Mangalore MRPL Blast: मंगलुरु रिफाइनरी में भीषण धमाके से कांपे कई इलाके, मौके पर पहुंची SDRF और 5 फायर टेंडर
कर्नाटक के तटीय शहर मंगलुरु स्थित मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (MRPL) परिसर में एक अत्यंत भीषण और शक्तिशाली धमाका हुआ है। यह प्रमुख पेट्रोकेमिकल रिफाइनरी मंगलुरु के जोकट्टे क्षेत्र के समीप स्थित है।
धमाके की तीव्रता इतनी अधिक थी कि इसकी भयावह गूंज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई। विस्फोट के प्रभाव से पनाम्बुर, कावूर, सुरथकल और जोकट्टे सहित आसपास के कई इलाकों में स्थित रिहायशी मकानों में तेज कंपन महसूस किया गया, जिससे स्थानीय निवासियों में भारी दहशत फैल गई और लोग भयभीत होकर घरों से बाहर निकल आए। धमाके के तत्काल बाद रिफाइनरी परिसर और आसपास के आसमान में घने काले धुएं का विशाल गुबार छा गया।
🚒 युद्धस्तर पर राहत व बचाव कार्य: 5 फायर टेंडर, SDRF और एंबुलेंस की गाड़ियां तैनात
हादसे के बाद प्रशासनिक अमले की त्वरित कार्रवाई:
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आपातकालीन अलर्ट: धमाके की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, दमकल विभाग और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और तत्काल आपातकालीन प्रोटोकॉल सक्रिय कर दिया गया।
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फायर टेंडर रवाना: आग पर पूरी तरह नियंत्रण पाने और स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए 5 दमकल गाड़ियों (Fire Tenders) को तुरंत रिफाइनरी परिसर के भीतर भेजा गया।
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एसडीआरएफ की तैनाती: स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की विशेष राहत एवं बचाव टीमों को मौके पर उतारा गया है।
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एंबुलेंस की कतारें: किसी भी संभावित जनहानि को रोकने और झुलसे या घायल कर्मचारियों को त्वरित प्राथमिक उपचार मुहैया कराने के लिए बड़ी संख्या में एंबुलेंस को परिसर के अंदर भेजा गया है।
🚔 पुलिस कमिश्नर सुधीर कुमार रेड्डी खुद मौके पर पहुंचे: घटना के कारणों की गहन पड़ताल जारी
कानून-व्यवस्था और सुरक्षा एजेंसियों की स्थिति:
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अधिकारियों का दौरा: मामले की गंभीरता को देखते हुए मंगलुरु के पुलिस आयुक्त सुधीर कुमार रेड्डी भारी पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और स्वयं मोर्चा संभालते हुए राहत-बचाव अभियानों की निगरानी कर रहे हैं।
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विस्फोट की वजह अस्पष्ट: प्राथमिक तौर पर अभी यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि यह धमाका रिफाइनरी की किस विशेष प्रोसेसिंग यूनिट में हुआ और इसके पीछे की तकनीकी खामी या मुख्य वजह क्या थी।
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नुकसान का आकलन: कंपनी प्रबंधन, तकनीकी विशेषज्ञ और सुरक्षा बल स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में लाने के साथ-साथ संयंत्र को हुए भौतिक नुकसान और संभावित हताहतों का विस्तृत ब्योरा जुटाने में लगे हुए हैं।