इंदौर नगर निगम के फर्जी बिल घोटाले में ED का बड़ा एक्शन, PMLA कोर्ट में 20 हजार पेज की चार्जशीट दायर
इंदौर (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के बहुचर्चित इंदौर नगर निगम (IMC) फर्जी बिल घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने विशेष PMLA कोर्ट में 20,000 पेजों की विशाल चार्जशीट पेश की है। ED की गहन जांच के बाद इस घोटाले की कुल राशि 90 करोड़ रुपये से बढ़कर अब सीधे 103 करोड़ 42 लाख रुपये तक पहुंच गई है।
प्रवर्तन निदेशालय ने मामले में कुल 32 आरोपियों के खिलाफ अभियोजन परिवाद (प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट) दायर किया है। नामजद आरोपियों में नगर निगम के भ्रष्ट अधिकारी, स्थानीय निधि लेखा एवं रेजिडेंट ऑडिट कार्यालय के कर्मचारी, ठेकेदार और अन्य निजी बिचौलिए शामिल हैं। इन सभी पर मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) के जरिए सरकारी खजाने के धन का गबन करने, छुपाने और निजी इस्तेमाल में ठिकाने लगाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
🏦 ₹59.18 करोड़ की चल-अचल संपत्तियां जब्त व अटैच, MP और UP में फैले हैं 52 प्लॉट व मकान
ED ने अपनी दाखिल चार्जशीट में कोर्ट को सूचित किया कि 5 और 6 अगस्त 2024 को आरोपियों के 20 अलग-अलग ठिकानों पर मारे गए छापों के दौरान 22.04 करोड़ रुपये की चल संपत्तियों को फ्रीज किया गया था। इसमें भारी नकदी, चालू बैंक खाते, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), डीमैट खाते और म्यूचुअल फंड में निवेश शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, ED ने आरोपियों की 52 अचल संपत्तियों को भी प्रोविजनली कुर्क (Attach) किया है, जिनकी बाजार दर पर कीमत 37.14 करोड़ रुपये आंकी गई है। इनमें मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों में स्थित आलीशान मकान, व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स, भूखंड (प्लॉट्स) और कीमती कृषि भूमि शामिल हैं। मामले में अब तक ED द्वारा कुल 59.18 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त, फ्रीज या अटैच की जा चुकी हैं।
⚖️ ED ने कोर्ट से मांगी संपत्तियां राजसात करने की मंजूरी, एमजी रोड थाने की FIR से शुरू हुई थी जांच
ED ने विशेष PMLA अदालत से इन सभी अटैच की गई कुर्क संपत्तियों को स्थायी रूप से राजसात (जब्त) करने की आधिकारिक मांग की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष PMLA कोर्ट ने सभी 32 आरोपियों को समन जारी कर अगली सुनवाई की तारीख तय कर दी है।
उल्लेखनीय है कि ED ने अपनी यह जांच इंदौर के एमजी रोड थाने में दर्ज कई प्राथमिकियों (FIRs) के आधार पर शुरू की थी। जांच में पाया गया कि जिन ड्रेनेज, सड़क और निर्माण कार्यों के नाम पर करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया, वे कार्य या तो धरातल पर हुए ही नहीं थे या सालों पहले ही पूरे हो चुके थे।
🏗️ अभय राठौर, मोहम्मद जाकिर और राहुल वडेरा निकले घोटाले के मास्टरमाइंड, फर्जी वर्क ऑर्डर से बांटे पैसे
ED ने अपनी चार्जशीट में खुलासा किया है कि इस पूरे 103 करोड़ के सिंडिकेट घोटाले के मुख्य मास्टरमाइंड इंदौर नगर निगम के पूर्व सहायक यंत्री अभय सिंह राठौर, ठेकेदार मोहम्मद जाकिर और राहुल वडेरा थे।
कई आरोपी ठेकेदार कंपनियों ने नगर निगम के अधिकारियों के साथ मिलकर सांठगांठ की और फर्जी वर्क ऑर्डर फाइलें व जाली बिल तैयार किए। इसके बाद निगम के सरकारी खाते से 103 करोड़ 42 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि अपने फर्जी खातों में ट्रांसफर कराई और आपस में बांट ली। बिजनेस ट्रांजैक्शन की आड़ में यह काली कमाई अन्य शैल कंपनियों और संस्थाओं में घुमाई गई, जिससे अवैध अचल संपत्तियां खरीदी गईं और निजी ऐशो-आराम में इस राशि का इस्तेमाल किया गया।