‘पढ़ेगा इंडिया’ के दावों की खुली पोल: प्रतापगढ़ में पेड़ के तने के सहारे नाला पार करने को मजबूर मासूम
प्रतापगढ़ (राजस्थान): एक तरफ सरकारें शिक्षा के विकास, बुनियादी ढांचे और ‘पढ़ेगा इंडिया, तभी तो बढ़ेगा इंडिया’ के बड़े-बड़े दावे करती हैं, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर आ रही तस्वीरें इन दावों की हकीकत बयां कर रही हैं।
राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले से एक ऐसी ही हैरान और परेशान करने वाली तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरे प्रशासनिक अमले को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें मासूम स्कूली बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर एक नाले को पार करते नजर आ रहे हैं। यह मामला प्रतापगढ़ जिले के उदियाखेड़ी गांव का है। यहां नाले पर पुल न होने के कारण बच्चों को स्कूल जाने के लिए नाले के ऊपर पड़े एक पेड़ के तने का सहारा लेना पड़ रहा है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि बच्चे किस तरह संतुलन बनाते हुए, एक-एक कदम फूंक-फूंक कर नाले को पार कर रहे हैं। जरा सी चूक किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है, लेकिन पढ़ाई की ललक में ये बच्चे रोज अपनी जिंदगी दांव पर लगाने को मजबूर हैं।
⏳ आजादी के दशकों बाद भी नहीं बदली गांव की सूरत: 20 साल से पुल की मांग कर रहे ग्रामीण
ग्रामीणों का दर्द और प्रशासनिक उपेक्षा:
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बारिश में संपर्क भंग: ग्रामीणों का कहना है कि देश की आजादी के दशकों बाद भी उनके गांव की सुध लेने वाला कोई नहीं है। मानसून और बारिश के दिनों में यह नाला उफान पर आ जाता है, जिससे गांव का संपर्क पूरी तरह कट जाता है।
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20 सालों से लगातार गुहार: स्थानीय नागरिक बाबूलाल ने बताया कि ग्रामीण पिछले 20 सालों से इस नाले पर पुल निर्माण के लिए प्रशासन और सरकार से लगातार गुहार लगा रहे हैं, लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई।
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चुनावी वादों तक सीमित राहत: जब भी चुनाव आते हैं, जनप्रतिनिधि बड़े-बड़े वादे करके चले जाते हैं, परंतु चुनाव खत्म होते ही समस्या जस की तस बनी रहती है और हर साल बच्चों को इसी तरह जान जोखिम में डालकर स्कूल जाना पड़ता है।
📱 सोशल मीडिया पर फूटा लोगों का गुस्सा: प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
वायरल वीडियो पर प्रतिक्रियाएं:
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जनता के तीखे सवाल: बच्चों के इस खतरनाक सफर का वीडियो इंटरनेट पर आते ही प्रशासनिक व्यवस्था और स्थानीय नेतृत्व पर तीखे सवाल खड़े होने लगे हैं।
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हादसे का इंतजार: सोशल मीडिया यूजर्स वीडियो शेयर कर पूछ रहे हैं कि क्या किसी बड़े और दर्दनाक हादसे के बाद ही प्रशासन की कुंभकर्णी नींद खुलेगी?
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जिम्मेदारों से उम्मीद: अब देखना यह होगा कि इस वायरल वीडियो के संज्ञान में आने के बाद क्या जिम्मेदार अधिकारी जागते हैं और उदियाखेड़ी के ग्रामीणों को इस 20 साल पुरानी विकट समस्या से राहत दिला पाते हैं या नहीं।