दंतेवाड़ा में बस्तर फाइटर्स के कम पदों को लेकर युवाओं में निराशा, एसपी से मिलकर पदों की संख्या बढ़ाने की उठाई मांग
दंतेवाड़ा: बस्तर फाइटर्स भर्ती के अंतर्गत दंतेवाड़ा जिले को बस्तर संभाग के अन्य जिलों के मुकाबले काफी कम पद आवंटित किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। भर्ती में पदों की संख्या बेहद कम मिलने के कारण जिले के तमाम युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों में गहरी निराशा का माहौल है। लंबे समय से पुलिस और सुरक्षा बलों का हिस्सा बनकर देश-सेवा का सपना संजोने वाले और इसके लिए दिन-रात कठिन मेहनत कर रहे युवाओं के भविष्य को लेकर अब स्थानीय स्तर पर खुलकर आवाज बुलंद होने लगी है।
अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस अधीक्षक चंद्रमोहन सिंह से की मुलाकात, शासन स्तर पर हस्तक्षेप की लगाई गुहार
इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर युवाओं और अभ्यर्थियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने दंतेवाड़ा के पुलिस अधीक्षक (SP) चंद्रमोहन सिंह से प्रत्यक्ष मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने बस्तर फाइटर्स भर्ती प्रक्रिया के तहत दंतेवाड़ा जिले के लिए निर्धारित पदों की संख्या में तत्काल वृद्धि किए जाने की पुरजोर मांग रखी। इसके साथ ही प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश के मुख्यमंत्री, गृह मंत्री, बस्तर लोकसभा क्षेत्र के सांसद तथा स्थानीय विधानसभा क्षेत्र के विधायकों से भी इस मामले में व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करने और शासन स्तर पर आवश्यक सकारात्मक पहल करने की अपील की है।
अन्य जिलों की तुलना में दंतेवाड़ा में निकाले गए हैं काफी कम पद, सुकमा और बीजापुर के मुकाबले स्थिति बेहद सीमित
प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, बस्तर फाइटर्स भर्ती प्रक्रिया के तहत दंतेवाड़ा जिले में केवल 128 पदों पर ही विज्ञापन निकाला गया है। इसके विपरीत, संभाग के अन्य जिलों में पदों की संख्या काफी अधिक है; जैसे कि सुकमा में 375, बीजापुर में 417, नारायणपुर में 389 और कांकेर में 125 पद आरक्षित किए गए हैं। दंतेवाड़ा के युवाओं का कहना है कि क्षेत्रफल और संवेदनशीलता के लिहाज से यहां पदों की संख्या कम होना न्यायसंगत नहीं है।
संवेदनशील और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों वाले जिले के युवाओं के लिए सीमित हो सकते हैं रोजगार के अवसर
प्रतिनिधिमंडल का स्पष्ट रूप से यह तर्क है कि दंतेवाड़ा जैसे अति-संवेदनशील और दुर्गम भौगोलिक चुनौतियों वाले जिले में स्थानीय युवाओं की सुरक्षा बलों में अधिक से अधिक भागीदारी होना बेहद महत्वपूर्ण है। यहां के युवा बेहद कठिन और प्रतिकूल परिस्थितियों में रहकर अपनी तैयारी पूरी करते हैं। ऐसे में यदि जिले को संभाग के बाकी जिलों की तुलना में काफी कम पद मिलते हैं, तो यहां के योग्य और मेहनती अभ्यर्थियों के लिए प्रतिस्पर्धा जरूरत से ज्यादा कठिन हो जाएगी और उनके हाथ से अवसर निकल सकते हैं।
शासन और प्रशासन के समक्ष रखी गई चार प्रमुख मांगें, न्यायसंगत तरीके से अतिरिक्त पद स्वीकृत करने का आग्रह
दंतेवाड़ा के युवाओं और अभ्यर्थियों ने शासन-प्रशासन के सामने अपनी चार प्रमुख मांगें रखी हैं:
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बस्तर फाइटर्स भर्ती में दंतेवाड़ा जिले को आवंटित किए गए कुल पदों की संख्या की पुनः समीक्षा कराई जाए।
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संभाग के अन्य जिलों के अनुपात और परिस्थितियों के अनुरूप दंतेवाड़ा को भी उचित एवं न्यायसंगत पद दिए जाएं।
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जिले के स्थानीय, मेहनती और योग्य युवाओं के व्यापक हित में तुरंत अतिरिक्त पदों की स्वीकृति प्रदान की जाए।
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प्रतिनिधिमंडल ने आग्रह किया है कि शासन स्तर पर इस गंभीर विषय को पूरी संवेदनशीलता के साथ लिया जाए।
पुलिस अधीक्षक चंद्रमोहन सिंह ने दिया सकारात्मक आश्वासन, कहा— उच्च अधिकारियों तक पहुंचाई जाएगी युवाओं की यह मांग
अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमंडल की बात को बहुत ध्यान से सुनने के बाद पुलिस अधीक्षक चंद्रमोहन सिंह ने उन्हें पूरा भरोसा दिलाया कि उनकी इन सभी मांगों और चिंताओं को उच्च प्रशासनिक अधिकारियों तक विधिवत पहुंचाया जाएगा। एसपी ने स्पष्ट किया कि सामान्यतः इस तरह की भर्ती प्रक्रियाएं जिलों की कुल जनसंख्या के आधार पर निर्धारित की जाती हैं, जो पुलिस प्रशासन के स्तर का निर्णय नहीं होता है, फिर भी युवाओं की इस न्यायसंगत मांग को शासन तक जरूर अग्रेषित किया जाएगा।