क्या भागलपुर में प्रशासन को खुली चुनौती दी जा रही है? क्या यह किसी बड़े षड्यंत्र की आहट है या फिर सिर्फ दहशत फैलाने की साजिश? जिलाधिकारी के आधिकारिक मेल पर आए धमकी भरे संदेश ने पूरे समाहरणालय को सकते में डाल दिया. मेल में दावा किया गया कि डीएम के चेंबर के पास 5 आरडीएक्स लगाए गए हैं और रिमोट कंट्रोल के साथ सदस्य मौके पर मौजूद हैं.
साथ ही मेल भेजने वाले ने खुद को तमिल टाइगर्स ऑफ ईलम और पाकिस्तान की आईएसआई से जुड़ा बताते हुए तमिलनाडु से जुड़ी विवादित मांगों का भी जिक्र किया. धमकी देने वाले ने अभिनेता एस. वी. शेखर स्ट्रीट का नाम पेरियार अंबेडकर स्ट्रीट रखने और ईडब्ल्यूएस आरक्षण को तमिलनाडु में रोकने की मांग की.
धमकी मिलते ही प्रशासन ने कलेक्ट्रेट परिसर को खाली कराकर सुरक्षा घेरा बना दिया. बम निरोधक दस्ते और सुरक्षा एजेंसियों ने घंटों तक सघन तलाशी अभियान चलाया, लेकिन कहीं भी कोई विस्फोटक नहीं मिला. इसके बावजूद पूरे दिन कलेक्ट्रेट में कामकाज पूरी तरह ठप रहा और आम लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई.
सबसे बड़ा सवाल यह है कि बार-बार धमकी भरे मेल भेजने वाले आखिर कौन हैं? पुलिस की साइबर टीम जांच में जुटी है, लेकिन अब तक कोई ठोस सुराग नहीं मिल पाया है. एसपी सिटी का कहना है कि साइबर सेल पूरी तरह सक्रिय है और मेल भेजने वालों की पहचान करने की कोशिश जारी है.
गौर करने वाली बात यह भी है कि इससे पहले 28 जनवरी और 9 फरवरी को भी सिविल कोर्ट को उड़ाने की धमकी दी जा चुकी है और अब 17 फरवरी को कलेक्ट्रेट को निशाना बनाया गया.
लगातार मिल रही इन धमकियों ने सुरक्षा व्यवस्था, साइबर निगरानी और खुफिया तंत्र की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. आखिर प्रशासन को चुनौती देने वाले इन मेल्स के पीछे कौन है और कब तक यूं ही दहशत फैलती रहेगी?
