Haryana Petrol Pump Association: प्रति लीटर कमाई से ज्यादा चार्ज, जानिए क्यों यूपीआई पेमेंट का विरोध कर रहे हैं पेट्रोल पंप मालिक
हरियाणा में पेट्रोल-पंप संचालकों ने यूपीआई और अन्य डिजिटल पेमेंट ट्रांजैक्शन पर लगने वाले अतिरिक्त शुल्कों के खिलाफ सरकार और बैंकों के विरुद्ध कड़ा रुख अपना लिया है. पंप संचालकों का साफ कहना है कि यदि यूपीआई ट्रांजैक्शन पर 5 रुपये का चार्ज (एमडीआर – मर्चेंट डिस्काउंट रेट) अनिवार्य रूप से लागू किया जाता है, तो इससे उनका पूरा कारोबार बुरी तरह प्रभावित होगा और वे पेट्रोल पंपों पर कैशलेस पेमेंट की सुविधा पूरी तरह बंद करने के लिए मजबूर हो जाएंगे.
💸 2. प्रति लीटर सिर्फ 2 से 3 रुपये की बचत पर 5 रुपये का चार्ज थोपना मुनाफे के खिलाफ, जेब से नुकसान उठाने को मजबूर संचालक
पेट्रोल पंप मालिकों का तर्क है कि मौजूदा समय में उन्हें प्रति लीटर पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर मात्र 2 से 3 रुपये का ही कमीशन (बचत) मिल पाती है. ऐसे में यदि हर एक डिजिटल ट्रांजैक्शन पर बैंक या सरकार द्वारा 5 रुपये का अतिरिक्त चार्ज थोप दिया जाता है, तो उनका सारा मुनाफा तो शून्य हो जाएगा ही, बल्कि उन्हें अपनी जेब से आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा. संचालकों ने दो टूक कह दिया है कि जब तक इस फैसले को वापस नहीं लिया जाता, वे इस भारी बोझ को उठाने में असमर्थ हैं.
🛍️ 3. डिजिटल इंडिया के दौर में फिर लौट सकती है कैशलेस संकट की समस्या, उपभोक्ताओं को खुले पैसों के लिए होना पड़ेगा परेशान
एक तरफ जहां देश भर में डिजिटल ट्रांजैक्शन और कैशलेस व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है, वहीं पेट्रोल पंपों पर इस तरह के शुल्कों के विरोध से आम जनता की मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं. यदि पंप संचालकों ने वाकई डिजिटल पेमेंट लेना बंद कर दिया, तो उपभोक्ताओं को एक बार फिर से खुले पैसों (चेंज) और नकदी की किल्लत से जूझना पड़ेगा. फिलहाल, पंप एसोसिएशन की इस कड़ी चेतावनी के बाद प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है और सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि आगे क्या फैसला लिया जाता है.