Haryana Bank Scam: ₹590 करोड़ के घोटाले में CBI की पहली चार्जशीट; मास्टरमाइंड बैंक मैनेजर सहित 15 आरोपी नामजद
चंडीगढ़: हरियाणा के बहुचर्चित और देश को झकझोर देने वाले ₹590 करोड़ के मेगा बैंक घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने वीरवार को पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत में अपनी पहली आधिकारिक चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल कर दी है। जांच एजेंसी द्वारा पेश की गई इस पहली चार्जशीट में कुल 15 मुख्य आरोपियों को सीधे तौर पर नामजद किया गया है। इन आरोपियों में बड़े बैंक अधिकारी, हरियाणा सरकार के कर्मचारी, शेल (फर्जी) कंपनियों के शातिर संचालक और कई रसूखदार निजी व्यक्ति शामिल हैं। सीबीआई की सिफारिश पर ये सभी 15 आरोपी फिलहाल जेल में न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) के तहत बंद हैं।
👔 हरियाणा की टॉप ब्यूरोक्रेसी पर कसा सीबीआई का शिकंजा: पंचायत विभाग के सीनियर IAS अफसर से दफ्तर में मैराथन पूछताछ
दूसरी ओर, इस महाघोटाले की जड़ों और राजनीतिक कड़ियों को पूरी तरह खंगालने के लिए सीबीआई ने प्रदेश की टॉप ब्यूरोक्रेसी (वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों) पर अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। जांच एजेंसी के आला अधिकारी लगातार कई वरिष्ठ अफसरों से बंद कमरे में पूछताछ कर रहे हैं। इसी कड़ी के तहत वीरवार को हरियाणा कैडर के एक बेहद सीनियर आई.ए.एस. (IAS) अधिकारी को तलब कर सीबीआई ने घंटों मैराथन पूछताछ की। ये वरिष्ठ अधिकारी लंबे समय तक प्रदेश के पंचायत विभाग में आयुक्त (कमिश्नर) एवं सचिव (सेक्रेटरी) जैसे रसूखदार पदों पर कार्यरत रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई कड़ाई से यह जानने का प्रयास कर रही है कि सरकारी विभागों के खातों से जब सैकड़ों करोड़ रुपए की अवैध निकासी की जा रही थी, तो प्रशासनिक स्तर पर कौन-कौन से अधिकारी इस बात से पूरी तरह वाकिफ थे और किस स्तर पर जानबूझकर विभागीय निगरानी में इतनी बड़ी चूक होने दी गई।
⚖️ आपराधिक साजिश, जालसाजी और भ्रष्टाचार एक्ट के तहत केस दर्ज: जल्द कोर्ट में पेश की जाएगी सप्लीमेंट्री चार्जशीट
सीबीआई के आधिकारिक प्रवक्ता के अनुसार, कानूनी समयसीमा (तय अवधि) को ध्यान में रखते हुए फिलहाल पहली चार्जशीट पेश की गई है। इस पहली चार्जशीट में 6 बैंक अधिकारी, हरियाणा सरकार के 3 कर्मचारी, 2 अवैध शेल कंपनियां (उनके 3 निदेशकों व पार्टनरों सहित) और एक निजी व्यक्ति को मुख्य साजिशकर्ता बनाया गया है। जांच एजेंसी ने इन सभी आरोपियों पर आपराधिक साजिश रचने, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, जाली दस्तावेज तैयार करने (जालसाजी), सबूतों को नष्ट करने और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (Prevention of Corruption Act) की गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि इन 15 आरोपियों के खिलाफ डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्य पूरी तरह जुटाकर जांच पूरी कर ली गई है। हालांकि, अन्य विभागों में सरकारी धन के गबन और इसमें शामिल अन्य सफेदपोशों की जांच अभी तेजी से जारी है। एजेंसी ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि जल्द ही इस मामले में कई अतिरिक्त (सप्लीमेंट्री) चार्जशीट भी कोर्ट के समक्ष दाखिल की जा सकती हैं।
🕵️ चार्जशीट में हुआ घोटाले के मुख्य किरदारों का पर्दाफाश: मास्टरमाइंड बैंक मैनेजर रिभव ऋषि और उसकी पत्नी की कंपनी पर बड़ा खुलासा
सीबीआई ने चार्जशीट में इस पूरे घोटाले के मुख्य किरदारों की भूमिका को विस्तार से उजागर किया है:
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रिभव ऋषि (मास्टरमाइंड): यह आरोपी पूर्व में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (IDFC First Bank) की सेक्टर-32, चंडीगढ़ शाखा का मैनेजर था, जिसने बाद में एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक ज्वाइन कर लिया था। इसे पूरे घोटाले का मुख्य सूत्रधार (मास्टरमाइंड) माना गया है, जिसने फर्जी कंपनियों के नाम पर खाते खोलकर सरकारी धन को सीधे वहां डायवर्ट करने का ब्लूप्रिंट तैयार किया।
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अभय (पूर्व रिलेशनशिप मैनेजर): इसने अगस्त 2025 में बैंक से इस्तीफा दिया था। इसने रिभव के साथ मिलकर फर्जी चेक और जाली भुगतान निर्देशों के जरिए करोड़ों रुपए की हेराफेरी को अंजाम दिया।
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स्वाति सिंगला: यह मुख्य आरोपी अभय की पत्नी है और ‘स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स’ नामक कंपनी की मालकिन है। बैंक से फर्जी तरीके से निकाले गए ₹590 करोड़ में से करीब ₹300 करोड़ की भारी-भरकम राशि सीधे इसी कंपनी के बैंक खाते में ट्रांसफर की गई थी।
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अभिषेक सिंगला: यह स्वाति सिंगला का सगा भाई और कंपनी का हिस्सेदार है, जिसे फंड ट्रांसफर और अवैध मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में दबोचा गया है।
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अमित दीवान (सरकारी कर्मचारी): यह हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPGCL) में डायरेक्टर (फाइनेंस) के पद पर तैनात था, जिसे मार्च 2026 में गिरफ्तार किया गया था। इस पर आरोप है कि इसने मोटी रिश्वत लेकर सरकारी फंड को नियमों के खिलाफ निजी बैंकों में जमा कराया और अवैध लेनदेन को जानबूझकर नजरअंदाज किया।
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राजेश सांगवान: यह हरियाणा मार्केटिंग बोर्ड के वित्त और लेखा नियंत्रक के पद पर तैनात था, जिसकी मिलीभगत के पुख्ता सबूत मिले हैं। इसके अलावा कई बिचौलिए, रियल एस्टेट डेवलपर्स और निचले स्तर के बैंक कर्मी भी इस सूची में शामिल हैं।
💰 ईडी (ED) की स्पेशल कोर्ट ने मास्टरमाइंड रिभव को भेजा 1 दिन की रिमांड पर: फर्जी खातों से मनी लॉन्ड्रिंग की जांच तेज
सीबीआई की चार्जशीट के साथ-साथ इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) का एक्शन भी समानांतर रूप से जारी है। ईडी ने वीरवार को कथित मास्टरमाइंड रिभव ऋषि की 10 दिनों की कस्टडी खत्म होने के बाद उसे पंचकूला की विशेष पीएमएलए (PMLA) कोर्ट में पेश किया। ईडी के वकीलों ने मनी ट्रेल और विदेशों में भेजे गए पैसे का पता लगाने के लिए रिभव की 4 दिन की और रिमांड मांगी, लेकिन दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने ईडी को महज 1 दिन की अतिरिक्त हिरासत (ED Custody) मंजूर की। ईडी की जांच में अब तक यह साफ हो चुका है कि आरोपी ने फर्जी शेल कंपनियों का एक बड़ा जाल बुनकर हरियाणा सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन के बेहद सुरक्षित माने जाने वाले खातों में सेंध लगाई और करोड़ों रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग की वारदात को अंजाम दिया।