Chhindwara Cough Syrup Case: 20 से ज्यादा बच्चों की मौत के मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला; आरोपी डॉक्टर की जमानत खारिज
जबलपुर: छिंदवाड़ा में हुए बहुचर्चित जहरीले कफ सिरप कांड, जिसमें 20 से अधिक बच्चों की जान गई थी, को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने आरोपी डॉ. एस.एस. ठाकुर की जमानत याचिका को खारिज करते हुए कहा कि यह मामला अत्यंत गंभीर है और लोगों की सुरक्षा के प्रति घोर लापरवाही का प्रतीक है।
🚫 अदालत की टिप्पणी: प्रतिबंध के बाद भी दी प्रतिबंधित दवा
कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार द्वारा 4 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए विशेष दवा पर प्रतिबंध और चेतावनी के बावजूद, आरोपी ने वही ‘निश्चित खुराक वाला कंपाउंड’ बच्चों को प्रिस्क्राइब किया। कोर्ट ने कहा कि इसी लापरवाही के कारण कई मासूमों को अपनी जान गंवानी पड़ी।
🩺 आरोपी डॉक्टर के तर्क और सरकार का विरोध
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डॉक्टर का बचाव: आरोपी डॉक्टर का कहना था कि वह 45 वर्षों से सेवा दे रहे हैं और उन्हें सिरप में डायथिलीन ग्लाइकोल जैसी मिलावट की कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने दावा किया कि उनका दवा निर्माता या वितरकों से कोई संबंध नहीं है और उन्होंने ‘अच्छे इरादे’ से दवा लिखी थी।
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सरकार का पक्ष: सरकारी वकील ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि प्रतिबंधित दवा लिखना डॉक्टर की संवेदनहीनता और लापरवाही दर्शाता है। सरकार ने तर्क दिया कि यदि ऐसे गंभीर मामले में आरोपी को जमानत दी जाती है, तो न्याय व्यवस्था और चिकित्सा प्रणाली से लोगों का भरोसा उठ जाएगा।
🔍 क्या था मामला?
जांच में यह तथ्य सामने आया था कि ‘कोल्ड्रिफ़’ (Coldrife) कफ सिरप में घातक रसायन ‘डायथिलीन ग्लाइकोल’ मौजूद था। डॉक्टर पर आरोप है कि उन्होंने कई बच्चों का इलाज किया और इनमें से चार बच्चों की मृत्यु हो गई। चार्जशीट के अनुसार, आरोपी डॉक्टर की भूमिका बेहद संवेदनशील है, जिसे देखते हुए अदालत ने राहत देने से इनकार कर दिया।