Gold Loan Demand in India: मजबूरी नहीं बल्कि स्मार्ट चॉइस बना गोल्ड लोन, युवाओं में तेजी से बढ़ रहा क्रेज
भारत में सोने को गिरवी रखना हमेशा से एक भावुक और मजबूरी भरा कदम माना जाता रहा है, जब गंभीर बीमारी या बड़े संकट के समय ही लोग गहने बैंक या साहूकार के पास ले जाते थे. लेकिन अब हालात तेजी से बदल चुके हैं. एक्सपीरियन इंडिया के विशेषज्ञों के अनुसार, गोल्ड लोन अब सिर्फ ‘बुरे वक्त’ का साथी नहीं रहा बल्कि बाजार में इसकी मांग में 80 से 85 प्रतिशत तक का भारी उछाल आया है. आज का युवा वर्ग 20 साल के लंबे होम लोन या महंगे पर्सनल लोन में फंसने के बजाय अपनी तात्कालिक जरूरतों के लिए कम अवधि के गोल्ड लोन को ज्यादा प्राथमिकता दे रहा है.
🔄 2. कड़े नियमों और अनसिक्योर्ड लोन पर सख्ती के बाद बदला बाजार का पूरा रुख, सुरक्षित कर्ज बना पहली पसंद
पहले यह धारणा थी कि गोल्ड लोन सिर्फ अधेड़ उम्र के लोग या निम्न मध्यम वर्ग के लोग ही लेते हैं, लेकिन आज छोटे शहरों से लेकर महानगरों तक हर वर्ग के लोग इसका इस्तेमाल कर रहे हैं. इसके पीछे एक बड़ी वजह बैंकिंग नियमों का बदलना है. जब रिजर्व बैंक ने बिना गारंटी वाले पर्सनल लोन (अनसिक्योर्ड लोन) और डिजिटल लेंडिंग पर कड़े नियम लागू किए, तो कंपनियों ने सुरक्षित कर्ज (सिक्योर्ड लोन) की तरफ रुख किया. लेंडर्स के लिए गोल्ड लोन सबसे बेहतरीन विकल्प बन गया क्योंकि इसमें उनका जोखिम न के बराबर होता है.
⚠️ 3. टॉप-अप लोन के जाल से बचने और सही ईएमआई गणित समझने की जरूरत, वित्तीय अनुशासन है बेहद जरूरी
सोने पर लोन लेना भले ही आसान और तुरंत उपलब्ध होने वाला विकल्प हो, लेकिन इसमें वित्तीय जोखिम भी छिपा होता है. कई ग्राहक मूल कर्ज चुकाने के बजाय बार-बार टॉप-अप लोन लेते रहते हैं, जिससे वे हमेशा कर्ज के जाल में फंसे रहते हैं. जानकारों का मानना है कि कर्ज का असली फायदा तभी है जब समय पर उसका भुगतान करके सोना वापस छुड़ा लिया जाए. इसलिए अपनी चुकाने की क्षमता का सही आकलन करके और वित्तीय अनुशासन अपनाकर ही गोल्ड लोन का उपयोग करना चाहिए.