Social Work: बेसहारा लोगों का नया ठिकाना ‘अपना घर सेवा आश्रम’; जहां अपमान नहीं, ‘प्रभुजन’ कहकर दिया जाता है सम्मान

कोरबा : शहर की सड़कों और ट्रैफिक सिग्नल के आसपास अक्सर ऐसे लोग दिख जाते हैं जिनके वेशभूषा अस्त व्यस्त और कपड़े मैले होते हैं. इनके पास कोई नहीं जाना चाहता है. ना ही इन्हें कोई अपने पास आने देता है. ऐसे ही बेसहारा लोगों के लिए एक बड़ा सहारा बनकर उभरा है, कोरबा जिले का अपना घर सेवा आश्रम.अपना घर सेवा आश्रम कोरबा शहर के गवर्नमेंट मिनीमाता गर्ल्स कॉलेज के पीछे संचालित है.

बेसहारा लोगों की मददगार

यह संस्था समाज के ऐसे लोगों का रेस्क्यू करती है, जिन्हें कोई भी अपने पास रखना नहीं चाहता. संस्था ऐसे जरुरतमंद लोगों की देखभाल कर उन्हें समाज में रहने लायक जीवन बिताने का अवसर प्रदान करती है.अपना घर सेवा आश्रम में ऐसे ही लगभग 90 महिला और पुरुषों को रखा गया है. जो पागलों की तरह सड़क पर यहां वहां घूमते हुए बेहद दयनीय जीवन व्यतीत कर रहे थे.

प्रभुजन नाम देकर सम्मान

अपना घर सेवा आश्रम के संस्था ने इन जैसे लोगों को “प्रभुजन” का नाम दिया है. संस्था का मानना है कि जिसका कोई नहीं, उसके प्रभु श्री राम तो होते हैं. इसलिए इन्हें प्रभुजन कहकर पुकारा जाता है. प्रभुजनों के लिए जो रसोई है, उसे भी राम जी की रसोई कहा जाता है. कोई दानदाता यदि दान देना चाहे तो उनके लिए राम जी की रसोई में आवश्यकता वाली वस्तुओं की एक लिस्ट भी आश्रम में लगाई गई है. इनमें से ज्यादातर लोग मानसिक तौर पर स्वस्थ नहीं होते. अपना घर में उनकी सेवा की जाती है, चिकित्सकों के परामर्श पर यथा संभव इलाज भी दिया जाता है. कई बार तो सकारात्मक परिणाम मिले हैं और याद आ जाने पर उन्हें सकुशल उनके घर भी पहुंचाया गया है.

तीन टाइम का खाना और इलाज की व्यवस्था
अपना घर सेवा आश्रम एक ऐसी संस्था है, जिनकी मदद की जरूरत कभी-कभी पुलिस को भी पड़ जाती है. अक्सर सड़क पर घूमने वाले मानसिक तौर पर कमजोर लोग पुलिस के लिए भी चुनौती बन जाते हैं. सड़क दुर्घटना के शिकार होने का खतरा रहता है और कई तरह की अन्य परेशानी भी रहती हैं. कई अवसर ऐसे आए हैं, जब पुलिस वालों ने ही ऐसे लोगों को अपना घर सेवा आश्रम के सुपुर्द किया है. कई बार सामान्य लोग भी घुमंतू लोगों को अपना घर सेवा आश्रम में छोड़ जाते हैं. तो कई अवसर ऐसे भी आए जब अपना घर सेवा आश्रम के वॉलिंटियर्स और कर्मचारियों ने सड़क पर घूम रहे घुमंतू लोगों का रेस्क्यू कर उन्हें अपना घर में लाया और फिर उनकी देखभाल शुरू की.

कुछ लोग ठीक होकर घर भी लौटे

अपना घर में महिला और पुरुषों के अलग-अलग वार्ड बनाए गए हैं. जिनकी मानसिक स्थिति थोड़ी ठीक है, उनके लिए भी एक पृथक वार्ड है. कई अवसर ऐसे भी आएं जब यहां रहने आए लोगों की ठीक-ठाक देखभाल हुई. दवा मिली तब उनकी याददाश्त तेज हुई. लोगों को उनका घर याद आया और फिर परिजनों से संपर्क कर यहां रहने वाले प्रभुजनों को उनके घर भेज दिया गया. ऐसे गुमशुदा लोग जब अपने परिवार के पास वापस लौटते हैं, तो परिजन भी काफी खुश होते हैं. फिलहाल अपना घर सेवा आश्रम में 90 प्रभुजन निवास करते हैं.गुमशुदा भाई को वापस लेने हैं आया छोटा भाई अपना घर सेवा आश्रम में मालखरौदा, सक्ती जिला के उमेश पहुंचे हुए थे. जिनका कहना है कि बड़े भाई मानसिक तौर पर थोड़े से कमजोर हैं, कुछ लोगों के साथ वह हाल ही में कोरबा आए थे. घर से काम पर जा रहा हूं, ऐसा कहकर निकले थे. इसके कुछ दिनों तक घर ही नहीं लौटे.

सेवा आश्रम से कॉल आया कि बड़े भाई यहां आ गए हैं. यहां आकर देखा तो व्यवस्था काफी अच्छी है. आश्रम के लोगों ने उनकी ठीक तरह से देखभाल की है, अब मैं इन्हें वापस अपने घर ले जा रहा हूं. भैया को सब कुशल पाना काफी अच्छा है. हम काफी परेशान भी थे –उमेश कुमार यादव, परिजन

प्रभुजनों को संभालना कई बार हो जाता है चुनौतीपूर्ण

अपना घर सेवा आश्रम के सुपरवाइजर ज्योति यादव कहती हैं कि हमारे पास 100 प्रभुजनों को रखने की व्यवस्था है. फिलहाल 88 लोग यहां निवास कर रहे हैं. यह सभी ऐसे लोग हैं जो मानसिक तौर पर थोड़े कमजोर हैं. यहां वहां घूमते हुए, भटकते हुए यह हमें मिल जाते हैं. कई बार पुलिस वाले भी इन्हें हमारे पास छोड़ जाते हैं.

पहले तो हम उन्हें लाकर उनके दाढ़ी और बाल काटते हैं. ताकि वह दिखने में ठीक-ठाक लगे और थोड़ा हल्का महसूस करें. तीनों टाइम का खाना दिया जाता है. टीवी का टाइम भी फिक्स रहता है. जिनको दावा की जरूरत है, उनकी दवाई भी की जाती है. दवा देने के लिए एक अलग व्यक्ति की ड्यूटी है- ज्योति यादव, सुपरवाइजर

परिजन से मिलकर प्रभुजनों को मिलती है खुशी

ज्योति यादव के मुताबिक एक निश्चित रूटीन के तहत वो प्रभुजन लोगों की देखभाल करते हैं. कई लोग ऐसे भी हैं जो ठीक हुए हैं और वापस अपने परिवार के पास लौट गए हैं, परिजन जब ऐसे लोगों को वापस अपने बीच पाते हैं. तब वह काफी खुश होते हैं. हमें भी काफी खुशी होती है कि कम से कम सड़क पर घूमते हुए जो लोग दयनीय जीवन व्यतीत कर रहे थे. अब वह अपने परिवार के पास पहुंच चुके हैं.

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Pradesh Samna
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