Indore Mhow Murder Case: टीवी सुधारने में देरी पर इलेक्ट्रॉनिक कारोबारी की गोली मारकर हत्या, कोर्ट ने पूर्व फौजी को सुनाई उम्रकैद की सजा
इंदौर: मध्य प्रदेश के महू क्षेत्र से एक चर्चित और सनसनीखेज मामले में अदालत ने बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। टीवी सुधारने में मामूली देरी की बात को लेकर एक इलेक्ट्रॉनिक कारोबारी की गोली मारकर हत्या करने के मामले में प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश डॉ. प्रीति श्रीवास्तव की अदालत ने आरोपी पूर्व आर्मी जवान जयदीप सिंह परिहार को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा से दंडित किया है। इसके साथ ही, अदालत ने दोषी पर पांच हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। लगभग चार साल पुराने इस गंभीर हत्याकांड की संवेदनशीलता को देखते हुए इसे पुलिस और प्रशासन द्वारा जघन्य एवं चिन्हित प्रकरणों की श्रेणी में रखा गया था, जिसकी सुनवाई त्वरित गति से पूरी की गई। अभियोजन पक्ष की तरफ से अदालत के समक्ष कुल 13 गवाहों के पुख्ता बयान और साक्ष्य प्रस्तुत किए गए, जिनके आधार पर आरोपी के खिलाफ दोष सिद्ध हुआ। उपनिदेशक अभियोजन आशीष कुमार खरे के अनुसार, यह पूरी दर्दनाक घटना 12 सितंबर 2022 की है।
पूर्व फौजी जयदीप सिंह परिहार ने दो महीने से टीवी न मिलने पर किया था विवाद, दुकान पर पहुंचकर की थी गाली-गलौज
घटना के संबंध में प्राप्त विवरण के मुताबिक, महू के व्यस्त गोकुलगंज इलाके में अपनी इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान चलाने वाले नीलेश अग्रवाल के प्रतिष्ठान पर दोपहर के करीब 3:45 बजे ग्रे रंग की एक्टिवा स्कूटी पर सवार होकर जयदीप सिंह परिहार पहुंचा था। आरोपी अपनी टेलीविजन पिछले दो महीने से रिपेयर करके वापस न मिलने की बात को लेकर सीधे नीलेश के साथ बहस करने लगा। व्यापारी नीलेश अग्रवाल ने उसे विनम्रता से समझाया कि कुछ दिनों से उनकी तबीयत खराब चल रही थी और दुकान भी बंद रही थी, जिस वजह से टीवी तय समय पर दुरुस्त नहीं की जा सकी। इसी साधारण सी बात पर दोनों के बीच कहासुनी ने तूल पकड़ लिया। आरोप के अनुसार, बहस के दौरान जयदीप सिंह परिहार ने खुद को सेना से सेवानिवृत्त (आर्मी रिटायर्ड) बताते हुए अपनी धौंस जमाई और नीलेश तथा उनके वहां मौजूद परिजनों के साथ खुलेआम अभद्र गालियां देना शुरू कर दिया। जब पीड़ित नीलेश ने इस बेतुकी बदसलूकी का विरोध किया, तो गुस्से से आग बबूला हुए आरोपी ने अपनी लाइसेंसी या अवैध रिवॉल्वर निकाल ली और कारोबारी को जान से खत्म करने की नीयत से एक के बाद एक लगातार चार से पांच गोलियां दाग दीं।
बाईं आंख के पास और सीने में लगी गोलियां, अस्पताल में इलाज के दौरान कारोबारी की थम गई थीं सांसें
आरोपी द्वारा चलाई गई गोलियों में से एक गोली नीलेश की बाईं आंख के ठीक पास लगी और दूसरी गोली सीधे उनके सीने में जा धंसी, जिससे वह लहूलुहान होकर वहीं ढेर हो गए। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी अपनी स्कूटी लेकर मौके से फरार हो गया। जिस वक्त यह खौफनाक वारदात हुई, उस समय नीलेश के भाई विकास अग्रवाल और उनकी माता उषा अग्रवाल दोनों ही दुकान पर मौजूद थे। उन्होंने अपनी आंखों के सामने इस खूनी खेल को होते देखा, लेकिन अचानक हुई ताबड़तोड़ गोलीबारी के खौफ और डर के कारण वे बीच-बचाव करने की हिम्मत नहीं जुटा सके। गंभीर रूप से जख्मी हालत में नीलेश को तुरंत उपचार के लिए किशनगंज स्थित मेवाड़ा अस्पताल ले जाया गया, परंतु अत्यधिक खून बह जाने के कारण अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी सांसें थम गईं और उनकी मौत हो गई। इस वारदात के बाद महू पुलिस ने तुरंत सक्रियता दिखाते हुए आरोपी के खिलाफ हत्या की संगीन धाराओं में केस दर्ज किया और गहन तफ्तीश के बाद अदालत में चार्जशीट पेश की। इस मामले में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक महेंद्र सिंह मुजाल्दे ने मजबूती से पैरवी की। अभियोजन पक्ष द्वारा रखे गए ठोस तर्कों और वैज्ञानिक साक्ष्यों से संतुष्ट होकर माननीय न्यायालय ने आरोपी जयदीप सिंह परिहार को आजीवन कारावास की सजा का यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।