पश्चिम बंगाल के पूर्व डिप्टी स्पीकर आशीष बनर्जी का संदिग्ध शव मिला: TMC ऑफिस में फंदे से लटके मिले, सुसाइड नोट बरामद
बीरभूम (पश्चिम बंगाल): पश्चिम बंगाल विधानसभा के पूर्व डिप्टी स्पीकर और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता आशीष बनर्जी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। रविवार (16 अगस्त) की सुबह बीरभूम जिले के रामपुरहाट स्थित टीएमसी पार्टी कार्यालय में उनका शव फांसी के फंदे से लटका हुआ बरामद किया गया। पुलिस को घटनास्थल से एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसे कब्जे में लेकर मामले की विधिक और फोरेंसिक जांच शुरू कर दी गई है। 74 वर्षीय आशीष बनर्जी तृणमूल कांग्रेस के कद्दावर नेताओं में गिने जाते थे।
🎓 कॉलेज प्रोफेसर से शुरू कर बने कद्दावर राजनेता, 5 बार रहे रामपुरहाट से विधायक
सक्रिय राजनीति में आने से पहले आशीष बनर्जी शिक्षा जगत से जुड़े हुए थे और रामपुरहाट कॉलेज में प्रोफेसर के रूप में सेवाएं दे रहे थे।
प्रोफेसर पद से त्यागपत्र देने के बाद वे राजनीति में आए और तृणमूल कांग्रेस के संस्थापक काल से जुड़े रहे। रामपुरहाट विधानसभा सीट पर उनका राजनीतिक प्रभाव इतना व्यापक था कि वे वर्ष 2001, 2006, 2011, 2016 और 2021 में लगातार 5 बार विधायक निर्वाचित हुए। ममता बनर्जी सरकार में वे पूर्व में स्कूल शिक्षा, कृषि तथा आयुष (AYUSH) राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों का कार्यभार संभाल चुके थे और पिछली विधानसभा में डिप्टी स्पीकर के पद पर रहे।
📜 सुसाइड नोट में भ्रष्टाचार के आरोपों का खंडन, राजनीति में आने पर जताया अफसोस
पुलिस द्वारा बरामद किए गए सुसाइड नोट में कई संवेदनशील बातों का उल्लेख है।
नोट में आशीष बनर्जी ने स्पष्ट लिखा कि उन्होंने अपने पूरे सार्वजनिक जीवन में कभी भ्रष्टाचार नहीं किया और न ही किसी कार्य के एवज में कोई अनुचित धन लिया। उन्होंने विशेष रूप से स्पष्ट किया कि तारापीठ-रामपुरहाट डेवलपमेंट अथॉरिटी (TRDA) के रेत टेंडर, बिल्डिंग प्लान पास करने, एनओसी (NOC) और चेक निर्गमन से जुड़े मामलों में उनकी कोई संलिप्तता नहीं थी। उन्होंने अपनी मौत के लिए किसी को भी जिम्मेदार नहीं ठहराया और पत्र में राजनीति में आने के अपने निर्णय पर गहरा अफसोस व्यक्त किया।
🇮🇳 स्वतंत्रता दिवस पर फहराया था तिरंगा, 24 घंटे के भीतर सामने आई दुखद खबर
घटना से एक दिन पूर्व 15 अगस्त (शनिवार) को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आशीष बनर्जी पूरी तरह सामान्य नजर आ रहे थे।
उन्होंने रामपुरहाट स्थित पार्टी कार्यालय के समीप राष्ट्रीय ध्वज फहराया था और इस कार्यक्रम की तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी साझा की थीं। उनके भाई प्रशांत बनर्जी के अनुसार, शनिवार रात तक सब कुछ सामान्य था। रविवार सुबह जब पार्टी कार्यालय के दरवाजे की झिरी से अंदर रस्सी लटकी दिखाई दी, तब परिजनों और पुलिस को सूचना दी गई, जिसके बाद दरवाजा खोलकर शव बाहर निकाला गया।
📉 चुनावी हार के बाद जिला कोर कमेटी के अध्यक्ष पद से दिया था इस्तीफा
हालिया विधानसभा चुनाव में रामपुरहाट सीट से भाजपा प्रत्याशी ध्रुबा साहा से मिली अप्रत्याशित हार के बाद से आशीष बनर्जी संगठन में कुछ अलग-थलग महसूस कर रहे थे।
उन्होंने 2 जून को बीरभूम जिला कोर कमेटी के अध्यक्ष पद से यह कहते हुए इस्तीफा दे दिया था कि कमेटी अब प्रभावी नहीं रह गई है और वे केवल पार्टी के एक सामान्य सदस्य के रूप में ही रहेंगे। पुलिस अब सुसाइड नोट की हैंडराइटिंग और अन्य सभी तकनीकी पहलुओं की विस्तृत जांच कर रही है।
