावित होने की आशंका
रिपोर्ट में चिंता व्यक्त की गई है कि लॉन्ग-टर्म एसेट्स (दीर्घकालिक संपत्तियों) के निर्माण में दिल्ली सरकार ने लगातार उदासीनता दिखाई है।
आंकड़ों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2021-22 में जहाँ पूंजीगत व्यय ₹8,311 करोड़ था, वह धीरे-धीरे घटकर वर्ष 2024-25 में मात्र ₹3,695 करोड़ रुपये रह गया। अर्थव्यवस्था के अनुपात में कैपिटल एक्सपेंडिचर का यह लगातार घटता ग्राफ यह प्रमाणित करता है कि सरकार ने बुनियादी परिसंपत्ति निर्माण को प्राथमिकता नहीं दी, जिससे आने वाले समय में दिल्ली की आर्थिक संवृद्धि और सार्वजनिक सेवा तंत्र (Service Delivery) के प्रभावित होने की पूरी संभावना है।
💡 वित्तीय स्थिरता हेतु अतिरिक्त संसाधन जुटाने और कर अनुपालन मजबूत करने की सलाह
कैग रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि दिल्ली सरकार पर वर्तमान में कर्ज का दबाव अपेक्षाकृत कम है और उधार प्रबंधन अनुशासित इंडिकेटर्स को दिखाता है।
तथापि, रिपोर्ट में सतर्क किया गया है कि भविष्य में लिए जाने वाले ऋण का उपयोग पुराने कर्जों के भुगतान के बजाय प्रत्यक्ष विकास कार्यों और भौतिक/मानव पूंजी निर्माण में होना चाहिए। कैग ने GNCTD को परामर्श दिया है कि वह बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाने हेतु कर चोरी रोककर, राजस्व प्रवर्तन को मजबूत कर और गैर-कर राजस्व (Non-Tax Revenue) के नए स्रोत तलाश कर अतिरिक्त संसाधन जुटाए।
🏦 PSUs में ₹21,810 करोड़ का भारी निवेश, पर रिटर्न 1% से भी कम; स्पीकर विजेंद्र गुप्ता बोले— “7 साल से दबाई गई थीं रिपोर्टें”
कैग रिपोर्ट के एक अन्य अध्याय में दिल्ली सरकार द्वारा सरकारी उपक्रमों (PSUs) एवं सार्वजनिक कंपनियों में किए गए निवेश पर मिलने वाले बेहद निराशाजनक रिटर्न पर सवाल उठाए गए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2015-16 में सरकारी कंपनियों में दिल्ली सरकार का निवेश ₹18,492 करोड़ था, जो 2024-25 में बढ़कर ₹21,810 करोड़ तक पहुंच गया। किंतु इस विशाल निवेश के एवज में सरकार को मिलने वाला लाभांश (Dividend) व मुनाफा 1 प्रतिशत से भी कम रहा, जो सरकार की लागत के मुकाबले नगण्य है।
सदन में रिपोर्ट प्रस्तुत होने के पश्चात विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने टिप्पणी करते हुए कहा कि, “इस रिपोर्ट को मिलाकर अब कुल 19 कैग रिपोर्टें सदन में आ चुकी हैं। पिछले 7 वर्षों से कोई भी CAG रिपोर्ट सदन में नहीं रखी गई थी। अब इन सभी रिपोर्टों पर नियम के अनुसार विचार किया जाएगा।”