हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की 13 अगस्त तक हड़ताल के ऐलान के बीच मंत्री अनिल विज के साथ आपात बैठक शुरू
चंडीगढ़: हरियाणा में विद्युत व्यवस्था और आम जनता को निर्बाध बिजली आपूर्ति बनाए रखने हेतु राज्य शासन एवं बिजली कर्मचारियों के मध्य प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। राज्य के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज की अध्यक्षता में चंडीगढ़ में हरियाणा बिजली कर्मचारियों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों और यूनियन नेताओं के साथ एक उच्चस्तरीय आपात बैठक प्रारंभ हो गई है। इस महत्वपूर्ण वार्ता में विद्युत विभाग के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी एवं डिस्कॉम्स के प्रबंध निदेशक (MDs) भी उपस्थित हैं। उल्लेखनीय है कि अपनी मांगों को लेकर बिजली कर्मचारियों की यूनियनों ने आज रात्रि से 13 अगस्त तक प्रदेशव्यापी हड़ताल और कार्य बहिष्कार का औपचारिक ऐलान किया है।
⚡ पैरेलल लाइसेंसिंग, एग्री डिस्कॉम और स्मार्ट मीटरिंग समेत ज्वलंत मांगों पर अनिल विज संग जारी है वार्ता
विद्युत निगमों के निजीकरण की आशंकाओं और नीतिगत बदलावों को लेकर हरियाणा बिजली कर्मचारी महासंघ व यूनियनों की ओर से यह वार्ता आयोजित की जा रही है।
बैठक के प्रमुख एजेंडे में निजी कंपनियों को पैरेलल लाइसेंसिंग देने का विरोध, एग्रीकल्चरल डिस्कॉम (Agri Discom) की स्थापना तथा पूरे राज्य में तेजी से लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर्स की नीति पर कर्मचारियों की आपत्तियां शामिल हैं। कर्मचारी यूनियनों का तर्क है कि इन नीतियों से जहां एक ओर आम उपभोक्ताओं पर वित्तीय भार बढ़ेगा, वहीं दूसरी ओर सार्वजनिक विद्युत क्षेत्र का अस्तित्व संकट में आ जाएगा।
👷 ठेका कर्मियों को पक्का करने, समान काम-समान वेतन और जोखिम भत्ते की मांगों पर फंसा पेंच
नीतिगत मुद्दों के साथ-साथ आउटसोर्सिंग एवं अनुबंध (ठेका) प्रथा के अंतर्गत कार्यरत हजारों कर्मचारियों के सेवा हितों से जुड़ी मांगों पर भी अनिल विज विस्तार से चर्चा कर रहे हैं।
कर्मचारियों की मुख्य मांगों में विगत कई वर्षों से कार्यरत ठेका कर्मचारियों को नियमित (पक्का) करना, ‘समान काम के लिए समान वेतन’ (Equal Pay for Equal Work) का सिद्धांत लागू करना, जान जोखिम में डालकर काम करने वाले लाइनमैन व फील्ड स्टाफ के लिए जोखिम भत्ता (Hazard Allowance) स्वीकृत करना शामिल है। इसके अतिरिक्त, एक्स-ग्रेशिया रोजगार योजना में लगाई गई कड़ी शर्तों को हटाने एवं मृत कर्मचारियों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति देने जैसे मानवीय विषयों पर भी टेबल वार्ता में सहमति बनाने का प्रयास किया जा रहा है।