Raipur NDPS Court Verdict: कोडीन युक्त कफ सिरप तस्करी मामले में रायपुर कोर्ट का बड़ा फैसला, तीन आरोपियों को 20-20 साल की सजा और 10 लाख का जुर्माना
रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के आमानाका थाना अंतर्गत प्रतिबंधित कोडीन युक्त कफ सिरप के अवैध क्रय-विक्रय और तस्करी से जुड़े एक संगीन मामले में न्यायालय ने एक बेहद कड़ा और अनुकरणीय निर्णय सुनाया है। विशेष न्यायाधीश (एनडीपीएस एक्ट) किरण थवाईत की अदालत ने इस अवैध धंधे में संलिप्त पाए गए तीनों दोषियों को दोषी करार देते हुए 20-20 वर्ष के कठोर सश्रम कारावास की सजा से दंडित किया है। इसके साथ ही प्रत्येक दोषी पर कुल 10 लाख रुपए का भारी-भरकम अर्थदंड भी लगाया गया है।
आरोपियों को अपराध के विभिन्न चरणों के तहत सुनाई गई सजा और जुर्माने की राशि
न्यायालय द्वारा पारित आदेश के अनुसार, आरोपी युवराज सिंह चौहान को एनडीपीएस अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के तहत कुल 20-20 वर्ष का सश्रम कारावास तथा 2-2 लाख रुपए यानी कुल 4 लाख रुपए का अर्थदंड भुगतना होगा। इसी प्रकार, दूसरे आरोपी वाजिद खान को भी प्रत्येक संबंधित अपराध के तहत 20-20 वर्ष के सश्रम कारावास और कुल 4 लाख रुपए के जुर्माने से दंडित किया गया है। इसके अलावा, तीसरे आरोपी निहाल सिंह को एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत 20 वर्ष के सश्रम कारावास और 2 लाख रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई गई है।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के समीप रायपुर पुलिस द्वारा की गई थी सुनियोजित कार्रवाई
इस पूरे आपराधिक घटनाक्रम की शुरुआत 16 अक्टूबर 2025 को हुई थी, जब रायपुर पुलिस को एक विश्वसनीय मुखबिर के जरिए सूचना प्राप्त हुई कि जी.ई. रोड पर स्थित टाटीबंध क्षेत्र में एम्स के गेट नंबर 4 के पास कुछ संदिग्ध व्यक्ति एक ई-रिक्शा के भीतर प्रतिबंधित नशीली सिरप रखकर संभावित ग्राहकों की तलाश कर रहे हैं। इस गुप्त सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए उप निरीक्षक मिनेश्वर बघेल के नेतृत्व में पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर त्वरित घेराबंदी की और वहां मौजूद युवराज सिंह चौहान तथा वाजिद खान को दबोच लिया।
बरामद की गई प्रतिबंधित कफ सिरप की खेप और पुलिस की वैज्ञानिक जांच प्रक्रिया
पकड़े गए आरोपियों के ई-रिक्शा की पिछली सीट पर रखे एक बैग की तलाशी लेने पर ‘Glankof-T’ ब्रांड की 40 शीशियां बरामद की गईं। प्रत्येक शीशी 100 मिलीलीटर की थी, जिससे कुल 4 लीटर प्रतिबंधित कोडीन सिरप जब्त हुई, जिसकी कुल अनुमानित कीमत 9,200 रुपए आंकी गई। आरोपी मौके पर इस सिरप के क्रय-विक्रय या भंडारण से जुड़ा कोई भी वैध लाइसेंस अथवा चिकित्सकीय दस्तावेज पेश करने में पूरी तरह असमर्थ रहे। पुलिस ने प्रतिबंधित सिरप, वारदात में प्रयुक्त ई-रिक्शा और मोबाइल फोन को जब्त कर 16 अक्टूबर 2025 को मामला पंजीबद्ध कर लिया था।
मुख्य सप्लायर तक पहुंची पुलिस की जांच, विधि विज्ञान प्रयोगशाला से कराई गई पुष्टि
गिरफ्तार आरोपियों युवराज सिंह चौहान और वाजिद खान से की गई कड़ाई से पूछताछ के दौरान यह महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई कि वे यह नशीली खेप चरोदा (जिला दुर्ग) निवासी निहाल सिंह से खरीदकर बिक्री के वास्ते लाए थे। इस अहम सुराग के आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए निहाल सिंह को भी उसी दिन यानी 16 अक्टूबर 2025 को अपनी गिरफ्त में ले लिया। जब्तशुदा सिरप का अदालत के माध्यम से भौतिक सत्यापन व इन्वेंटरी की कार्रवाई पूरी कराने के बाद उसे रायपुर स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) भेजा गया था। वैज्ञानिक परीक्षण में यह स्पष्ट रूप से प्रमाणित हो गया कि उक्त सिरप प्रतिबंधित श्रेणी की है और बिना किसी वैध डॉक्टर के पर्चे के इसका अवैध वितरण या विक्रय पूर्णतः वर्जित है।
त्वरित चार्जशीट और विशेष अदालत द्वारा न्यायहित में सुनाया गया ऐतिहासिक फैसला
आमानाका थाने में इस मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के पश्चात पुलिस अनुसंधान पूरा कर 1 अप्रैल 2026 को अदालत में चालान पेश किया गया था। त्वरित गति से चली न्यायिक प्रक्रिया के उपरांत विशेष न्यायालय ने इस गंभीर अपराध में संलिप्त तीनों दोषियों को कठोरतम सजा सुनाते हुए दो दशकों के आजीवन कारावास के साथ भारी अर्थदंड से दंडित किया है, जो क्षेत्र में अवैध नशीले पदार्थों के कारोबारियों के लिए एक कड़ा संदेश है।