रेलवे स्टेशन परिसर में अवैध सीवर कनेक्शन पर एक्शन: दीवार तोड़कर नाले में बहाया जा रहा था होटलों का गंदा पानी
रेवाड़ी: रेलवे स्टेशन परिसर की सुरक्षा दीवार को तोड़कर अवैध रूप से सीवर कनेक्शन जोड़ने और आसपास के होटलों से निकलने वाला गंदा पानी व अपशिष्ट (मल) रेलवे के नाले में बहाने के गंभीर मामले में रेलवे प्रशासन ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है।
इस अवैध और नियम विरुद्ध गतिविधि के कारण स्टेशन परिसर में अत्यधिक गंदगी और असहनीय दुर्गंध की स्थिति उत्पन्न हो गई थी।
रेलवे प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थल निरीक्षण कराया और दोषी पाए गए व्यक्तियों के खिलाफ विधिक व विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी है।
📜 डीआरएम को भेजी गई थी शिकायत: 4 लोगों को जारी हुए तत्काल प्रभाव से नोटिस
मामले की जांच और प्रशासन द्वारा उठाए गए कदम:
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डीआरएम से की गई थी शिकायत: जानकारी के अनुसार, नई आबादी क्षेत्र के एक जागरूक नागरिक ने उत्तर पश्चिम रेलवे के जयपुर मंडल रेल प्रबंधक (DRM) को औपचारिक पत्र भेजकर स्टेशन परिसर में खुलेआम किए जा रहे अवैध सीवर कनेक्शन की विस्तृत शिकायत की थी।
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चार व्यक्तियों को नोटिस: शिकायत पर त्वरित संज्ञान लेते हुए रेलवे अधिकारियों की ओर से नंद किशोर, हेमंत, कमल और राम सिंह नामक व्यक्तियों को अधिकृत नोटिस जारी किए गए हैं।
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तत्काल कनेक्शन काटने के आदेश: जारी किए गए नोटिस में संबंधित व्यक्तियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि स्टेशन सीमा क्षेत्र में किए गए इस अनधिकृत सीवर कनेक्शन को अविलंब बंद कर हटाया जाए, अन्यथा रेलवे अधिनियम के तहत दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
⚠️ यात्रियों और नागरिकों के लिए सिरदर्द बनी दुर्गंध: बीमारियों के फैलने की आशंका
अवैध कनेक्शन से उत्पन्न हुई समस्याएं:
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दीवार तोड़कर डाली गई सीवर लाइन: शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि रेलवे की सुरक्षा दीवार को अनधिकृत रूप से तोड़कर निजी लाभ के लिए भूमिगत सीवर पाइपलाइन डाली गई।
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होटलों का अपशिष्ट रेलवे नाले में: इस पाइपलाइन के जरिए आसपास संचालित होटलों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से निकलने वाला गंदा पानी, कचरा और शौचालय का मल सीधे रेलवे के खुले नाले में प्रवाहित किया जा रहा था।
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यात्रियों को भारी परेशानी: नाले में जमा हो रहे इस गंदे पानी से स्टेशन और आसपास के समूचे इलाके में भारी बदबू फैल रही है, जिससे ट्रेनों का इंतजार कर रहे दैनिक यात्रियों, रेलवे कर्मचारियों और स्थानीय निवासियों को सांस लेना तक दूभर हो रहा था तथा संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया था।