Dhar Bhojshala: भोजशाला पहुंचने वाले पहले मुख्यमंत्री बने डॉ. मोहन यादव; मां वाग्देवी की पूजा कर यज्ञ में दी आहुति
धार: मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और बहुचर्चित भोजशाला सोमवार को एक ऐतिहासिक क्षण की साक्षी बनी, जब प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव दोपहर करीब 1:30 बजे धार स्थित भोजशाला परिसर पहुंचे। यहाँ उन्होंने मां वाग्देवी (देवी सरस्वती) के दर्शन कर पूरी श्रद्धा के साथ विधिवत पूजा-अर्चना की। मध्यप्रदेश के राजनीतिक इतिहास में मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए भोजशाला की चौखट पर पहुंचने वाले वे प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री बन गए हैं, जिसने इस दौरे को बेहद खास बना दिया है।
मुख्यमंत्री के इस गरिमामयी आगमन को लेकर धार शहर में सुबह से ही जबरदस्त उत्साह और कौतूहल का माहौल देखा गया। शहर के विभिन्न प्रमुख चौराहों और हिस्सों में भव्य स्वागत मंच बनाए गए थे और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मुख्यमंत्री के दीदार और स्वागत के लिए सड़कों पर जमा थे। मई की इस भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप के बावजूद हजारों श्रद्धालुओं, महिलाओं और समर्थकों ने “जय श्री राम” और “जय मां सरस्वती” के गगनभेदी जयकारों के साथ मुख्यमंत्री का आत्मीय अभिनंदन किया।
🔥 मां सरस्वती की विशेष आराधना और मंत्रोच्चार: मुख्यमंत्री ने हवन कुंड में दी आहुति, ‘जय मां वाग्देवी’ के उद्घोष से गूंजा परिसर
इस वीआईपी मूवमेंट के मद्देनजर भोजशाला परिसर को विशेष रूप से फूलों और ध्वज से सजाया गया था। मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए मुख्य द्वार से लेकर गर्भगृह तक रेड कारपेट बिछाया गया था और पारंपरिक वाद्य यंत्रों व तिलक लगाकर उनका सनातनी अभिनंदन किया गया। इसके बाद डॉ. मोहन यादव ने गर्भगृह में स्थापित मां वाग्देवी की तैलचित्र/प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर विशेष पूजा-अर्चना की और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना करते हुए श्रद्धापूर्वक नमन किया।
दर्शन के उपरांत मुख्यमंत्री परिसर में निर्मित विशेष हवन कुंड तक पहुंचे और प्रकांड विद्वानों व पंडितों के वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पवित्र यज्ञ में आहुति दी। आहुति के दौरान “जय मां सरस्वती” के सामूहिक उद्घोष से पूरा भोजशाला परिसर गुंजायमान हो उठा। वहां उपस्थित आम श्रद्धालुओं ने इसे एक लंबे संघर्ष और समय के बाद आया बेहद भावुक और ऐतिहासिक अवसर बताया।
⚖️ हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के फैसले के बाद बढ़ा दौरा: वर्षभर पूजा-अर्चना की अनुमति मिलने के बाद पहला बड़ा राजनीतिक कदम
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का यह धार दौरा रणनीतिक और सांस्कृतिक रूप से इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि बीते 15 मई को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ द्वारा दिए गए एक युगांतरकारी निर्णय के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) विभाग ने हिंदू पक्ष को वर्षभर नियमित पूजा-अर्चना करने की सशर्त अनुमति प्रदान की है।
इस ऐतिहासिक न्यायिक फैसले के तुरंत बाद पहली बार सूबे के किसी मुख्यमंत्री का सीधे भोजशाला पहुंचना राजनीतिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बहुत बड़े संकेत दे रहा है। राजनीतिक विश्लेषक इसे राज्य की भाजपा सरकार की सांस्कृतिक विरासत के प्रति गंभीरता, दृढ़ इच्छाशक्ति और प्रतिबद्धता से भी सीधे जोड़कर देख रहे हैं।
🇬🇧 लंदन से मां वाग्देवी की मूल प्रतिमा वापस लाने की मांग फिर तेज: राष्ट्रीय स्तर पर दोबारा सुर्खियों में आया भोजशाला मुद्दा
मुख्यमंत्री के इस हाई-प्रोफाइल दौरे के बाद भोजशाला से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे विवाद और पुरातात्विक मुद्दे एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर मुख्यधारा की चर्चाओं में आ गए हैं। इस दौरे से उत्साहित स्थानीय श्रद्धालुओं और विभिन्न हिंदू संगठनों को अब यह बड़ी उम्मीद जगी है कि राज्य सरकार भविष्य में भोजशाला के जीर्णोद्धार और इसके ऐतिहासिक स्वरूप को लेकर कुछ बड़े और कड़े नीतिगत फैसले ले सकती है।
विशेष रूप से, ब्रिटिश काल के दौरान लंदन के संग्रहालय (Museum) में ले जाकर संरक्षित की गई मां वाग्देवी की मूल और अति प्राचीन वास्तुकला प्रतिमा को वापस भारत लाने की कानूनी मांग एक बार फिर बहुत तेज हो गई है। स्थानीय प्रबुद्ध जनों को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री इस अंतरराष्ट्रीय विषय पर केंद्र सरकार से वार्ता कर किसी विशेष पहल की घोषणा कर सकते हैं।
🏛️ ‘सरस्वती लोक’ और भव्य धार्मिक कॉरिडोर निर्माण को लेकर जगी उम्मीदें: धार में दिखा दिवाली जैसा उत्सवी माहौल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के इस दौरे के दौरान भोजशाला परिसर में उज्जैन के महाकाल लोक की तर्ज पर ही “सरस्वती लोक” के निर्माण और एक विशाल धार्मिक-सांस्कृतिक कॉरिडोर विकसित करने को लेकर भी प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के बीच चर्चाएं काफी तेज रहीं। श्रद्धालुओं और स्थानीय सामाजिक संगठनों का दृढ़ मानना है कि यदि राज्य सरकार इस दिशा में बजट आवंटित कर गंभीर पहल करती है, तो केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्तर पर भी लंदन से मां वाग्देवी की प्रतिमा वापसी का कूटनीतिक मार्ग बेहद प्रशस्त और सुगम हो सकता है।
इस ऐतिहासिक यात्रा के समापन के बाद भी पूरे धार शहर में देर रात तक दिवाली जैसा उत्सवी माहौल दिखाई दिया, घरों पर दीपक जलाए गए और लोगों में इसे लेकर खास उत्साह नजर आया। कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री के इस औचक दौरे को भोजशाला के इतिहास और आंदोलन में एक नया व बेहद महत्वपूर्ण अध्याय माना जा रहा है।