चंडीगढ़: हरियाणा के बहादुरगढ़ स्थित प्रतिष्ठित ‘पीडीएम डेंटल कॉलेज एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट’ (PDM Dental College & Research Institute) की मान्यता नेशनल डेंटल कमीशन (NDC) द्वारा आधिकारिक तौर पर रद्द कर दी गई है।
आयोग द्वारा जारी कड़े आदेशों के तहत कॉलेज के संचालन को तत्काल प्रभाव से बंद करने के निर्देश दिए गए हैं। संस्थान में अध्ययनरत बीडीएस (BDS) और एमडीएस (MDS) के छात्र-छात्राओं का शैक्षणिक सत्र और भविष्य प्रभावित न हो, इसके लिए केंद्र एवं राज्य सरकार ने उन्हें हरियाणा के अन्य मान्यता प्राप्त निजी और सरकारी डेंटल कॉलेजों में विधिवत समायोजित (शिफ्ट) करने का निर्णय लिया है।
🏛️ हरियाणा सरकार ने वापस ली अनापत्ति (NOC): पीजीआई रोहतक में होगी ऑफलाइन काउंसलिंग
प्रशासनिक कदम और छात्रों के समायोजन की व्यवस्था:
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राज्य सरकार की कार्रवाई: केंद्र सरकार और राष्ट्रीय दंत चिकित्सा आयोग के निर्णय के परिप्रेक्ष्य में हरियाणा के चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग ने कॉलेज को पूर्व में जारी की गई संचालन संबंधी अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) को तत्काल वापस ले लिया है।
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ऑफलाइन काउंसलिंग से होगा आवंटन: प्रभावित विद्यार्थियों को राज्य के अन्य मान्यता प्राप्त डेंटल कॉलेजों में रिक्त सीटों पर समायोजित करने के लिए पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (UHSR), रोहतक के माध्यम से ऑफलाइन काउंसलिंग आयोजित की जाएगी।
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जल्द जारी होगा विस्तृत शेड्यूल: विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा काउंसलिंग की निर्धारित तिथियां, पात्रता नियम और विस्तृत दिशा-निर्देश अलग से अधिसूचित किए जाएंगे।
📜 वर्ष 2006-07 में हुई थी शुरुआत: 2020 में वित्तीय अनियमितताओं की उठी थी शिकायत
संस्थान का इतिहास और विवादों की पृष्ठभूमि:
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शुरुआती सफर: बहादुरगढ़ में पीडीएम डेंटल कॉलेज की स्थापना शैक्षणिक सत्र 2006-07 में हुई थी, जिसके बाद वर्ष 2011 में इसे केंद्र सरकार द्वारा औपचारिक मान्यता प्रदान की गई थी।
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विश्वविद्यालयों से संबद्धता: समय-समय पर यह संस्थान विभिन्न राज्य व तकनीकी विश्वविद्यालयों से संबद्ध रहकर संचालित होता रहा।
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वित्तीय गड़बड़ी के आरोप: वर्ष 2020 में कॉलेज प्रबंधन के विरुद्ध गंभीर वित्तीय अनियमितताओं, शुल्क संबंधी विसंगतियों और प्रशासनिक कुप्रबंधन की शिकायतें शासन व नियामक संस्थाओं तक पहुंची थीं।
⚠️ इंफ्रास्ट्रक्चर और फैकल्टी में भारी कमियां: ₹5.10 करोड़ का जुर्माना भी नहीं भरा
निरीक्षण रिपोर्ट और दंडात्मक कार्रवाई का ब्योरा:
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संयुक्त निरीक्षण में उजागर हुईं खामियां: सितंबर 2025 में नियामक एजेंसियों द्वारा किए गए औचक संयुक्त निरीक्षण के दौरान कॉलेज के बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर), योग्य फैकल्टी की भारी कमी, अस्पताल की ओपीडी/आईपीडी सुविधाओं, पैथोलॉजी प्रयोगशालाओं, केंद्रीय पुस्तकालय और छात्र हॉस्टलों से जुड़ी कई गंभीर कमियां दर्ज की गईं।
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सुधार के मौकों की अनदेखी: निरीक्षण दल की रिपोर्ट के आधार पर प्रबंधन को सुधारात्मक कार्ययोजना (Compliance Report) प्रस्तुत करने के लिए कई अवसर दिए गए, लेकिन निर्धारित समयसीमा में कोई संतोषजनक उत्तर या सुधार प्रस्तुत नहीं किया गया।
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करोड़ों का जुर्माना बकाया: न्यूनतम मानकों का खुला उल्लंघन करने पर डेंटल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड द्वारा कॉलेज पर ₹5 करोड़ 10 लाख 90 हजार का भारी-भरकम आर्थिक दंड लगाया गया था। कॉलेज प्रबंधन ने अब तक यह जुर्माना राशि भी जमा नहीं कराई, जिसके परिणामस्वरूप संस्थान की मान्यता पूरी तरह निरस्त कर दी गई।