जंतर-मंतर पर CJP प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल पर बवाल, सुप्रीम कोर्ट में रोक लगाने की याचिका दाखिल
नई दिल्ली: दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर हाल ही में पेपर लीक के मुद्दे पर आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) द्वारा पैलेट गन (Pellet Guns) का इस्तेमाल किए जाने पर विवाद गहरा गया है। इस कार्रवाई में कई प्रदर्शनकारी गंभीर रूप से जख्मी हुए हैं। अब नागरिक अधिकारों और प्रदर्शनों में पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। कई विपक्षी नेताओं ने इस पर तीखी नाराजगी जाहिर की है।
इस बीच, मामला देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल कर भीड़ नियंत्रण के लिए पैलेट गन और घातक धातु वाले प्रोजेक्टाइल (Metal Projectiles) के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है।
⚖️ पूर्व IPS यशोवर्धन आजाद और पीड़ितों ने खटखटाया कोर्ट का दरवाजा, अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर के जरिए दायर हुई याचिका
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह याचिका संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत पूर्व आईपीएस अधिकारी यशोवर्धन आजाद, प्रशांत कुमार सिंह और शेख इरशाद मंसूरी ने वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर के माध्यम से दायर की है।
याचिकाकर्ताओं में शामिल प्रशांत कुमार सिंह और शेख इरशाद मंसूरी ने दावा किया है कि वे दोनों 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान RAF द्वारा चलाई गई पैलेट गन से गंभीर रूप से घायल हो गए थे। याचिका में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर निहत्थे नागरिकों की भीड़ पर धातु के पैलेट दागने की नीति पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
🩹 20 जुलाई की घटना में घायलों के लिए मुआवजा, पूर्ण इलाज और पुनर्वास की मांग
याचिका में अदालत से मांग की गई है कि 20 जुलाई को पैलेट लगने से घायल हुए सभी पीड़ितों को सरकार की ओर से उचित आर्थिक मुआवजा दिया जाए। इसके साथ ही उनके पूर्ण और समुचित इलाज, पुनर्वास (Rehabilitation) तथा आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं निशुल्क सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए जाएं।
पीड़ित प्रशांत कुमार ने दावा किया कि वे प्रदर्शन में एक शांतिपूर्ण नागरिक के रूप में शामिल हुए थे और बिना किसी उकसावे या आक्रामकता के उन पर पैलेट गन से फायरिंग की गई। वहीं, 26 वर्षीय पीड़ित शेख इरशाद मंसूरी का कहना है कि वे अपने पासपोर्ट और वीजा संबंधी कार्य निपटाने के बाद पास स्थित कनॉट प्लेस में मौजूद थे, जहां वे अचानक हुई पैलेट फायरिंग की चपेट में आ गए।
याचिका में उल्लेख है कि RAF ने अचानक पंप-एक्शन गन से फायरिंग की, जिससे धातु के सैकड़ों छोटे-छोटे पैलेट भीड़ की ओर फैल गए और पीड़ितों के शरीर में धंस गए, जिससे उन्हें अत्यधिक रक्तस्राव और असहनीय दर्द सहना पड़ा।
📜 BNSS 2023 की धारा 148 का दिया गया हवाला, पहले चेतावनी देना कानूनी रूप से अनिवार्य
याचिका में ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता’ (BNSS), 2023 की धारा 148 के स्थापित कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा गया है कि किसी भी नागरिक भीड़ को तितर-बितर करने से पहले लाउडस्पीकर से स्पष्ट चेतावनी देना और उन्हें शांतिपूर्ण तरीके से वहां से हटने का अवसर देना अनिवार्य है।
यदि चेतावनी के बाद भी भीड़ नहीं हटती, तब भी बल प्रयोग के शुरुआती चरणों में केवल न्यूनतम सिविल फोर्स (Civil Force) का प्रयोग किया जाना चाहिए। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि 20 जुलाई को दोपहर करीब 4:00 से 4:30 बजे के बीच पुलिस और आरएएफ ने बिना किसी पूर्व चेतावनी के पहले आंसू गैस के गोले छोड़े, लाठीचार्ज किया और फिर सीधे पैलेट गन से घातक फायरिंग कर दी, जो मौलिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है।