सावन में आस्था और प्रकृति का अद्भुत संगम: एमसीबी का कर्मघोंघेश्वर धाम व जलप्रपात, जानें क्यों उमड़ते हैं हजारों श्रद्धालु
मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (छत्तीसगढ़): पवित्र सावन मास का शुभारंभ होते ही छत्तीसगढ़ के एमसीबी (MCB) जिले अंतर्गत ग्राम साल्ही स्थित ‘कर्मघोंघेश्वर धाम’ अगाध आस्था और अनुपम प्राकृतिक सौंदर्य का प्रमुख केंद्र बन जाता है।
यहाँ एक ओर जहाँ भगवान शिव का अति-प्राचीन मंदिर स्थापित है, वहीं दूसरी ओर उत्तुंग पहाड़ियों के बीच से प्रवाहित होता मनमोहक कर्मघोंघा जलप्रपात दर्शनीय दृश्य निर्मित करता है। प्रतिवर्ष सावन के महीने में हजारों श्रद्धालु एवं पर्यटक यहाँ पहुँचकर जलाभिषेक के साथ-साथ प्रकृति की सुंदर छटा का आनंद उठाते हैं।
🌊 पहाड़ों से गिरता कर्मघोंघा जलप्रपात, सुनहरी नदी का पानी बिखेर रहा अलौकिक सौंदर्य
ग्राम साल्ही स्थित कर्मघोंघा जलप्रपात अपनी अद्भुत प्राकृतिक नयनाभिराम छटा के लिए प्रसिद्ध है।
छिंदवाड़ा व मध्यप्रदेश की दिशा से प्रवाहित होकर आने वाली सुनहरी नदी की तीव्र जलधारा जब विशालकाय चट्टानों से नीचे गिरती है, तो एक मनमोहक झरने का रूप धारण कर लेती है। वर्षा ऋतु के दौरान यह झरना और भी विकराल तथा आकर्षक रूप ले लेता है। चारों ओर फैली सघन हरियाली, विहंगम शैलमालाएं और शीतल हवाएं सैलानियों को अपनी ओर बरबस आकर्षित करती हैं।
🕉️ जलप्रपात के समीप विराजमान हैं कर्मघोंघेश्वर महादेव, कुंड में स्नान कर जलाभिषेक करते हैं भक्त
जलप्रपात के बिल्कुल निकट लगभग 40 वर्ष प्राचीन कर्मघोंघेश्वर महादेव मंदिर अवस्थित है।
यद्यपि यहाँ वर्ष भर भगवान भोलेनाथ के दर्शन हेतु श्रद्धालु पधारते हैं, परंतु सावन मास में यहाँ जनसैलाब उमड़ पड़ता है। श्रद्धालु सर्वप्रथम पवित्र कुंड में आस्था की डुबकी लगाते हैं और तदुपरांत भगवान शिव का विधि-विधान से जलाभिषेक कर सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना करते हैं।
💬 “सच्चे मन से पूजा करने पर पूरी होती हैं मनोकामनाएं”: पुजारी अनिरुद्ध मिश्रा
“मान्यता है कि यहाँ भगवान आशुतोष की सच्चे मन से अर्चना करने पर सभी मनोकामनाएं सिद्ध होती हैं। इसी अटूट विश्वास के कारण छत्तीसगढ़ के अतिरिक्त पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश और आसपास के दूरस्थ अंचलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहाँ पहुँचते हैं।”
🤝 सर्वधर्म समभाव और सामाजिक सौहार्द की मिसाल, विभिन्न जिलों से पहुँच रहे श्रद्धालु
कर्मघोंघेश्वर धाम न केवल एक पवित्र धार्मिक स्थल है, अपितु सामाजिक समरसता और सामाजिक सौहार्द का भी अनुपम प्रतीक है।
यहाँ हिंदू, मुस्लिम सहित सभी धर्मों व संप्रदायों के लोग अगाध श्रद्धा के साथ शीश नवाते हैं। सावन के दौरान बैकुंठपुर, कोरिया, मनेंद्रगढ़, जनकपुर, झगराखांड, सूरजपुर तथा अंबिकापुर सहित अनेक क्षेत्रों से निरंतर श्रद्धालुओं का आगमन हो रहा है। प्रातःकाल से संध्या आरती तक मंदिर परिसर ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गुंजायमान रहता है।
🏞️ नदियों के पवित्र संगम से बढ़ता है आध्यात्मिक महात्म्य, ग्रामीणों ने संवारा धाम
मंदिर के पुजारी बताते हैं कि देवालय के समीप सुनहरी नदी सहित अन्य कई स्थानीय नदियों का पवित्र संगम होता है।
परिसर में स्थित कुंड श्रद्धालुओं के लिए विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है। स्नान ध्यान के उपरांत भक्तजन मुख्य देवालय में जलाभिषेक करते हैं, जहाँ माता दुर्गा एवं संकटमोचन हनुमान जी की प्रतिमाएं भी प्रतिष्ठित हैं। इस धाम के सर्वांगीण विकास में स्थानीय ग्रामवासियों की अग्रणी भूमिका रही है, जिन्होंने वर्षों से सेवाभाव के साथ मार्ग निर्माण, साफ-सफाई और आयोजनों में सहयोग दिया है।
⛺ पर्यटकों को भा रहा प्राकृतिक वातावरण, महिलाओं के चेंजिंग रूम व पेयजल सुविधाओं की दरकार
बिहार के कैमूर जिले से आए पर्यटक मोहम्मद शमीम ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यहाँ का शांत प्राकृतिक परिवेश और आध्यात्मिक वातावरण अत्यंत मनमोहक है।
उन्होंने सुझाव दिया कि यदि प्रशासन द्वारा महिलाओं के लिए सुरक्षित चेंजिंग रूम, आधुनिक शौचालय, पेयजल और विश्राम गृह जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करा दी जाएं, तो यह स्थल राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर अपनी विशिष्ट पहचान बना सकता है।
✨ सावन में गुंजायमान हो रहा हर-हर महादेव का जयघोष, सुविधाओं के विस्तार की आवश्यकता
सावन के इस पावन अवसर पर मंदिर प्रांगण में गूंजती घंटियों की ध्वनि और कलकल बहते जलप्रपात का नाद भक्तों को अलौकिक आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करता है।
यद्यपि धार्मिक एवं पर्यटन दृष्टि से इस महत्वपूर्ण स्थल पर अभी भी पक्की सड़कों, सुव्यवस्थित पार्किंग, पेयजल, रोशनी तथा सुरक्षा बलों की तैनाती जैसी बुनियादी सुविधाओं के व्यापक विस्तार की आवश्यकता महसूस की जा रही है।