Supreme Court Hearing on SIR: महाराष्ट्र में वोटर लिस्ट से नाम काटने के मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, चुनाव आयोग को नोटिस जारी
महाराष्ट्र में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने के गंभीर आरोपों पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में एक अहम सुनवाई हुई। अदालत ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी करते हुए 4 सप्ताह के भीतर जवाब तलब किया है। इसके साथ ही, सर्वोच्च अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई भी प्रशासनिक फैसला कानून के अनुसार नहीं पाया जाता है, तो उसे तुरंत रद्द कर दिया जाएगा। इस महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा की गई।
📊 एसआईआर के खिलाफ 22 याचिकाएं, स्वतंत्र ऑडिट की मांग
दाखिल की गई याचिका में आरोप लगाया गया है कि महाराष्ट्र में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान लगभग 33% मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। वेरिफिकेशन अधूरा रहने, फॉर्म समय पर जमा न होने और कई तकनीकी दिक्कतों के कारण 1 करोड़ से अधिक लोगों के नाम मतदाता सूची से गायब पाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों पर चुनाव आयोग की विस्तृत प्रतिक्रिया अभी आनी बाकी है।
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याचिकाओं का दायरा: सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर की प्रक्रिया, चुनाव आयोग और दिल्ली में हुए प्रदर्शनों को लेकर कुल 26 याचिकाएं दाखिल की गई हैं, जिनमें से 22 याचिकाएं अकेली एसआईआर के खिलाफ हैं। इसमें राहुल गांधी और विपक्ष के अन्य नेताओं की याचिकाएं भी शामिल हैं। CJI सूर्य कांत की बेंच ने संकेत दिया है कि कोर्ट एसआईआर से जुड़े मुद्दों को सामान्य रूप से नहीं, बल्कि राज्य-वार यानी हर राज्य के लिए अलग-अलग तरीके से सुलझाना चाहती है।
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स्वतंत्र समिति के गठन की मांग: याचिका में मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट के एक रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र समिति का गठन किया जाए, ताकि तय समयसीमा के भीतर एसआईआर के दौरान किए गए नाम विलोपनों और संशोधनों का स्वतंत्र ऑडिट हो सके। इस मामले में चुनाव आयोग, CEC ज्ञानेश कुमार और अन्य दोनों चुनाव आयुक्तों (सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी) को पक्षकार बनाया गया है।
📅 16 नवंबर को प्रकाशित होगी अंतिम मतदाता सूची
विवाद और आपत्तियों के बीच निर्वाचन आयोग ने महाराष्ट्र में ड्राफ्ट मतदाता सूची पर दावे और आपत्तियां दर्ज करने की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 26 अक्टूबर कर दिया है, जबकि अब अंतिम मतदाता सूची 16 नवंबर को प्रकाशित की जाएगी। इससे पहले अंतिम सूची जारी करने की तारीख 4 नवंबर निर्धारित की गई थी, और आपत्तियां दर्ज कराने की पुरानी डेडलाइन 30 सितंबर थी जिसे बाद में 12 अक्टूबर किया गया था।