हैदराबाद (तेलंगाना): राजधानी हैदराबाद के ऐतिहासिक गोलकोंडा 18 CD क्षेत्र स्थित लगभग 400 वर्ष पुराने ऐतिहासिक कुतुब शाही मकबरा परिसर में अचानक एक विशाल भूमिगत सुरंग मिलने से हड़कंप मच गया है।
परिसर के स्पोर्ट्स ग्राउंड वाले हिस्से में खुदाई के दौरान इस प्राचीन संरचना के सामने आने के बाद यह मामला सुर्खियों में आ गया है। हालांकि, संरक्षित धरोहर क्षेत्र के भीतर कथित तौर पर गैर-कानूनी तरीके से खुदाई किए जाने के आरोपों को लेकर स्थानीय स्तर पर तीखा विरोध और विवाद भी शुरू हो गया है।
📜 ओवैसी के निर्देश पर ASI से मिले विधायक, एएसआई करेगा स्थल का तकनीकी मुआयना
जनप्रतिनिधियों की पहल और प्रशासनिक प्रक्रिया:
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AIMIM नेतृत्व की पहल: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी के निर्देश पर कारवां विधानसभा क्षेत्र के विधायक कौसर मोहिउद्दीन ने पूरे प्रकरण से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के उच्चाधिकारियों को अवगत कराया।
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अधीक्षक से वार्ता: विधायक ने एएसआई के सुपरिटेंडेंट से मिलकर मौके की स्थिति साझा की।
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एएसआई जांच का आश्वासन: पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि विशेषज्ञों की एक टीम शीघ्र ही घटनास्थल का भौतिक व तकनीकी निरीक्षण करेगी, जिससे यह साफ हो सके कि खुदाई किसके आदेश पर हुई और सुरंग का वास्तविक स्वरूप क्या है।
🛡️ इलाके में स्थापित होगी पुलिस पिकेट, उच्चाधिकारियों को दी गई जानकारी
सुरक्षा और शांति व्यवस्था के उपाय:
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प्रशासनिक तालमेल: विधायक कौसर मोहिउद्दीन ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हैदराबाद जिला कलेक्टर, पुलिस कमिश्नर और साउथवेस्ट जोन के डीसीपी से संपर्क साधा है।
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पुलिस पिकेट की तैनाती: ऐतिहासिक स्थल पर किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना, तोड़फोड़ या तनाव को टालने के लिए मौके पर तत्काल प्रभाव से पुलिस पिकेट स्थापित करने का निर्णय लिया गया है।
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खुदाई पर आरोप: स्थानीय स्तर पर सेना के अधिकारियों द्वारा खुदाई कराए जाने के दावे किए जा रहे हैं, किंतु प्रशासनिक व एएसआई निरीक्षण के बाद ही अधिकृत तथ्य सामने आ सकेंगे।
🔍 इतिहासकारों और नागरिकों में उत्सुकता: कुतुब शाही काल से जुड़े होने की संभावना
ऐतिहासिक महत्व और आगामी अध्ययन:
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प्राचीन विरासत से जुड़ाव: ऐतिहासिक स्मारकों के इतने करीब भूमिगत सुरंग मिलने से पुरातत्वविदों, शोधकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों में भारी कौतूहल देखा जा रहा है।
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संरचना का काल निर्धारण: प्राथमिक तौर पर इसे कुतुब शाही सल्तनत के दौर की वास्तुकला माना जा रहा है, किंतु वैज्ञानिक परीक्षण और दस्तावेजी पुष्टि के बाद ही सुरंग की वास्तविक आयु व बनावट स्पष्ट होगी।
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विस्तृत रिपोर्ट की प्रतीक्षा: एएसआई के निरीक्षण के उपरांत ही यह प्रामाणिक जानकारी मिल सकेगी कि इस सुरंग का सामरिक उपयोग था या यह किसी गुप्त मार्ग अथवा जल निकासी व्यवस्था का हिस्सा थी।