Rajasthan Artificial Lake: रेगिस्तान में बनी 28 किमी लंबी अनोखी जिगजैग झील; अब बाड़मेर-जैसलमेर में 365 दिन होगी पानी की सप्लाई

जैसलमेर: राजस्थान के थार रेगिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में सदियों से चली आ रही पानी की भीषण किल्लत को हमेशा के लिए दूर करने के लिए जलदाय विभाग (PHED) ने एक बेहद अनोखा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। विभाग ने जैसलमेर जिले में एक विशालकाय आर्टिफिशियल (कृत्रिम) झील तैयार की है, जो अपनी बनावट के कारण ‘जिगजैग झील’ (Zigzag Lake) के नाम से जानी जा रही है। जलदाय विभाग का दावा है कि इस अत्याधुनिक और विशालकाय इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट के जरिए अब जैसलमेर और बाड़मेर जिले के सुदूर गांवों में पूरे 365 दिन बिना किसी रुकावट के मीठे पानी की सप्लाई की जा सकेगी। करीब 28 किलोमीटर लंबी और 33 फीट गहरी इस मानव निर्मित झील को पश्चिमी राजस्थान के इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी और महत्वाकांक्षी जल भंडारण परियोजना माना जा रहा है।

🌊 इंदिरा गांधी नहरबंदी के दौरान नहीं तड़पेंगे बाड़मेर-जैसलमेर के लोग: साल 2024 में शुरू हुई इस झील परियोजना का उद्देश्य

परियोजना की तकनीकी पृष्ठभूमि की जानकारी देते हुए PHED के अधिशासी अभियंता रामपाल मूंधियाड़ा ने बताया कि भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे इन इलाकों में हर साल इंदिरा गांधी मुख्य नहर की मरम्मत, सिल्ट सफाई और रखरखाव के लिए करीब एक महीने तक आधिकारिक तौर पर ‘नहरबंदी’ की जाती है। इस नहरबंदी के दौरान बाड़मेर और जैसलमेर जिलों में पेयजल की भारी किल्लत और त्राहि-त्राहि मच जाती थी, क्योंकि इन जिलों में आपातकाल के लिए पानी रोकने का कोई बड़ा स्टोरेज सिस्टम या प्राकृतिक ढांचा मौजूद नहीं था। इसी गंभीर समस्या का स्थायी समाधान खोजने के उद्देश्य से साल 2024 में इस मेगा झील परियोजना की नींव रखी गई थी, जो अब पूरी तरह बनकर तैयार हो चुकी है।

🛡️ रेतीली जमीन पर पानी रोकने के लिए बिछाई गई 300 माइक्रोन की स्पेशल शीट: एस्केप चैनल के जरिए झील में आएगा नहर का अतिरिक्त पानी

इस विशालकाय वॉटर प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी और खास इंजीनियरिंग विशेषता यह है कि मरुस्थल की अत्यधिक सोखने वाली रेतीली जमीन पानी की एक भी बूंद को जमीन के अंदर न सोख ले, इसके लिए पूरी झील के तल (Bottom) में 300 माइक्रोन मोटाई वाली बेहद मजबूत और स्पेशल प्लास्टिक शीट (Geomembrane Sheet) की परत बिछाई गई है। यह अभेद्य परत पानी को जमीन में रिसने (Seepage) से पूरी तरह रोकेगी। इस झील में इंदिरा गांधी नहर से मानसून के दौरान आने वाले बारिश के अतिरिक्त व फालतू बहने वाले पानी को सुरक्षित रूप से स्टोर किया जाएगा। बाद में, नहरबंदी के दौरान या आवश्यकता पड़ने पर इस संचित पानी को आधुनिक फिल्टर प्लांट के जरिए शुद्ध करके पाइपलाइनों से बाड़मेर और जैसलमेर के लाखों घरों के किचन तक पहुंचाया जाएगा।

⏱️ छोर पार करने में नाव को लगेंगे पूरे 24 घंटे: मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा 9 जुलाई को कर सकते हैं भव्य उद्घाटन

जलदाय विभाग के शीर्ष अधिकारियों का दावा है कि इस झील में संचित पानी से दोनों जिलों के करीब 50 लाख लोगों को पूरे एक साल तक लगातार बिना किसी कटौती के पीने का पानी उपलब्ध कराया जा सकता है। अधिकारियों ने इसके विशालकाय आकार का अंदाजा देते हुए बताया कि यह झील इतनी लंबी और घुमावदार है कि अगर कोई नाव के जरिए इसके एक छोर से दूसरे छोर तक जाना चाहे, तो उसे लगभग 24 घंटे का सफर तय करना पड़ सकता है। सरकारी सूत्रों से मिली ताजा जानकारी के अनुसार, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा आगामी 9 जुलाई को जैसलमेर का दौरा कर इस ऐतिहासिक और जनहितैषी परियोजना का आधिकारिक तौर पर उद्घाटन कर जनता को सौंप सकते हैं। इस हेतु इंदिरा गांधी नहर से झील को जोड़ने के लिए पहले से मौजूद पुराने एस्केप चैनल को भी कंक्रीट से पूरी तरह मजबूत और चौड़ा किया गया है।

👷 400 मजदूरों और 10 इंजीनियरों ने तैयार किया मरुस्थल का यह ‘अमृत सरोवर’: 141 करोड़ लीटर पानी स्टोर करने की है क्षमता

इससे पहले तक नहर का जो अतिरिक्त पानी पाकिस्तान की तरफ या खाली मैदानों में यूं ही बहकर व्यर्थ चला जाता था, अब उसे इस आधुनिक झील में पूरी तरह सहेज कर रखा जाएगा। मरुस्थल के इस बेहद कठिन भौगोलिक परिवेश में इस ड्रीम प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने के लिए पिछले दो सालों से करीब 400 कुशल मजदूरों और 10 वरिष्ठ हाइड्रोलिक इंजीनियरों की टीम दिन-रात काम कर रही थी। आंकड़ों के अनुसार, इस अभूतपूर्व झील का कुल तल क्षेत्रफल (Surface Area) करीब 71 लाख वर्ग मीटर है और इसकी कुल जल भंडारण क्षमता 1413 मिलियन क्यूबिक फीट (MCFT) आंकी गई है। तकनीकी रूप से इसमें एक समय में करीब 141 करोड़ लीटर पानी सुरक्षित जमा किया जा सकता है। थार रेगिस्तान जैसे विशाल और खाली रेतीले इलाके में इतने बड़े पैमाने पर बनने के कारण, राष्ट्रीय विशेषज्ञों द्वारा इसे संपूर्ण एशिया की सबसे बड़ी कृत्रिम झीलों (Asia’s Largest Artificial Lakes) की सूची में शामिल माना जा रहा है।

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