चुनावों में कांग्रेस के हिस्से में आई बस हताशा और मायूसी, फिर सवालों में लीडरशिप

पांच राज्यों के चुनावी नतीजे कांग्रेस के लिए सदमे की तरह है. पार्टी पंजाब का किला बचाने में भी सफल नहीं हुई है. ऐसे में एक बार फिर से कांग्रेस नेतृत्व को लेकर सवाल उठने लगे हैं. आने वाले दिनों में पार्टी के भीतर बड़े पैमाने पर उठापठक संभव है.

नई दिल्ली: पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों (Assembly Elections) में कांग्रेस (Congress) के हिस्से केवल हताशा और मायूसी ही आई है. पंजाब (Punjab) गंवाने के साथ ही पार्टी को बाकी चार राज्यों में भी शर्मनाक प्रदर्शन का सामना करना पड़ा है. कांग्रेस ने इस बार प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) को आगे करके नया दांव चला था. उसे उम्मीद थी कि प्रियंका रूठे मतदाताओं को पार्टी की तरफ मोड़ सकेंगी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. अब यहां से कांग्रेस के लिए आगे की राह बेहद मुश्किल हो गई है.

बस इन राज्यों में है सरकार

फिलहाल छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कांग्रेस की अपने बूते सरकार है, जबकि महाराष्ट्र और झारखंड में वह गठबंधन सरकार में है. पुद्दूचेरी के बाद पंजाब के रूप में कांग्रेस के हाथ से एक और राज्य फिसल गया है. पार्टी अपने सवा सौ साल से ज्यादा के इतिहास में सबसे कमजोर दौर से गुजर रही है. कांग्रेस नेतृत्व को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं. जिन राज्यों में उसकी सरकार है वहां आपसी खींचतान, गुटबाजी व अनुशासनहीनता हावी है. पंजाब में सत्ता गंवाने और उत्तराखंड में सत्ता में आने का मौका चूकने के पीछे पार्टी की आपसी खींचतान को ही प्रमुख वजह माना जा रहा है.

आपसी विवाद में उलझी रही पार्टी

पंजाब में कैप्टन बनाम सिद्धू, फिर सिद्धू बनाम चन्नी, इसी तरह उत्तराखंड में हरीश रावत बनाम प्रीतम सिंह की खींचतान के बीच पार्टी ने चुनाव लड़े और नतीजा सबके सामने है. 2019 में राहुल गांधी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के लगभग तीन साल बाद भी पार्टी अपने स्थायी नेतृत्व का मुद्दा सुलझा नहीं पाई है. वैसे पार्टी की कमान भले ही सोनिया गांधी के हाथों है, लेकिन फैसले राहुल गांधी ले रहे हैं. कमजोर नेतृत्व की वजह से कई नेता पार्टी छोड़कर जा चुके हैं और कई कतार में हैं. आने वाले दिनों में संगठन के चुनाव होने हैं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या खराब प्रदर्शन के बावजूद राहुल गांधी पार्टी को दोबारा कमान सौंपी जाएगी?

‘आप’ बन रही कांग्रेस के लिए चुनौती

नेतृत्व संकट में घिरी कांग्रेस की एक बड़ी चुनौती राष्ट्रीय स्तर पर ढीली होती पकड़ भी है. लगातार मिल रही हार के चलते पार्टी विपक्षी दलों के बीच पहले वाली स्थिति में नहीं है. यहां तक कि छोटे दलों ने भी उसे गंभीरता से लेना बंद कर दिया है. पांच राज्यों के चुनाव से पहले देश में तीसरे मंच को लेकर कवायद शुरू हुई थी, लेकिन टीएमसी, टीआरएस और आप जैसे दलों ने कांग्रेस को लेकर कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई. अगर यही स्थिति रही तो यूपी के बाकी दल भी उससे दूर जाने में देरी नहीं लगाएंगे. वैसे देखा जाए तो अरविंद केजरीवाल की ‘आप’ कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती बन रही है. दिल्ली के बाद पंजाब दूसरा राज्य है, जहां आप ने कांग्रेस को सत्ता से बेदखल किया है.

इन राज्यों पर होगी ‘आप’ की नजर

एक्सपर्ट्स मानते हैं कि पंजाब के बाद ‘आप’ की नजर उन राज्यों पर होगी, जहां कांग्रेस और भाजपा में सीधा मुकाबला है. पार्टी का अगला प्रयोग इस साल के अंत में गुजरात में होने वाले चुनाव में देखने को मिल सकता है. वहीं हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान में भी चुनाव होने हैं, जहां मोटे तौर पर मुकाबला कांग्रेस-भाजपा में ही है. यहां भी केजरीवाल बड़ा उलटफेर करने की कोशिश कर सकते हैं. जिसका नुकसान सीधे तौर पर कांग्रेस को ज्यादा उठाना होगा.

फिर सक्रिय होगा G-23

चुनावी नतीजों के बाद कांग्रेस में हलचल बढ़नी तय है. पार्टी में असंतुष्ट नेताओं का गुट G-23 एक बार फिर सक्रिय हो सकता है. इसके अलावा, कुछ नेता आने वाले समय में कांग्रेस छोड़ सकते हैं. इस उठापठक का असर केंद्रीय संगठन से लेकर राज्य की इकाइयों तक में देखने को मिल सकता है. गौरतलब है कि हाल ही में पूर्व केंद्रीय मंत्री ए.के एंटोनी ने अपने राजनैतिक संन्यास का ऐलान किया गया है. कहा जा रहा है कि संगठन चुनाव में अगर राहुल गांधी अध्यक्ष पद की दावेदारी पेश करते हैं, तो उन्हें पार्टी के भीतर से चुनौती भी मिल सकती है.

क्या धारावी की जमीन के मालिक बन जाएंगे अडानी, जानिए असल कहानी?     |     EVM के इस्तेमाल की जिद क्यों? एलन मस्क की टिप्पणी के बाद अखिलेश यादव का सवाल     |     इंस्टा पर दोस्ती, होटल ले जाकर दोस्तों ने किया गंदा काम… सुसाइड से पहले युवक बता गया दर्द भरी दास्तां     |     तांत्रिक ने बीमारी ठीक करने का झांसा देकर महिला से किया दुष्कर्म     |     T20 World Cup: पाकिस्तान के बाहर होने पर सिद्धू ने खोली ICC की पोल, गावस्कर ने भी की खिंचाई     |     संसद में अब 2014 और 2019 वाली स्थिति नहीं…कभी भी गिर सकती है सरकार, स्पीकर पद को लेकर संजय राउत का बड़ा बयान     |     आयकर में दान पर टैक्स छूट के लिए फार्म 10बीई जरूर लें करदाता     |     राहुल गांधी ने छोड़ी वायनाड सीट तो प्रियंका गांधी होंगी उम्मीदवार! अगले तीन दिन में होगा फैसला     |     कोटा कोचिंग सेंटर में IIT की तैयारी करने वाले छात्र ने किया सुसाइड     |     उज्जैन से पीएमश्री धार्मिक पर्यटन हेली सेवा शुरू, CM मोहन यादव ने दिखाई हरी झंडी     |     Baba Sodal Mela Security Plan: 25 सितंबर को लगेगा बाबा सोढल मेला; सीसीटीवी, बम व डॉग स्क्वाड संभालेंगे मोर्चा, ट्रैफिक रूट डायवर्ट     |     BJP Punjab Drug Free Rally: ‘पंजाब के भविष्य की दिशा तय करेगी यह रैली’; अशोक सरीन हिक्की ने 50 एकड़ में की महातैयारियां     |     BJP Organizational Appointments: बीजेपी ने पंजाब और चंडीगढ़ के प्रभारी-सह प्रभारी किए नियुक्त; देखें पूरी सूची     |     Poonch Security Alert: पुंछ में एलओसी से सटे गांवों में मिलीं 3 लैंडमाइन; सुरक्षाबलों का सर्च ऑपरेशन जारी     |     Jodhpur Chemical Factory Fire: जोधपुर में केमिकल फैक्ट्री में भीषण आग के बाद ब्लास्ट; आग बुझाने में जुटे 13 फायरकर्मी झुलसे     |     IIT Bombay Student Suicide: परीक्षा केंद्र का CCTV फुटेज आया सामने; साहिल वाकोडे मामले में बड़ा खुलासा     |     Bhoramdeo Sugar Factory Award: भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाने को लगातार दूसरी बार मिला ‘नेशनल एफिशिएंसी अवॉर्ड’     |     Jashpur News: जशपुर पुलिस की मिसाल! दिवंगत आरक्षक देव नारायण सिंह के पुत्र को मिला आरक्षक पद का नियुक्ति पत्र     |     Korba Crime News: जमीन विवाद में बुजुर्ग चाचा की कुल्हाड़ी मारकर हत्या; अगले ही दिन पत्थर से कुचलकर युवती का मर्डर     |     Balod Electricity News: बिना सूचना कट रहे पंचायत कनेक्शन; बालोद में बारिश के बीच सरपंच संघ का बड़ा प्रदर्शन     |    

Pradesh Samna
पत्रकार बंधु भारत के किसी भी क्षेत्र से जुड़ने के लिए सम्पर्क करें