Ujjain Demolition and Security News: शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने का काम जारी, 40 मजदूर तीन शिफ्ट में जुटे, 9 आरोपी न्यायिक हिरासत में भेजे गए
मध्य प्रदेश के उज्जैन में शाही मस्जिद विवाद के तीन दिन बीत जाने के बाद पुलिस प्रशासन की कार्रवाई का दायरा और अधिक व्यापक हो गया है। पुलिस अब इस पूरे मामले की जांच दूसरे जिलों तक फैलाते हुए सभी नामजद आरोपियों के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड खंगाल रही है। इसके साथ ही, इस घटना के पीछे किसी प्रतिबंधित संगठन या संदिग्ध नेटवर्क की संलिप्तता के एंगल पर भी बेहद गहराई से जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि इस घटना से जुड़ी हर एक छोटी-बड़ी कड़ी की बारीकी से पड़ताल की जा रही है और किसी भी संदिग्ध पहलू को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
🏗️ तीन शिफ्टों में 40 मजदूर कर रहे हैं काम, अगले 4 दिनों में प्रभावित हिस्से को पूरी तरह हटाने का लक्ष्य
घटनास्थल पर कानून व्यवस्था और प्रशासनिक निर्देशों के तहत लगातार तीसरे दिन भी शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने का काम युद्धस्तर पर जारी है। इस पूरी कार्रवाई को गति देने के लिए करीब 40 मजदूरों को तीन अलग-अलग शिफ्टों में लगाया गया है। प्रशासन का लक्ष्य है कि अगले लगभग 4 दिनों के भीतर इस पूरी प्रक्रिया को मुकम्मल कर लिया जाए, ताकि क्षेत्र में स्थिति पूरी तरह सामान्य हो सके।
👮♂️ 2500 पुलिसकर्मी, RAF, STF और CRPF का कड़ा पहरा; 8 ड्रोन और 100 सीसीटीवी कैमरों से हो रही निगरानी
कानून व्यवस्था को पूरी तरह नियंत्रण में रखने के लिए उज्जैन में सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं। एसपी प्रदीप शर्मा ने जानकारी दी कि शहर में कुल 2500 पुलिस जवानों को तैनात किया गया है, जिनमें 850 महिला पुलिस बल, 5 एएसपी, 21 डीएसपी और 32 टीआई स्तर के अधिकारी शामिल हैं। इसके अलावा आरएएफ (RAF), एसटीएफ (STF) और सीआरपीएफ (CRPF) की 3 कंपनियां मोर्चा संभाले हुए हैं। सुरक्षा और निगरानी के लिए 8 हाई-टेक ड्रोन और 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों का इस्तेमाल किया जा रहा है, साथ ही संवेदनशील बिंदुओं पर चेकिंग पॉइंट बनाए गए हैं।
⚖️ 9 आरोपी न्यायिक हिरासत में भेजे गए, वहीं सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वाले 100 से ज्यादा अकाउंट्स किए गए प्रतिबंधित
पुलिस कार्रवाई के तहत अब तक तीन अलग-अलग थानों में कुल 8 मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें 35 आरोपियों को नामजद किया गया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 15 लोगों को हिरासत में लिया था, जिनमें से 9 आरोपियों को न्यायालय के आदेश पर 12 अक्टूबर तक के लिए न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में भेज दिया गया है। इसके अलावा, पुलिस ने सोशल मीडिया पर भ्रामक, झूठी और तनाव फैलाने वाली जानकारियां साझा करने वाले कंटेंट क्रिएटर्स के खिलाफ भी सख्त रुख अपनाया है। ऐसे मामलों में अब तक 5 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और अफवाह फैलाने वाले 100 से अधिक सोशल मीडिया अकाउंट्स को चिन्हित कर प्रतिबंधित किया गया है।