रायबरेली के बहुचर्चित आदित्य हत्याकांड में बड़ा फैसला: पूर्व सपा जिलाध्यक्ष आरपी यादव और ढाबा मालिक समेत 14 को उम्रकैद
रायबरेली (उत्तर प्रदेश): जिले के बहुचर्चित आदित्य हत्याकांड में जिला जज की अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 14 दोषियों को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की कठोर सजा सुनाई है।
अदालत ने समाजवादी पार्टी (सपा) के पूर्व जिलाध्यक्ष एवं पूर्व विधानसभा प्रत्याशी आरपी यादव और सोमू ढाबा के संचालक सुरेश यादव सहित कुल 14 अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए सजा मुकर्रर की। वहीं, पर्याप्त साक्ष्यों के अभाव में अदालत ने दो आरोपियों को बाइज्जत बरी (दोषमुक्त) कर दिया है।
📅 साल 2019 में हुई थी सनसनीखेज वारदात, 13 गवाहों की गवाही के बाद आया फैसला
यह पूरा प्रकरण वर्ष 2019 का है, जिसने समूचे क्षेत्र में भारी सनसनी फैला दी थी:
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लंबी अदालती सुनवाई: आदित्य हत्याकांड की पुलिस विवेचना के बाद मामला न्यायालय पहुंचा, जहां दोनों पक्षों की दलीलें वर्षों तक सुनी गईं।
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13 गवाह पेश: अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में कुल 13 प्रमुख गवाहों को पेश किया गया।
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दोष सिद्ध: पेश किए गए साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और चिकित्सकीय रिपोर्ट के आधार पर अदालत ने 14 आरोपियों को हत्या व साजिश का दोषी पाया।
🚨 सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष आरपी यादव और सुरेश यादव समेत 14 भेजे गए जेल, कोर्ट परिसर में कड़ी सुरक्षा
फैसला सुनाए जाने के दौरान जिला न्यायालय परिसर में सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए थे:
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दोषियों में रसूखदार शामिल: सजा पाने वालों में प्रमुख रूप से सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष आरपी यादव और सोमू ढाबा के मालिक सुरेश यादव शामिल हैं।
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जेल भेजा गया: फैसला आने के तुरंत बाद पुलिस बल ने सभी 14 दोषियों को अपनी हिरासत में लेकर भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच जिला कारागार भेज दिया।
📜 2 आरोपी साक्ष्यों के अभाव में बरी, आरपी यादव ने लगाया राजनीतिक साजिश का आरोप
अदालत के फैसले के बाद मामले में नया सियासी मोड़ भी सामने आया है:
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दो को मिली राहत: मामले में शामिल दो अन्य आरोपियों को पर्याप्त और ठोस सबूत न मिलने के चलते अदालत ने दोषमुक्त करार दिया।
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हाईकोर्ट में अपील की तैयारी: सजा सुनाए जाने के बाद आरपी यादव ने इसे राजनीतिक साजिश करार देते हुए कहा कि वह स्थानीय विधायक और एमएलसी के षड्यंत्र का शिकार हुए हैं।
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अदालत पर भरोसा: उन्होंने कहा कि उन्हें उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) पर पूरा भरोसा है, जहां वे इस फैसले को जल्द चुनौती देंगे और बाहर आकर चुनाव लड़ेंगे।