Jabalpur-Bhopal NH-45 Toll News: जबलपुर-भोपाल हाईवे पर शाहपुरा टोल टैक्स वसूली पर रोक; नितिन गडकरी ने दी मंजूरी
जबलपुर। जबलपुर-भोपाल मार्ग (NH-45) पर स्थित शाहपुरा रेलवे ओवरब्रिज (ROB) के क्षतिग्रस्त होने के बाद लंबे समय से चल रही विवादित टोल वसूली को अस्थायी रूप से रोकने का रास्ता साफ हो गया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान शाहपुरा टोल प्लाजा पर टोल वसूली तुरंत स्थगित करने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस फैसले के बाद मध्य प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने केंद्रीय मंत्री का आभार व्यक्त किया है। ओवरब्रिज धंसने के कारण इस व्यस्त मार्ग पर आवागमन पूरी तरह ठप्प है और वाहन चालकों को कई किलोमीटर लंबे वैकल्पिक रास्तों से होकर गुजरना पड़ रहा था।
🚗 400 करोड़ का शाहपुरा आरओबी धंसने से यातायात ठप्प: पाटन के रास्ते एक्स्ट्रा दूरी तय करने को मजबूर वाहन चालक
जबलपुर-भोपाल मार्ग पर शाहपुरा रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण लगभग 400 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से किया गया था।
ब्रिज का एक हिस्सा अचानक क्षतिग्रस्त होकर धंस जाने के कारण सुरक्षा के लिहाज से वाहनों की आवाजाही तुरंत बंद कर दी गई। शुरुआती दौर में यातायात को वैकल्पिक रास्ते पर डायवर्ट किया गया, लेकिन वहां भी तकनीकी दिक्कतें आने के कारण दोनों रास्तों से आवागमन रोकना पड़ा। इसके चलते जबलपुर और आसपास के जिलों से आने-जाने वाले वाहन चालकों को पाटन होकर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है, जिससे लोगों का समय और ईंधन दोनों बेवजह खर्च हो रहा है।
📢 मंत्री के निर्देश के बाद भी जारी थी जबरन टोल वसूली: स्थानीय जनता ने किया था उग्र प्रदर्शन
शाहपुरा आरओबी के क्षतिग्रस्त होने के बाद लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने भोपाल में अफसरों की बैठक लेकर शाहपुरा टोल प्लाजा पर टोल वसूली बंद करने के निर्देश जारी किए थे।
इसके बावजूद टोल प्लाजा संचालक द्वारा वाहनों से लगातार शुल्क वसूला जा रहा था। टोल कंपनी का तर्क था कि जब तक भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से लिखित आदेश नहीं मिलता, तब तक टोल बंद नहीं किया जाएगा। सड़क उपलब्ध न होने के बावजूद टोल वसूले जाने पर स्थानीय नागरिकों और वाहन चालकों का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों ने उग्र प्रदर्शन करते हुए चेतावनी दी थी कि यदि अवैध टोल वसूली तुरंत बंद नहीं हुई तो बड़ा जन-आंदोलन किया जाएगा।
✉️ PWD मंत्री राकेश सिंह ने गडकरी को लिखा था पत्र: ‘जब सड़क ही चालू नहीं तो किस बात का टोल?’
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को एक विस्तृत पत्र भेजकर शाहपुरा आरओबी का मरम्मत कार्य पूरा होने तक टोल वसूली को पूरी तरह स्थगित करने का आग्रह किया था।
पत्र में उन्होंने बताया कि एप्रोच रोड क्षतिग्रस्त होने के कारण आम जनता को पाटन के लंबे रास्ते से जाना पड़ रहा है। ऐसे में टोल वसूली करना पूरी तरह अन्यायपूर्ण है और इससे जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। मंत्री ने अवगत कराया कि 2 सितंबर 2026 को ही एमपी पीडब्ल्यूडी द्वारा NHAI के क्षेत्रीय अधिकारी को टोल बंद करने हेतु पत्र लिखा जा चुका था।
⚖️ निर्माण एजेंसी पर कसा शिकंजा: ‘वागड़ इंफ्रा’ और ‘सोराठिया वेलजी’ डिबार, एमडी पर एफआईआर
लापरवाही और घटिया निर्माण के गंभीर आरोपों के बाद राज्य सरकार ने निर्माण एजेंसियों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है।
400 करोड़ की इस परियोजना का निर्माण ‘मेसर्स वागड़ इंफ्रा प्रोजेक्ट्स’ और ‘मेसर्स सोराठिया वेलजी रत्ना कंपनी लिमिटेड’ के जॉइंट वेंचर ने किया था। डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड (दोष दायित्व अवधि) के दौरान ही ब्रिज के प्री-कास्ट पैनल धंस गए। इस लापरवाही पर कार्रवाई करते हुए दोनों कंपनियों के जॉइंट वेंचर को 10 जून 2026 को डिबार कर दिया गया था। इसके अलावा वागड़ इंफ्रा के प्रबंध निदेशक (MD) विनोद जैन के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कराई जा चुकी है।
🚨 अवैध उत्खनन में पहले भी लग चुका है 85 करोड़ का जुर्माना: केंद्रीय जांच टीम ने संभाला मोर्चा
शाहपुरा आरओबी का निर्माण करने वाली कंपनी का विवादों से पुराना नाता रहा है।
वर्ष 2021 में पर्यावरण अनुमति के बिना अवैध उत्खनन करने पर जिला प्रशासन ने कंपनी पर ₹3 करोड़ का जुर्माना लगाया था। इसके बाद वर्ष 2022 में नर्मदा कछार के मानेगांव क्षेत्र में सड़क निर्माण की आड़ में अवैध खनन करने पर कंपनी पर रिकॉर्ड ₹82 करोड़ का भारी जुर्माना ठोका गया था। फिलहाल सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (CRRI) और रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों की संयुक्त टीम ब्रिज के ढांचागत नुकसान की तकनीकी जांच कर रही है।