Iran Drone Program: ईरान ने UAE की कंपनी के जरिए चीन से खरीदे एडवांस सैटेलाइट उपकरण; FT की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
दुबई/तेहरान: ईरान की खुफिया और सैन्य गतिविधियों को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हड़कंप मचाने वाला खुलासा हुआ है। ईरान की ताकतवर रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की ही एक मुखौटा कंपनी का इस्तेमाल करके चीन से बेहद एडवांस सैटेलाइट उपकरण खरीदे हैं। यह सनसनीखेज दावा ‘फाइनेंशियल टाइम्स’ (FT) की एक खोजी रिपोर्ट में पुख्ता दस्तावेजों के साथ किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इन आधुनिक उपकरणों का सीधा इस्तेमाल ईरान के विवादित ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम को और अधिक सटीक बनाने में किया जाना था।
यह पूरा मामला इसलिए बेहद संवेदनशील और रणनीतिक रूप से गंभीर है, क्योंकि यूएई की जिस स्थानीय कंपनी ने ईरान की आईआरजीसी यूनिट को ये तकनीकी उपकरण गुप्त रूप से पहुंचाने में मदद की, उसी ईरानी सैन्य यूनिट ने बाद में यूएई के क्षेत्रों पर 2800 से ज्यादा आत्मघाती ड्रोन और घातक मिसाइल हमले किए। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 के आखिर में IRGC की एयरोस्पेस फोर्स ने चीन से मिलिट्री ग्रेड सैटेलाइट कम्युनिकेशन उपकरण खरीदे थे। इसके लिए यूएई में मौजूद ‘टेलीसन’ (Telison) नाम की कंपनी का इस्तेमाल किया गया, जो रस अल खैमाह अमीरात में स्थित है। शिपिंग रिकॉर्ड से पता चला है कि कंपनी ने करीब 1.8 टन वजन वाले चीनी सैटेलाइट एंटीना और उससे जुड़े उपकरणों को शंघाई से दुबई और फिर वहां से ईरान पहुंचाने का पूरा इंतजाम किया।
🚢 शंघाई से दुबई होते हुए ईरान पहुंचा था संदिग्ध जहाज: लोकेशन छिपाने के लिए ‘रामा III’ ने भेजे थे गलत GPS सिग्नल्स
वित्तीय और व्यापारिक दस्तावेजों की जांच से पता चला है कि यह संवेदनशील सैन्य सामान पहले चीन के शंघाई शहर से ‘झोंग गू यिन चुआन’ नाम के एक विशाल कंटेनर जहाज में लादकर दुबई के रणनीतिक जेबेल अली पोर्ट पर पहुंचाया गया। इसके बाद, वहां से ईरान के एक विवादित मालवाहक जहाज ‘रामा III’ (Rama III) ने इस पूरे कार्गो को उठाया और सीधे ईरान के बंदर अब्बास पोर्ट तक पहुंचाया। फाइनेंशियल टाइम्स के इस बड़े इन्वेस्टिगेशन में यह भी सामने आया है कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और खुफिया एजेंसियों से बचने के लिए रामा III जहाज ने समुद्र में अपनी असली लोकेशन छिपाने की शातिर कोशिश की थी।
जहाज ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री ट्रैकिंग सिस्टम को धोखा देने के लिए जानबूझकर गलत और फेक जीपीएस (GPS) सिग्नल भेजे ताकि दूसरे जहाजों और वैश्विक निगरानी सिस्टम को लगे कि वह किसी और सुरक्षित जगह पर खड़ा है। लेकिन आधुनिक सैटेलाइट तस्वीरों (Satellite Imagery) से इस झूठ का पर्दाफाश हो गया कि जहाज वास्तव में तीव्र गति से ईरान की समुद्री सीमा की तरफ ही जा रहा था। गत 29 नवंबर को इसी जहाज जैसा एक शिप ईरान के शाहिद रजाई पोर्ट पर सीधे देखा गया था, और खुफिया रिपोर्टों के अनुसार यही वह मुख्य जगह थी जहां इस सैन्य सामान की डिलीवरी की जानी थी।
📦 6 भारी बॉक्स में पैक थे चीनी सैटेलाइट डिवाइस: अमेरिकी प्रतिबंधों की सूची में शामिल ‘समान ग्रुप’ से जुड़े हैं तार
कस्टम और शिपिंग रिकॉर्ड के बारीक अध्ययन के मुताबिक, इस गोपनीय शिपमेंट को कागजों पर केवल ‘एंटीना और सामान्य एक्सेसरीज’ बताया गया था ताकि किसी को शक न हो। इसका कुल वजन लगभग 1.8 टन था और इसे मजबूत छह बड़े बॉक्स में पैक किया गया था। यह सामान मुख्य रूप से ईरान की कंपनी ‘एरतेबातात फरागोस्टर किश’ (EFK) के पते पर भेजा गया था। एफटी (FT) की रिपोर्ट के मुताबिक, यूएई की टेलीसन कंपनी ने इन चीनी उपकरणों को सीधे ईएफके की तरफ से ही डील करके खरीदा था।
ईएफके वास्तव में एक ईरानी टेलीकॉम कंपनी है, जो परदे के पीछे से ईरान के कुख्यात ‘समान इंडस्ट्रियल ग्रुप’ (Saman Industrial Group) के लिए काम कर रही थी। मालूम हो कि अमेरिका ने साल 2023 में ही समान ग्रुप पर गंभीर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध (Sanctions) लगाए थे। वाशिंगटन का सीधा आरोप है कि यह ग्रुप आईआरजीसी (IRGC) की एयरोस्पेस फोर्स के लिए मिसाइल, ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (इलेक्ट्रॉनिक युद्ध) प्रोग्राम का प्रबंधन करता है। हालांकि, तकनीकी चालाकी के कारण फ्रंट पर काम करने वाली ईएफके कंपनी पर अभी तक कोई सीधा पश्चिमी प्रतिबंध नहीं है, जिसका फायदा इस नेटवर्क ने उठाया।
🚫 ईरान की सैन्य मदद करने पर अमेरिका सख्त: चीनी सैटेलाइट कंपनी ‘द अर्थ आई’ पर भी लगाया जा चुका है बैन
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय और खुफिया एजेंसियों का यह भी कहना है कि प्रतिबंधों के बावजूद समान ग्रुप ने दुनिया के अलग-अलग देशों में मौजूद अपनी मुखौटा कंपनियों के जाल के जरिए ड्रोन से जुड़े महत्वपूर्ण उपकरण खरीदे हैं, जिनमें हाई-गेम एंटीना, सर्वोमोटर और दूसरे एडवांस्ड यूएवी (UAV) कलपुर्जे शामिल हैं। पिछले महीने ही फाइनेंशियल टाइम्स में छपी एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया था कि IRGC ने एक अन्य चीनी कंपनी ‘द अर्थ आई’ (The Earth Eye) से एक जासूसी सैटेलाइट भी हासिल किया था।
इस सैटेलाइट का इस्तेमाल मध्य पूर्व और खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों तथा वहां के महत्वपूर्ण तेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर नजर रखने के लिए किया जा रहा था। इस खुफिया इनपुट के तुरंत बाद अमेरिका ने सख्त कदम उठाते हुए ‘द अर्थ आई’ कंपनी पर भी कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए। व्हाइट हाउस ने बीजिंग को साफ चेतावनी देते हुए कहा है कि चीन की सरकारी या निजी कंपनियां अगर ईरान की सैन्य क्षमता बढ़ाने या प्रतिबंधों को दरकिनार करने में मदद करेंगी, तो उनके खिलाफ अमेरिका की दंडात्मक कार्रवाई और ब्लैकलिस्टिंग का सिलसिला लगातार जारी रहेगा।