Allahabad High Court: मदरसों की जांच पर NHRC की कार्यशैली से ‘स्तब्ध’ हुआ हाई कोर्ट; मॉब लिंचिंग का जिक्र कर जस्टिस अतुल श्रीधरन ने उठाए सवाल
प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के मदरसों की जांच के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के प्रति बेहद कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने आयोग द्वारा मदरसों की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) से जांच कराने के निर्देश पर “स्तब्धता” जाहिर की है। सुनवाई के दौरान मानवाधिकार आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कोर्ट ने मॉब लिंचिंग जैसी घटनाओं का भी हवाला दिया।
जस्टिस अतुल श्रीधरन की तल्ख टिप्पणी
जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस विवेक सरन की डिवीजन बेंच में याचिकाकर्ता ‘टीचर्स एसोसिएशन मदारिस अरबिया’ की अर्जी पर सुनवाई हो रही थी। इस दौरान जस्टिस श्रीधरन ने अपने आदेश में कहा:
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निष्पक्षता पर सवाल: जब मुस्लिमों की मॉब लिंचिंग होती है, तब मानवाधिकार आयोग मौन रहता है, लेकिन मदरसों की जांच की बात आने पर आयोग असाधारण रूप से सक्रिय हो जाता है।
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अधिकार क्षेत्र: कोर्ट ने प्रथम दृष्ट्या माना कि मानवाधिकार आयोग द्वारा ईओडब्ल्यू जांच का आदेश देना उसकी शक्तियों के बाहर और गैरकानूनी है।
डिवीजन बेंच में जजों के बीच मतभेद
इस महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान एक असामान्य स्थिति तब बनी जब बेंच के दोनों जजों के विचार अलग-अलग नजर आए:
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जस्टिस विवेक सरन का रुख: जस्टिस विवेक सरन ने जस्टिस श्रीधरन द्वारा NHRC पर की गई टिप्पणियों (पैरा 6 और 7) से खुद को अलग कर लिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इन टिप्पणियों से सहमत नहीं हैं।
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आगे की राह: जजों के बीच मतभेद होने के कारण अब संभावना जताई जा रही है कि यह मामला मुख्य न्यायाधीश द्वारा किसी बड़ी बेंच (Larger Bench) को रेफर किया जा सकता है।
EOW जांच पर रोक बरकरार, 11 मई को सुनवाई
हाई कोर्ट ने फिलहाल 588 अनुदानित मदरसों की ईओडब्ल्यू (EOW) जांच पर लगे अंतरिम स्टे को अगले आदेश तक बरकरार रखा है।
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नोटिस जारी: कोर्ट ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को नोटिस जारी कर अपने वकील के माध्यम से पक्ष रखने का निर्देश दिया है।
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अगली तारीख: मामले की विस्तृत सुनवाई अब 11 मई को होगी।
क्या है पूरा विवाद?
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के निर्देश पर उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के 588 मदरसों की जांच आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को सौंपी थी। मदरसा टीचर्स एसोसिएशन ने इसे मानवाधिकार आयोग के अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन बताते हुए हाई कोर्ट में चुनौती दी है।