“Iran Political Crisis: ईरान में सत्ता परिवर्तन की सुगबुगाहट, रेजा पहलवी या कोई और? जानें किसने पेश की अपनी दावेदारी

ईरान में बगावत की आग बढ़ती जा रही है. जहां आर्थिक संकट को लेकर तेहरान में विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ था. इसी के बाद लोगों का गुस्सा इतना बढ़ा की लोग सरकार के खिलाफ आवाज उठाने लगे. सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई. ईरान के इस प्रदर्शन की आग को सुलगाने में देश के निर्वासित प्रिंस रजा पहलवी ने भी अहम रोल निभाया. रजा पहलवी लगातार प्रदर्शनकारियों से सड़कों पर उतरने की अपील कर रहे हैं. इसी बीच अब वो भविष्यवाणी कर रहे हैं कि ईरान की सरकार गिरेगी. साथ ही दावा कर रहे हैं कि वो देश में सत्ता पर काबिज होंगे.

ईरान के पूर्व पश्चिम-समर्थक सम्राट के बेटे रजा पहलवी ने भविष्यवाणी की है कि आने वाले दिनों में देश की सरकार गिर जाएगी. इसी के बाद उन्होंने आगे कहा कि अगर ईरान की इस्लामिक सरकार गिर जाती है तो इस पद पर काबिज होने के लिए वो खुद को उपयुक्त मानते हैं. रजा पहलवी ने दावा किया है कि वो उत्तराधिकारी सरकार का नेतृत्व करने के लिए विशेष रूप से उपयुक्त हैं.

सरकार के गिरने का किया दावा

आयतुल्ला अली खामेनेई की सरकार के दूसरे विरोधी, रजा पहलवी के दावे पर सवाल उठा सकते हैं. इसकी वजह यह है कि 1979 की इस्लामी क्रांति के समय उनका परिवार ईरान छोड़कर चला गया था और तब से वो देश में नहीं रहे हैं. पश्चिमी देशों से खामेनेई को सत्ता से हटाने में मदद की अपील करते हुए पहलवी ने शुक्रवार को कहा कि ईरान की मौजूदा सरकार का गिरना तय है, चाहे बाहर से मदद मिले या न मिले.

रजा पहलवी ने वॉशिंगटन में एक समाचार सम्मेलन में कहा, ईरानी लोग जमीनी स्तर पर निर्णायक कदम उठा रहे हैं. अब समय आ गया है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पूरी तरह उनका साथ दे.

उन्होंने कहा कि विदेशी दखल का मतलब जमीन पर सैनिक भेजना नहीं है, बल्कि लक्षित हस्तक्षेप होना चाहिए, जिससे शासन की दमनकारी मशीनरी कमजोर की जा सके, जैसे रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के नेतृत्व को निशाना बनाना. रजा पहलवी ने कहा, ईरानी लोगों को दुनिया से समर्थन चाहिए, ताकि जानें बचाई जा सकें, उनकी आवाज को मजबूती मिले. लेकिन, मैं साफ कहना चाहता हूं—दुनिया मदद करे या न करे, यह शासन गिरेगा. अगर दुनिया अपने शब्दों को कार्रवाई में बदलेगी, तो यह जल्दी गिरेगा और ज्यादा जानें बचेंगी.

हजारों लोगों की मौत का दावा

पहलवी ने कहा कि 28 दिसंबर से पूरे देश में फैले प्रदर्शनों के खिलाफ सुरक्षा बलों की खूनी कार्रवाई के दौरान 48 घंटों में 12,000 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई. मानवाधिकार संगठनों ने इससे कम आंकड़ों की पुष्टि की है, लेकिन वो भी मृतकों की संख्या हजारों में बता रहे हैं.

इस बीच अमेरिका लगातार ईरान को चेतावनी देता रहा है. डोनाल्ड ट्रंप ने वॉर्निंग दी थी कि अगर सरकार प्रदर्शनकारियों को मारती रही या हिरासत में लिए गए लोगों को फांसी दी गई, तो मदद रास्ते में है. हालांकि, अमेरिका के मध्य-पूर्वी सहयोगियों की इस चेतावनी के बाद कि सैन्य हस्तक्षेप से क्षेत्र में अस्थिरता फैल सकती है, ट्रंप पीछे हट गए.

शाह जिंदाबाद के लग रहे नारे

हाल के प्रदर्शनों में प्रदर्शनकारी शाह जिंदाबाद के नारे लगा रहे हैं, उसके बाद पहलवी ने अपनी बात रखी. हालांकि, पहलवी के पिता शाह मोहम्मद रजा पहलवी की राजशाही भी इसी तरह के महीनों चले जन-प्रदर्शनों और यातना व मानवाधिकार उल्लंघनों की शिकायतों के बाद गिरा दी गई थी.

गार्डियन ने रजा पहलवी से पूछा कि क्या वो फिर से राजशाही बहाल करना चाहते हैं, इस सवाल का उन्होंने सीधा जवाब देने से बचते हुए कहा कि उनके पास व्यवस्थित सत्ता परिवर्तन की एक व्यापक योजना है, जिसे तुरंत लागू किया जा सकता है. इसमें उत्तराधिकारी सरकार कैसी होगी इसको तय करने के लिए जनमत की मर्जी शामिल की जाएगी, हालांकि उन्होंने राजशाही की वापसी की संभावना से साफ इनकार भी नहीं किया.

ईरान के साथ रिश्ते को लेकर क्या कहा?

उन्होंने कहा कि वो सत्ता के शांतिपूर्ण और स्थिर बदलाव को सुनिश्चित करने के लिए सबसे सही व्यक्ति हैं. उनके मुताबिक, लोगों ने गोलियों का सामना करते हुए भी साफ और मजबूत संदेश दिया है. पहलवी ने अपने और ईरानी जनता के बीच के रिश्ते का जिक्र करते हुए कहा कि यह रिश्ता उनके जन्म से है और इसे कभी तोड़ा नहीं जा सकता, यहां तक कि निर्वासन में रहते हुए भी.

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Pradesh Samna
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