झांसी-ओरछा के बीच सफर होगा आसान! ₹631 करोड़ से बनेगा नया ग्रीनफील्ड बायपास; NH 44 को मिलेगी जाम से मुक्ति
सागर: भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड के लिए बड़ी सौगात दी है. झांसी और ओरछा को जोड़ते हुए 15 किमी के ग्रीनफील्ड बॉयपास को मंजूरी मिली है, जो 631 करोड़ की लागत से तैयार होगा और जिसकी लंबाई 15.572 किमी होगी. इस ग्रीनफील्ड बॉयपास के कारण एनएच 44 और एनएच 39 आपस में कनेक्ट हो जाएंगे. इसका फायदा ये होगा कि एनएच 44 पर होने वाला पूरे देश का यातायात दबाव कम हो जाएगा. वहीं एमपी-यूपी के बुंदेलखंड के पर्यटन स्थल आपस में ग्रीनफील्ड बॉयपास के जरिए कनेक्ट हो जाएंगे.
फोरलेन ग्रीनफील्ड बॉयपास की सौगात
नेशनल हाइवे 44 पर बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने के साथ हाईवे कनेक्टिविटी मजबूत करने केंद्र सरकार ने बुंदेलखंड को बड़ी सौगात दी है. नेशनल हाइवे 44 के साउथ कारीडोर में फोरलेन ग्रीनफील्ड बाईपास के निर्माण की प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी मिल गई है. इस परियोजना पर 631.73 करोड़ रुपये खर्च होंगे और इसकी लंबाई 15.572 किमी होगी. प्रोजेक्ट को 6 मार्च को एसएफसी की मंजूरी मिल चुकी है.
प्रोजेक्ट की निगरानी हाईलेवल कमेटी करेगी. इस फोरलेन ग्रीनफील्ड बॉयपास के निर्माण में 427.29 करोड़ रुपये खर्च होंगे. बाकी राशि मुआवजे और अन्य कार्यों के खर्च के लिए प्रस्तावित है.
ईपीसी मोड पर बनेगा बॉयपास
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, ये ग्रीनफील्ड बॉयपास एनएच-44 पर बंगाय खास गांव (किमी 16/920) से शुरू होकर एनएच-39 पर ओरछा तिगेला (किमी 6/650) तक बनाया जाएगा. इसकी कुल लंबाई 15.572 किमी होगी. बॉयपास के निर्माण कार्य ईपीसी मोड पर एनएचएआई द्वारा कराया जाएगा. ईपीसी (EPC) यानि इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन है, जो इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट निर्माण में अनुबंध का तरीका है. जिसमें निजी कंपनियां डिजाइन, खरीद और निर्माण की जिम्मेदारी लेती हैं.
सैलानियों का सफर होगा आसान
केंद्रीय मंत्री और टीकमगढ़ सांसद डॉ. वीरेंद्र कुमार कहते हैं कि, ”यह मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड के लिए बड़ी सौगात है. खासकर नेशनल हाईवे 44 पर पूरे देश का यातायात दबाव बढ़ता जा रहा है, ऐसे में हमारे बुंदेलखंड के जिन शहरों से नेशनल हाईवे 44 गुजरता है वहां ट्रैफिक जाम की समस्या बन रही थी. इस बाईपास के बनने से झांसी सागर और दूसरे शहरों में यातायात की समस्या से छुटकारा मिलेगा.
कानपुर सागर और दूसरे शहरों से आसान कनेक्टिविटी होगी और सफर में कम समय लगेगा. दोनों बुंदेलखंड के पर्यटन स्थल की कनेक्टिविटी में सुधार होगा. सैलानियों का सफर आसान होगा जिस रोजगार और व्यवसाय की बढ़ोतरी होगी.”
